मास्टर प्लान : पांच साल बीत गये, पर पटना को कंसल्टेंट भी नहीं मिल पाये

Updated at : 27 Jul 2019 5:33 AM (IST)
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मास्टर प्लान : पांच साल बीत गये, पर पटना को कंसल्टेंट भी नहीं मिल पाये

शशिभूषण कुंवर, पटना : सरकार ने राज्य में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए पटना और छपरा समेत 13 शहरों का प्लानिंग एरिया घोषित कर दिया, लेकिन अफसरों की लेटलतीफी के चलते कंसल्टेंट बहाल नहीं हो पाये. प्लानिंग एरिया क्षेत्र घोषित इन सभी शहरों का विकास मास्टर प्लान के तहत किया जाना है. कंसलटेंट की […]

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शशिभूषण कुंवर, पटना : सरकार ने राज्य में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए पटना और छपरा समेत 13 शहरों का प्लानिंग एरिया घोषित कर दिया, लेकिन अफसरों की लेटलतीफी के चलते कंसल्टेंट बहाल नहीं हो पाये. प्लानिंग एरिया क्षेत्र घोषित इन सभी शहरों का विकास मास्टर प्लान के तहत किया जाना है.

कंसलटेंट की नियुक्ति नहीं होने से मास्टर प्लान के तहत बनने वाले भवनों का निर्माण, सड़कों, जलापूर्ति, बिजली आपूर्ति सहित अन्य सुविधाएं ठंडे बस्ते में हैं. इसके लिए समय सीमा भी पार हो गयी है.
हालत यह है कि पांच साल बीत जाने के बाद भी पटना में अधिकारी अब तक कंसल्टेंट खोजने में उलझे हुए हैं. राज्य में सबसे पहले राजधानी पटना का प्लानिंग एरिया की घोषणा की गयी. पटना को नये सिरे से और मास्टर प्लान के अनुसार बसाने के लिए कुल 1167.04 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को प्लानिंग एरिया घोषित किया गया है.
इसके अलावा 12अन्य शहरों -बोधगया, गया, आरा, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर, सहरसा, राजगीर, बेगूसराय, मुंगेर, पूर्णिया, दरभंगा और छपरा के प्लानिंग एरिया की भी घोषणा की गयी है. इन शहरों के प्लानिंग एरिया क्षेत्र में कोई भी मकान या निर्माण बिना नक्शा पास कराये नहीं किया जा सकता है.
शहरों के प्लानिंग एरिया में विकास के लिए उठाये जानेवाले कदम
नियमावली के मुताबिक प्लानिंग एरिया घोषित शहरों मेें सबसे पहले प्लानिंग एरिया ऑथोरिटी का गठन किया जाना है. उसका मास्टर प्लान तैयार किया जाना है.
मास्टर प्लान के तहत ही सड़कों और गलियों का निर्माण, खुले स्थान को चिह्नित किया जाना, जलापूर्ति और विद्युत आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और जल निकासी की व्यवस्था, नर्सरी, शिशु कक्ष, प्राथमिक विद्यालय, संयुक्त विद्यालय, औषधालय, पॉलिटेक्निक, सामुदायिक हॉल, पुस्तकालय, दुकानदारी सुविधाएं, खेल क्षेत्र, खेल मैदान, पार्कों का निर्माण, हरित क्षेत्र, थानों की स्थापना, सार्वजनिक बस पड़ाव, अग्निशमन केंद्र, डाकघर, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए बाधामुक्त सुविधाएं उपलब्ध कराना है.
सरकार व सरकारी अमला के कार्यों में समय का बड़ा गैप
राज्य के शहरों के प्लानिंग तरीके से विकसित करने के लिए सबसे पहले बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम 2012 को 27 दिसंबर, 2012 को अधिसूचित किया गया.
अधिनियम को लागू करने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जनवरी, 2013 में बिहार शहरी आयोजना एवं विकास बोर्ड का गठन किया गया. सरकार ने कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए जनवरी, 2014 में बिहार आयोजना एवं विकास नियमावली-2014 को अधिसूचित कर दी. नियमावली के बाद पांच सालों में अब तक किसी भी शहर में एक ईंट भी प्लानिंग तरीके से नहीं रखी गयी.
छपरा प्लानिंग एरिया की अधिसूचना जारी
नगर विकास एवं आवास विभाग ने गुरुवार को छपरा प्लानिंग एरिया की अधिसूचना जारी कर दी. इसके साथ ही छपरा शहर के 101 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बिल्डिंग बाइलॉज प्रभावी हो गया है. छपरा के अलावा रिविलगंज और मांझी प्रखंड के 65 गांवों में अब बिना नक्शा पास कराये नये भवनों का निर्माण नहीं किया जा सकता है. बिल्डिंग बाइलॉज के तहत नक्शा पास करने का अधिकार प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित प्लानिंग एरिया ऑथोरिटी को सौंप दिया गया है.
प्लानिंग एरिया घोषित
  • पटना 1167.04 वर्ग किमी
  • गया 308.31 वर्ग किमी
  • आरा 174.62 वर्ग किमी
  • बिहारशरीफ 58.23 वर्ग किमी
  • मुजफ्फरपुर 265.71 वर्ग किमी
  • सहरसा 294.19 वर्ग किमी
  • बेगूसराय 619.93 वर्ग किमी
  • मुंगेर 162.21 वर्ग किमी
  • पूर्णिया 619.73 वर्ग किमी
  • दरभंगा 191.11 वर्ग किमी
  • छपरा 101.09 वर्ग किमी
नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि नियोजित शहरों के विस्तार के लिए टाउन प्लानिंग एरिया घोषित किया जा रहा है. इन शहरों के मास्टर प्लान बनाया जा रहा है. साथ ही मास्टर प्लान के अनुसार शहर को बसाने के लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया की जा रही है. कंसल्टेंट के आने के बाद योजनाबद्ध तरीके से शहरों के विकास को गति मिलेगी.
-सुरेश कुमार शर्मा, मंत्री नगर विकास एवं आवास विभाग
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