राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं विकास को लेकर बैठक
Updated at : 22 Jul 2018 3:53 AM (IST)
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पटना : राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बिहार अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और पुरातात्विक महत्व के स्थलों को विकसित कर इनकी पर्यटकीय संभावनाओं को व्यापक रूप से बढ़ा सकता है. इसके लिए सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर लगने वाले साइनेजों पर ऐतिहासिक तथ्यों को वस्तुनिष्ठ एवं रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए तथा […]
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पटना : राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बिहार अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और पुरातात्विक महत्व के स्थलों को विकसित कर इनकी पर्यटकीय संभावनाओं को व्यापक रूप से बढ़ा सकता है. इसके लिए सभी ऐतिहासिक महत्व के स्थलों पर लगने वाले साइनेजों पर ऐतिहासिक तथ्यों को वस्तुनिष्ठ एवं रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए तथा आकर्षक प्रचार-साहित्य भी तैयार होना चाहिए. वे सूबे की ऐतिहासिक धरोहरों और संरक्षित स्थलों के संरक्षण एवं विकास को लेकर एक बैठक कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक विरासत अत्यंत समृद्ध है. भारत के ‘स्वर्णयुग का इतिहास’ वस्तुत: बिहार का ही इतिहास है. विश्व के प्रथम गणतंत्र का गौरव प्राप्त वैशाली का अशोक स्तंभ वास्तुकला की अद्भुत मिशाल है. उन्होंने अभिषेक पुष्करिणी सरोवर, कोल्हुआ की अन्य पुरातात्विक विरासतें, रेलिक स्तूप वैशाली, राजा विशाल का गढ़, चतुर्मुखी महादेव, बनिया पोखर, मिरन जी की दरगाह आदि स्थलों के विकास की आवश्यकता जतायी. राज्यपाल ने वैशाली के ‘प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान’ में पुरानी जैन प्राकृत भाषा में रचित कई पांडुलिपियों के संरक्षण की बात कही. उन्होंने प्राचीन विक्रमशिला विवि के महत्व को रेखांकित करते हुए भागलपुर हवाई अड्डे के विकास के लिए समुचित कदम उठाये जाने का सुझाव दिया.
बैठक में संस्कृति मंत्रालय के सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि भारत सरकार ‘कल्चरल कॉम्प्लेक्स’ या स्टेट म्यूजियम के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता कर सकती है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की महानिदेशक उषा शर्मा ने कहा कि बिहार के पुरातात्विक महत्व के स्थलों के उत्खनन हेतु स्वीकृति प्रदान करने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पूरी तत्परता दिखायेगा. इनके विकास एवं संरक्षण हेतु राज्य को ‘समेकित एक्शन प्लान’ बनाकर सभी संबंधित विभागों के साथ मिल कर समन्वित चरणबद्ध प्रयास करना चाहिए.
बिहार के विकास आयुक्त शशिशेखर शर्मा ने स्थलों के समग्र विकास की समन्वित रूपरेखा शीघ्र तैयार कर लेने का भरोसा दिलाया. कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, कला, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद, भारत सरकार के सिविल विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरुण कुमार, पर्यटन मंत्रालय के महानिदेशक सत्यजीत रंजन सहित विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव/सचिव मौजूद रहे.
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