पटना : ''फोर्टिफायड फूड'' के नाम पर बंट रही बीमारी

Updated at : 07 Jan 2019 9:46 AM (IST)
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पटना : ''फोर्टिफायड फूड'' के नाम पर बंट रही बीमारी

मुजफ्फरपुर के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी की रिपोर्ट ने खोली आंगनबाड़ी केंद्रों की पोल पटना : आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की सरकार की पहल को झटका लगने लगा है. जीविका के माध्यम से केंद्रों पर फोर्टिफायड फूड ‘विटामिक्स’ की आपूर्ति शुरू हुई. लेकिन, गुणवत्ता ऐसी कि बच्चों को स्वस्थ बनाने की बजाय […]

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मुजफ्फरपुर के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी की रिपोर्ट ने खोली आंगनबाड़ी केंद्रों की पोल
पटना : आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की सरकार की पहल को झटका लगने लगा है. जीविका के माध्यम से केंद्रों पर फोर्टिफायड फूड ‘विटामिक्स’ की आपूर्ति शुरू हुई. लेकिन, गुणवत्ता ऐसी कि बच्चों को स्वस्थ बनाने की बजाय और बीमार ही कर डाला है.
शुक्र है कि मुजफ्फरपुर की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने समय रहते खामियों को पकड़ लिया.
दरअसल, मुजफ्फरपुर के मुशहरी ग्रामीण और बोचहां में जीविका की ओर से की आपूर्ति की गयी ‘विटामिक्स’ में कीड़े और घून मिले हैं. एक्सपायरी डेट के पैकेट सप्लाई किये गये. इसकी शिकायत राज्य मुख्यालय पहुंची तो खलबली मच गयी है. अब निदेशक आलोक कुमार ने इसका संज्ञान लेते हुए बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति के राज्य मिशन निदेशक को पत्र लिखा है.
क्या है ‘विटामिक्स’ : ‘विटामिक्स’ में चावल, गेहूं व दाल केमिश्रण होते हैं. इसका प्लांट मुजफ्फरपुर के झपहां में लगाया गया है. यहीं ‘विटामिक्स’ के पैकेट तैयार होते हैं. परियोजना से जीविका को 12 हजार 970 रुपये हर केंद्र के हिसाब से दिये जाते हैं. इस राशि से वह पैकेट बनाकर केंद्रों पर बांटती हैं. तीन तरह के पैकेट तैयार किये जाते हैं. कुपोषित बच्चों को दो किलो व एक किलो के पैकेट, अति कुपोषित को दो-दो किलो के दो व एक किलो का एक पैकेट दिये जाते हैं.
आइसीडीएस सूत्रों के अनुसार फिलहाल दो प्रखंडों में ही इसे शुरू किया गया है. इसकेबाद दूसरे केंद्रों पर भी शुरू की जायेगी. यह पैकेट जीविका दीदी केंद्रों पर देती हैं. मुजफ्फरपुर के बोचहां से मिली जानकारी के अनुसार बोचहां में ‘विटामिक्स’ देने की शुरुआत तीन-चार माह पहले हुई थी. कुपोषित बच्चों को तीन किलो के पैकेट और अति कुपोषित बच्चों को पांच किलो के पैकेट दिये जाते हैं. वहीं, गर्भवती महिला को पौने चार किलो के पैकट दिये जाते हैं.
बाधित हो रहा टीएचआर
आइसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति के राज्य मिशन निदेशक को अवगत कराया है कि जीविका के स्तर से पर्याप्त मात्रा में ‘विटामिक्स’ की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. इसकी वजह से टीएचआर (टेक होम राशन) बाधित हो रहा है.
मुजफ्फरपुर के बाल विकास परियोजना मुशहरी ग्रामीण एवं बोचहां में कभी भी शत-प्रतिशत केंद्रों पर ‘विटामिक्स’ की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हुई है. साथ ही ‘विटामिक्स’ में एक्सपायरी तारीख समाप्त होने के कारण कीड़ा और घून पाया गया है. आईसीडीएस के निदेशक ने अनुरोध किया है कि मुजफ्फरपुर के जीविका संकुल संघ को निर्देश दिया जाये, ताकि भविष्य में गुणवत्ता और मात्रा से समझौता नहीं हो सके.
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