पटना : नहीं मिल रहे ब्रेन डेड मरीज, अब तक शुरू नहीं हो सका लिवर ट्रांसप्लांट
Updated at : 16 Nov 2018 9:15 AM (IST)
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आनंद तिवारी पटना : लिवर के मरीजों को ट्रांसप्लांट की सुविधा मिले, इसके लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट खोला गया. करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस यूनिट का उद्घाटन भी कर दिया गया. पर उद्घाटन के कई महीने बीतने के बाद भी आज तक एक भी लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हो […]
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आनंद तिवारी
पटना : लिवर के मरीजों को ट्रांसप्लांट की सुविधा मिले, इसके लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट खोला गया. करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस यूनिट का उद्घाटन भी कर दिया गया.
पर उद्घाटन के कई महीने बीतने के बाद भी आज तक एक भी लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया. अस्पताल प्रशासन द्वारा लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अलग से को-ऑर्डिनेटर कमेटी भी गठित की गयी है. यह कमेटी अभी तक ट्रांसप्लांट के लिए एक भी लिवर नहीं खोज पायी. ऐसे में नयी ट्रांसप्लांट यूनिट सिर्फ दिखावे की बन कर रह गयी है.
आईजीआईएमएस प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल है, जहां लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गयी है. लेकिन लिवर के अभाव में ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू नहीं हो पायी है. जिससे मरीजों को आज भी दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है, जहां अधिक खर्च करके लिवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ रहा है.
28 अगस्त को हुआ था उद्घाटन : आईजीआईएमएस में 28 अगस्त को लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया गया था. जिस दिन उद्घाटन हुआ, उसी दिन सात मरीजों का निबंधन ट्रांसप्लांट के लिए हुआ था. तब से मरीज लिवर मिलने के इंतजार में हैं. उनकी उम्र 30 से 60 वर्ष के बीच है. बीच में एक मरीज तैयार हुआ था, लेकिन बाद में उसने इन्कार कर दिया.
आये दिन आते रहते हैं ब्रेन डेड मरीज
शहर के आईजीआईएमएस, पीएमसीएच, एम्स और एनएमसीएच में आये दिन ब्रेन डेड मरीज आते हैं. जानकारों की मानें, तो अगर अस्पताल की ब्रेन डेड कमेटी एक्टिव रहती, तो इन अस्पतालों से संपर्क कर बॉडी को आईजीआईएमएस लाया जा सकता था. फिर आसानी से लिवर, किडनी, कॉर्निया आदि अंग डोनेट करवाये जा सकते थे. सूत्रों की मानें, तो लिवर ट्रांसप्लांट के लिए बनायी गयी कमेटी के सदस्य संबंधित अस्पताल से संपर्क नहीं करते.
लिवर ट्रांसप्लांट में लगते हैं 16 घंटे
लिवर ट्रांसप्लांट इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज नयी दिल्ली के डॉ विनियेंद्र पमेचा आईजीआईएमएस में पहला लिवर ट्रांसप्लांट करेंगे. डॉ पमेचा और आईजीआईएमएस के डॉक्टरों की टीम मिल कर काम करेगी. अभी चार टीमें बन कर तैयार हैं. ट्रांसप्लांट करने में 16 घंटे लगते हैं. ब्रेन डेड बॉडी से मृत्यु के 6 से 12 घंटे के अंदर लिवर लेना पड़ता है.
15 लाख में करना है लिवर ट्रांसप्लांट : एम्स में लिवर ट्रांसप्लांट में 13 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि आईजीआईएमएस में करीब 15 लाख रुपये का खर्च आयेगा. डॉक्टरों की मानें, तो लिवर ट्रांसप्लांट के बाद अगले 10 वर्षों तक मरीज जीवित रह सकता है.
क्या कहते हैं निदेशक
लिवर, किडनी व कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मौजूदा स्थिति को लेकर संस्थान में बैठक हो चुकी है. ब्रेन डेड बॉडी खोजने के लिए गंभीरता से प्रयास किया जायेगा. अस्पताल प्रशासन द्वारा इसके लिए काउंसेलर से लेकर संबंधित विभाग के अध्यक्षों को ब्रेन डेड बॉडी ढूंढ़ने की जिम्मेदारी दी गयी है.
ये मरीज कर सकते हैं लिवर डोनेट
आईजीआईएमएस के डॉ आशीष कुमार झा ने बताया कि वैसे लोग जिन्हें कोई गंभीर बीमारी, जैसे-एचआईवी, हेपेटाइटिस, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और पहले से लिवर और किडनी की कोई बीमारी नहीं है, वैसे लोग ही लिवर डोनेट कर सकते हैं. डोनर की उम्र अधिकतम 40 साल होनी चाहिए.
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