पटना : झोंपड़ी में चल रहे प्राइमरी स्कूल

Updated at : 21 Aug 2018 6:48 AM (IST)
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पटना : झोंपड़ी में चल रहे प्राइमरी स्कूल

आनंद मिश्र बिना जमीन व भवन के विद्यालय, जहां भवन है वहां भी है कमरों की कमी पटना : दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों की बात कौन कहे, यहां तो प्रदेश की राजधानी में ही जुगाड़ तकनीक से विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है. इन विद्यालयों के पास न तो अपना भवन है और न […]

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आनंद मिश्र
बिना जमीन व भवन के विद्यालय, जहां भवन है वहां भी है कमरों की कमी
पटना : दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों की बात कौन कहे, यहां तो प्रदेश की राजधानी में ही जुगाड़ तकनीक से विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है. इन विद्यालयों के पास न तो अपना भवन है और न ही जमीन. बांस और फूस से बनी झोंपड़ी में विद्यालय का संचालन होता है. बच्चे जमीन पर दरी बिछा कर बैठते हैं. एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलती हैं. इतना ही नहीं, समय व परिस्थिति के अनुसार इन स्कूलों का पता-ठिकाना भी बदलता रहता है.
बानगी-1
प्राथमिक विद्यालय, एएन कॉलेज, पानी टंकी : इस विद्यालय की शुरुआत 1999 में हुई. तब यह विद्यालय पानी टंकी के पास एक सरकारी आवास में चलता था. आवास किसी को आवंटित कर दिया गया तो स्कूल को पानी टंकी के पास जल संसाधन विभाग की जमीन पर स्थानांतरित कर दिया गया.
2008 से यहीं झोंपड़ी बना कर विद्यालय का संचालन किया जा रहा है. शिक्षकों के सहयोग से जमीन पर फर्श व पानी टंकी की दीवार की सहायता से किचेन बनाया गया है. विद्यालय में पहली से पांचवीं कक्षा तक में 45 बच्चे और चार शिक्षक हैं, जिनमें एक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर हैं. विद्यालय के आसपास गाय-भैंस का तबेला, कीचड़, कूड़ा कर्कट और बदबू के बीच विद्यालय चलता है.
बानगी-2
प्राथमिक विद्यालय इंद्रपुरी रेलवे लाइन
इस विद्यालय की भी शुरुआत वर्ष 1999 में हुई थी. आरंभ में यह विद्यालय इंद्रपुरी रेलवे लाइन के पास चलता था.लेकिन रेलवे लाइन उजड़ने की बात आयी, तो स्कूल को स्थानांतरित कर पानी टंकी के पास भेज दिया गया. इस तरह इस स्कूल का भी पता बदल गया. यह भी बांस व फूस से बनी झोपड़ी में ही चलता है.
पक्की जमीन है, लेकिन इस विद्यालय व प्राथमिक विद्यालय एएन कॉलेज पानी टंकी का किचेन एक ही है. इसी वजह से इस विद्यालय का संचालन दूसरी पाली में सुबह 11:30 बजे से किया जाता है. यह उक्त विद्यालय से बिल्कुल सटा है, इसलिए यहां की स्वच्छता का हाल भी वैसा ही है. विद्यालय में पहली से पांचवीं कक्षा तक के 51 विद्यार्थी और 3 शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं.
बानगी-3
प्राथमिक विद्यालय धोबी घाट
आर ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय
धोबी घाट का दो मंजिला भवन है, जिसमेंनीचे व ऊपर दो कमरे हैं. दोनों कमरों में पहली से पांचवीं तक कक्षाएं चलती हैं. विद्यालय में दो शिक्षिकाएं व 57 विद्यार्थी हैं. कमरे व शिक्षकोंकी कमी के कारण एक कमरे में पहली व दूसरी तथा दूसरे कमरे में तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक साथ बैठा कर पढ़ाया जाताहै. विद्यालय की चहारदीवारी नहीं है, इस कारण असुरक्षा की स्थिति तो बनी ही रहती है, बाहरी लोग अपने वाहन भी विद्यालय परिसर में
पार्क कर देते हैं.
शिक्षिकाओं ने बताया कि चहारदीवारी नहीं होने के कारण बच्चे खेल नहीं पाते. दो ही कमरे होने के कारण विभिन्न कक्षाओं के बच्चों को साथ बैठा कर पढ़ाने में परेशानी तो होती है, लेकिन किसी तरह मैनेज करना पड़ता है.
शौच के लिए खुले में जाते हैं छोटे बच्चे
उक्त दोनों
विद्यालय के पिछले हिस्से में फूस व टाट से घेर कर एक शौचालय बनाया गया है, जिसका चौथी-पांचवीं कक्षा की छात्राएं उपयोग करती हैं. इसके अलावा छोटी कक्षाओं के बच्चे शौच के लिए खुले में जाते हैं. चूंकि विद्यालय की अपनी जमीन नहीं है, शौचालय के लिए भी स्कूल को विभागीय स्तर से कोई सहायता नहीं मिली है
कमरों की कमी है, इस कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठा कर पढ़ाया जाता है. विद्यालय की जमीन व भवन नहीं होने पर विभाग को कई बार लिखा गया है. अब हम क्या कर सकते हैं, हम अपना काम कर रहे हैं.
रवींद्र कुमार, प्रभारी शिक्षक, प्राथमिक विद्यालय एएन कॉलेज पानी टंकी विद्यालय में 51 विद्यार्थी हैं. तीन शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं, जिनमें दो नियोजित हैं. अपना भवन नहीं होने से परेशानी तो होती है, लेकिन हमें जो दायित्व दिया गया है, निर्वाह कर रहे हैं.
अनुराधा, प्रभारी शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय इंद्रपुरी रेलवे लाइन
ऐसे विद्यालय जिनके पास भूमि नहीं है, उसके लिए भवन का निर्माण कैसे कराया जा सकता है. अन्य विभाग की जमीन पर विद्यालय चलाये जाने की बात है, तो वहां भवन का निर्माण तभी संभव है, जब जमीन का हस्तानांतरण हो. लेकिन हमारे विचार से ऐसे विद्यालयों को मर्ज कर दिया जाना चाहिए.
– ललित नारायण रजक, डीपीओ-एसएसए, पटना
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