पटना : डायल 100 में जरूरत है 300 से अधिक कांस्टेबल की, 180 कार्यरत

Updated at : 09 Nov 2018 9:22 AM (IST)
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पटना : डायल 100 में जरूरत है 300 से अधिक कांस्टेबल की, 180 कार्यरत

पूरे प्रदेश से रोजाना छह से सात सौ कॉल हो रहे रिसीव पटना : डायल 100 में तीन सौ से अधिक कांस्टेबल की जरूरत है. लेकिन, फिलहाल 180 कांस्टेबल ही कार्यरत हैं. इसका असर यह है कि कुछ फोन सिस्टम पर काम नहीं हो रहा है. पिछले 25 सितंबर को डायल 100 का शुभारंभ हुआ […]

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पूरे प्रदेश से रोजाना छह से सात सौ कॉल हो रहे रिसीव
पटना : डायल 100 में तीन सौ से अधिक कांस्टेबल की जरूरत है. लेकिन, फिलहाल 180 कांस्टेबल ही कार्यरत हैं. इसका असर यह है कि कुछ फोन सिस्टम पर काम नहीं हो रहा है. पिछले 25 सितंबर को डायल 100 का शुभारंभ हुआ था और एक माह के बाद भी कर्मचारी की कमी पूरी नहीं हो पायी है.
अगर कर्मचारियों की संख्या तीन सौ के करीब भी कर दी जाती, तो एक ही समय में कॉल रिसीव होने की संख्या में इजाफा हो जाता. डायल 100 में 90 सिस्टम लगाये गये हैं. जिसमें से फोन रिसीव करने और फिर संबंधित पुलिस अधिकारियों को सूचना देने की सुविधा के साथ ही पीड़ित से काॅन्फ्रेंसिंग कराने की भी व्यवस्था की गयी है. लेकिन, कांस्टेबल की कमी के कारण फिलहाल 70 सिस्टम पर ही काम हो रहा है. अभी जहां एक बार में 70 कॉल रिसीव किये जा रहे हैं. वहीं, कांस्टेबल के रहने पर सभी सिस्टम पर फोन रिसीव होने लगेगा और रिसीव करने की क्षमता 70 से 90 हो जायेगी.
नये डायल 100 में लगे सिस्टम की टेक्नोलॉजी बेहतर : पटना में पूर्व से गांधी मैदान पुलिस लाइन में डायल 100 चल रहा था. जिसमें 30 सिस्टम लगे थे. यानी की एक बार में 30 कॉल रिसीव किये जा सकते थे और उनकी सूचना पर अग्रतर कार्रवाई की जा सकती थी. लेकिन, नये डायल 100 में 60 सिस्टम लगाये गये हैं. साथ ही पुराने और नये वाले काे जोड़ दिया गया है. पुराने डायल 100 में कुछ फेक कॉल आने की समस्या बरकरार है.
अगर किसी ने पुलिस की मदद के लिए डायल 100 को फोन लगाया तो कांस्टेबल उनके फोन को रिसीव करता है. इसके बाद उनकी समस्या पूछता है और किस जिले या थाने से संबंधित मामला है
उसकी भी जानकारी ली जाती है. इसके बाद कांस्टेबल के पास पूरे बिहार के हर थाने के थानाध्यक्ष, डीएसपी व एसपी का नंबर होता है. इसके बाद पहले थानाध्यक्ष को फोन किया जाता है और अगर उन्होंने किसी कारण से फोन रिसीव नहीं किया तो फिर डीएसपी या एसपी को फोन किया जाता है. इसके बाद पीड़ित की काॅन्फ्रेसिंग के माध्यम से बात करायी जाती है. साथ ही पीड़ित की बातचीत व पुलिस पदाधिकारी से बात की रिकॉर्डिंग भी ऑटोमेटिक हो जाती है.
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