जिले में बाल श्रमिक पर नहीं लग रहा अंकुश

Updated at : 05 Dec 2015 7:49 PM (IST)
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जिले में बाल श्रमिक पर नहीं लग रहा अंकुश

जिले में बाल श्रमिक पर नहीं लग रहा अंकुश श्रम विभाग का धावा दस्ता द्वारा नहीं चलाया जा रहा अभियान नवादा कार्यालय. जिले में विगत छह महीनों से बाल श्रम पर अंकुश लगाने संबंधी कोई भी अभियान नहीं चलाया जा रहा है. इसके कारण जिले में बाल श्रमिकों पर अंकुश नहीं लग रहा है. साथ […]

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जिले में बाल श्रमिक पर नहीं लग रहा अंकुश श्रम विभाग का धावा दस्ता द्वारा नहीं चलाया जा रहा अभियान नवादा कार्यालय. जिले में विगत छह महीनों से बाल श्रम पर अंकुश लगाने संबंधी कोई भी अभियान नहीं चलाया जा रहा है. इसके कारण जिले में बाल श्रमिकों पर अंकुश नहीं लग रहा है. साथ ही विभिन्न खतरनाक फैकटरियों, गैराजों व ईंट भट्ठों पर बाल श्रमिकों से काम कराया जा रहा है. होटलों के साथ-साथ दर्जी दुकानों में भी बङे पैमाने पर बच्चों से कार्य कराया जा रहा है. पढ़ने-लिखने के उम्र में छोटे-छोटे बच्चों को हथौड़ा, रिंच, छेनी जैसे हथियार थमा दिये जा रहे हैं. सरकार की ओर से जिले में चलाये जा रहे 88 श्रमिक विद्यालयों को भी बंद कर दिये जाने के कारण बाल श्रमिक विद्यालयों में पढ़ने नहीं पहुंच रहे है. पढ़ लिख कर अच्छे जिंदगी बनाने के बजाय ऐसे बच्चे कारखानों में अपनी बचपन गुजार रहे हैं. बाल श्रम रोकने को लेकर श्रम विभाग की ओर से जिले भर में पिछले छह महीनों के दौरान कोई भी कारगर पहल नहीं किया गया है. गौरतलब है कि 13 साल पहले वर्ष 2002 में तत्कालीन डीएम डॉ एन विजय लक्ष्मी के प्रयास से हिसुआ प्रखंड को पूर्णत: बाल श्रम मुक्त प्रखंड बनाया गया था. जिसकी घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा हिसुआ में की गयी थी. घोषणा के साल दो साल बाद ही फिर से जिले में बाल श्रमिकों की लंबी फौज खड़ी हो गयी. श्रम विभाग के एलइओ द्वारा लगातार धावादल का गठन कर बाल श्रम उन्मूलन कार्यक्रम के तहत छापेमारी कर कारखानें में काम करने वाले बच्चों को मुक्त कराया गया था. परंतु, विभाग द्वारा इस दिशा में इन दिनों कोई कारगर पहल नहीं किये जाने के कारण फिर से जिले में बाल श्रमिकों की संख्या काफी बढ़ गयी है. बच्चों से कार्य कराया जा रहा है. प्रशासन की ओर से भी इसके रोकथाम की दिशा में कोई पहल नहीं किया जा रहा है.बोले अधिकारीजिले से बाल श्रमिक के मुक्ति के लिए प्रशासन के निर्देश पर अभियान चलाया जायेगा. श्रम विभाग के अधिकारियों को भी धावा दल का गठन कर बाल श्रमिकों को गैराजों, ईंट भट्ठों, होटलों आदि खतरनाक स्थलों से मुक्त कराने का आदेश दिया जा रहा है. राजेश कुमार, सदर एसडीओ

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