पटना : प्रदेश के 21.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा खरीफ सिंचाई का पानी

Updated at : 05 Jul 2018 8:21 AM (IST)
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पटना : प्रदेश के 21.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा खरीफ सिंचाई का पानी

अभियंताओं को सिंचाई परियाेजनाओं से पानी उपलब्ध कराने का निर्देश पटना : प्रदेश में इस साल 21.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सभी क्षेत्रों के अभियंताओं को बेहतर प्रबंधन के साथ सिंचाई परियाेजनाओं से पानी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया गया है. निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने […]

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अभियंताओं को सिंचाई परियाेजनाओं से पानी उपलब्ध कराने का निर्देश

पटना : प्रदेश में इस साल 21.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए सभी क्षेत्रों के अभियंताओं को बेहतर प्रबंधन के साथ सिंचाई परियाेजनाओं से पानी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया गया है.
निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए पानी की व्यवस्था के साथ ही अन्य विभागों से समन्वय बनाने का भी निर्देश दिया गया है. इसमें मुख्य रूप से कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हैं.
जल संसाधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है किपिछले साल 22,27,015 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ सिंचाई का लक्ष्य रखा गया था. इसमें से 19,53,516 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी गयी. इस साल सिंचाई का पानी देने के लिए सभी नहरों की मरम्मत करायी गयी है. गाद निकलवा कर नहरों का रास्ता ठीक किया गया है.
किन नहरों से मिलेगा पानी
विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए राज्य की सभी मुख्य नहरों से पानी की व्यवस्था की गयी है. इनमें सोन नहर प्रणाली, मध्यम सिंचाई योजना, उत्तर कोयल नहर प्रणाली, पटना मुख्य नहर, पूर्वी कोसी नहर, पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली, कमला सिंचाई योजना, पूर्वी गंडक नहर प्रणाली, पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली, चंदन जलाशय योजना और बदुआ जलाशय योजना शामिल हैं.
नौ परिक्षेत्रों के अधीन होगी मॉनीटरिंग
इन सभी नहरों के संचालन की जिम्मेदारी कुल नौ परिक्षेत्रों के तहत बांटी गयी है. इसकी मॉनीटरिंग वहां तैनात अभियंता करेंगे. इन परिक्षेत्रों में डिहरी, नालंदा, गया, औरंगाबाद, सहरसा, दरभंगा, मोतीहारी, सीवान और भागलपुर शामिल हैं.
क्या कहते हैं मंत्री
जल संसाधन विभाग के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि विभाग ने इस साल खरीफ सिंचाई के लिए खास व्यवस्था की है. इसके तहत खराब नहरों की मरम्मत करायी गयी है, ताकि किसानों को सिंचाई का पानी ठीक तरीके से मिल सके. इसकी मॉनीटरिंग के लिए अभियंताओं की तैनाती की गयी है. इसका मकसद किसानों को खरीफ फसलों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध करवा कर फसल उत्पादन को बढ़ावा देना है.
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