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बिहार : 500 वर्गमीटर क्षेत्र से अधिक में निर्माण पर आश्रय निधि वसूलेगी सरकार, जानें

Updated at : 30 Apr 2018 5:43 AM (IST)
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बिहार : 500 वर्गमीटर क्षेत्र से अधिक में निर्माण पर आश्रय निधि वसूलेगी सरकार, जानें

पटना : किफायती आवास और मलिन बस्ती (स्लम) पुनर्विकास एवं पुनर्विकास आवास नीति 2017 के अधीन राज्य सरकार ने ‘ आश्रय निधि ‘ का प्रावधान किया है. संशोधित नीति के तहत किसी भी आवासीय या वाणिज्यिक परियोजना, जिसकी कुल भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से अधिक है, से यह निधि वसूल की जायेगी. आश्रय निधि […]

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पटना : किफायती आवास और मलिन बस्ती (स्लम) पुनर्विकास एवं पुनर्विकास आवास नीति 2017 के अधीन राज्य सरकार ने ‘ आश्रय निधि ‘ का प्रावधान किया है.
संशोधित नीति के तहत किसी भी आवासीय या वाणिज्यिक परियोजना, जिसकी कुल भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से अधिक है, से यह निधि वसूल की जायेगी. आश्रय निधि किसी भी प्रोजेक्ट के टोटल बिल्ट अप एरिया के 10 फीसदी क्षेत्र पर लगेगा. मेट्रोपोलिटन शहर के लिए यह 750 रुपये प्रति वर्ग मीटर, अन्य सभी नगर निगमों के लिए 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर तथा सभी नगर परिषद व नगर पंचायत के लिए 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगा. कैबिनेट की स्वीकृति के बाद यह शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.
आवास निर्माण पर खर्च होगी राशि
आश्रय निधि का उपयोग राज्य स्तरीय स्वीकृति और निगरानी समिति के अनुमोदन के बाद किसी परियोजना विशेष, रियायती फीस के भुगतान अथवा किफायती आवास प्रदान करने से संबंधित किसी भी विकास कार्य के लिए निर्धारित पीडीए द्वारा किया जा सकेगा. यह राशि सक्षम प्राधिकार नक्शा स्वीकृत करने के पूर्व ही आवेदक से डीडी के रूप में प्राप्त करेगा और इसे नोडल एजेंसी बिहार राज्य आवास बोर्ड को जमा करेगा. आवास बोर्ड इस निधि की राशि को अलग बैंक खाते में जमा कर संचालित करेगा. इस निधि में सरकार भी प्रत्यक्ष रूप से योगदान कर सकेगी.
किफायती आवास मलिन
बस्ती पुनर्विकास संशोधन नीति में सरकार ने किया प्रावधान
मेट्रोपोलिटन एरिया में टोटल बिल्ट अप एरिया के 10 फीसदी क्षेत्र पर लगेगा यह शुल्क
500 वर्गमीटर से अधिक भूमि पर होने वाले किसी भी निर्माण पर लागू होगा प्रावधान
आठ से अधिक फ्लैट वाले अपार्टमेंट दायरे में
आश्रय निधि का यह प्रावधान विकसित की जाने वाली परियोजना की कुल भूमि का क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक होने पर या सभी फेजों को मिला कर विकसित किये जाने वाले भवन में अपार्टमेंट की संख्या आठ से अधिक होने पर लागू होगा.
इसके दायरे में बिहार राज्य आवास बोर्ड, स्थानीय निकाय, योजना प्राधिकारों एवं निजी डेवलपरों के सभी आवासीय, कॉमर्शियल व मिक्सड यूज निर्माण स्कीम एवं ग्रुप हाउसिंग व टाउनशिप प्रोजेक्ट आयेंगे.
4000 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली भूमि पर सभी आवासीय स्कीमों को आश्रय निधि की जगह 15 फीसदी भू-भाग पर कमजोर वर्ग के लिए इडब्लूएस व एलआईजी फ्लैट बनाना होगा. उनको इस नीति के तहत कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा.
डेवलपरों को एफएआर में प्रोत्साहन
संशोधित किफायती आवास नीति में डेवलपरों को प्रोत्साहित करने के लिए फर्श क्षेत्र अनुपात (एफएआर) में प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है. ऐसी परियोजनाओं में प्रोत्साहन के तौर पर स्टैंडर्ड एफएआर के अतिरिक्त 15 फीसदी की वृद्धि कर दी जायेगी. मसलन अगर मानक एफएआर 2.5 हो तो अधिकतम 2.875 एफएआर की अनुमति मिलेगी.
इसी तरह, मानक एफएआर 3.5 हो तो अनुमति 4.025 एफएआर की मिलेगी. हालांकि नक्शा स्वीकृत करने वाले सक्षम प्राधिकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बिल्डिंग बाइलॉज के अनुसार पर्याप्त खुला क्षेत्र, आवश्यक सेटबैक व अन्य नियमों का पालन किया गया है. साथ ही किसी भी स्थिति में भूमि आच्छादन 50 फीसदी से अधिक न हो.
इस अतिरिक्त एफएआर का प्रयोग सिर्फ किफायती आवास इकाइयों के निर्माण हेतु ही होगा.किफायती इकाइयों का निर्माण मुख्य ब्लॉक से अलग के रूप में किया जायेगा. यदि निजी डेवलपर किफायती आवास इकाइयों का निर्माण मुख्य परियोजना स्थल की सीमाओं के अंतर्गत करने की स्थिति में नहीं हो तो उसे मेट्रोपोलिटन एरिया में पांच किमी के अंदर जबकि अन्य निकायों में तीन किमी के दायरे में किफायती आवास निर्माण की अनुमति दी जायेगी.हालांकि इसके लिए निजी डेवलपर को मुख्य परियोजना के अनुमोदन के समय ही इसका प्रस्ताव देना होगा.
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