उगऽ हो सूरज देव,भइलो अरग के बेर...

Updated at : 15 Nov 2015 8:32 AM (IST)
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उगऽ हो सूरज देव,भइलो अरग के बेर...

पारिवारिक सुख-समृद्धि व मनोवांछित फल प्राप्ति का है यह पर्व सदियों पुरानी है छठ व्रत करने की परंपरा बिहारशरीफ. हिंदी भाषा क्षेत्रों का छठ व्रत एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह त्योहार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश व नेपाल सहित अन्य प्रदेशों में भी बहुत ही उल्लास और पवित्रता के साथ मनाया जाता है. पारिवारिक सुख-समृद्धि व […]

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पारिवारिक सुख-समृद्धि व मनोवांछित फल प्राप्ति का है यह पर्व
सदियों पुरानी है छठ व्रत करने की परंपरा
बिहारशरीफ. हिंदी भाषा क्षेत्रों का छठ व्रत एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह त्योहार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश व नेपाल सहित अन्य प्रदेशों में भी बहुत ही उल्लास और पवित्रता के साथ मनाया जाता है. पारिवारिक सुख-समृद्धि व मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है.
इसे स्त्री-पुरुष समान रूप से मनाते हैं. चार दिवसीय छह महापर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की रूप से मनाते हैं. चार दिवसीय छठ महापर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है. सूर्यपासना का यह अनुपम लोक पर्व है. इसे षष्ठी व्रत भी कहा जाता है. छठ व्रत करने की परंपरा सदियों पुरानी है. छठ महा पर्व एक कठिन तपस्या की तरह है.
छठ पर्व का अगाज नहाय-खाय से: चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है. पहले दिन छठ व्रती सेंधा नमक,घी से बना हुआ अरबा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप खाती है.
लोहंडा व खरना का विशेष महत्व:छह व्रत के दूसरे दिन को लोहंडा अथवा खरना कहा जाता है. खरना के दिन छठ व्रती महिलाएं दिन भर उपवास रखती है तथा रात में खीर बना कर उसका भोग लगाती हैं.
इसके बाद शुरू होता है 36 घंटे का उपवास:खरना के अगले दिन से छठ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है.
डूबते सूर्य को पहला अर्घ:छठ व्रत के तीसरे दिन छठ व्रत का प्रसाद बनाया जाता है. स्नान ध्यान कर महिलाएं शुद्ध वर्तन में मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी, केतारी के खोइयां से छठ का प्रसाद बनाती है. संध्या में छठ व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पण करती हैं. छठी मइया की गीत गाती महिलाओं के साथ छठ व्रती नदी व तालाब पर जाती है.नदी व तालाब में स्नान ध्यान कर छठ व्रती डूबते सूर्य को अर्घ अर्पण करती हैं.
उदीयमान सूर्य को अर्घ के साथ छठ का समापन:पारण के छठ का समापन होता है. व्रत करने वाले स्त्री पुरुष नदी, तालाब अथवा छठ घाटों पर छठ मइया के गीत गाती हुई पहुंचती है. छठ गीतों में ” कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति जाय, केलवा फरेला घवद से, ओह परसुगा मेड़राय, उगु न सूरज देव, मइलो अरग के बेर, आदि छठ व्रत के मधुर गीत से वातावरण भक्तिमय हो जाता है. नदी, तालाबों में स्नान ध्यान कर महिलाएं उदयीमान सूर्य को अर्घ्य प्रदान करती है. अर्घ देने में कच्चा दूध व पानी का उपयोग किया जाता है.
छठ व्रत में पवित्रता का ख्याल जरूरी: पंडित श्रीकांत शर्मा बताते हैं कि छठ महापर्व में पवित्रता व स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है. व्रत रखने वाले इस तपस्या के रूप में करते हैं. यह व्रत करने वालों के घरों में पूरे कार्तिक माह लहसून, प्याज का सेवन वर्जित माना जाता है.
पर्व के दौरान व्रत रखने वालों को पग-पग पर पवित्रता का ख्याल रखना होता है. शेखपुरा. आस्था के महान पर्व छठ नहाय खाय के साथ रविवार से शुरू हो जायेगा. इस अवसर पर चार दिन तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्र छठ मइया के गीतों से गुंजायमान रहेंगे.
नहाय-खाय के अवसर पर छठ व्रती स्नान आदि से निवृत्त होकर अरवा चावल का प्रसाद तैयार करते हैं. इसके साथ चना के दाल और कद्दू की सब्जी तैयार करने का भी विधान है. छठ व्रत के दौरान कद्दू को लेकर ही लोगों को सबसे ज्यादा चिंता करती है. कद्दू की बिक्री शनिवार को बाजारों में जम कर की गयी. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इसे लोग मुफ्त में वितरण करते पाये गये. छठ के अनुष्ठान को लेकर व्रतियों ने पूरी पवित्रता के साथ मिट्टी के चूल्हे का भी निर्माण किया है.
दिन भर पवित्रता के साथ एकाग्रचित होकर साफ-सुथरे स्थान पर मिट्टी का चूल्हा तैयार किया गया. इसे मिट्टी के चूल्हे पर ही छठ के दौरान विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार किये जाते हैं. साथ ही इस कवायद में ईंधन के रूप में भी पवित्र आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है. छठ अनुष्ठान के दूसरे दिन व्रती दिन भर निर्जला उपवास कर शाम में चावल, दूध तथा गुड़ मिश्रित प्रसाद गहण कर लोहंडा का अनुष्ठान पूरा करते हैं.
उसके बाद छठव्रतियों का अखंड निर्जला 36 घंटे का उपवास शुरू होता है. जिसमें प्रथम दिन डूबते सूर्य और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ प्रदान कर व्रती छठ का पारण करते हैं. छठ को लेकर इस बार पानी की कमी के कारण लोगों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.
नगरनौसा से तीन फरार आरोपित गिरफ्तार
नगरनौसा . शुक्रवार के दिन थाना अध्यक्ष डीएन पासवान के नेतृत्व में की गयी छापेमारी के दौरान नगरनौसा स्थित कंचन भवन निवासी सुरेन्द्र जमादार, अवध जमादार, उमेश जमादार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. थानाध्यक्ष ने बताया कि इन तीनों पर 2010 में कोर्ट कंपलेन का आरोपित था. तभी से अब तक फरार चल रहे थे. छापेमारी के दौरान पु.अ.नी सनतावन दास सहित शस्त्र बल मौजूद थे.
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