सड़क दुर्घटना में छह साल की बच्ची की मौत, परिजन बेहाल

Updated at : 28 Apr 2018 6:41 AM (IST)
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सड़क दुर्घटना में छह साल की बच्ची की मौत, परिजन बेहाल

10 वर्षीय अंशु कुमारी की हालत नाजुक पकरीबरावां : शुक्रवार को थाना क्षेत्र के मेघीपुर गांव के निकट सड़क दुर्घटना में छह वर्षीय करीना कुमारी की मौत हो गयी जबकि 10 वर्षीय अंशु कुमारी बुरी तरह से जख्मी हो गयी. जानकारी के मुताबिक करीना और अंशु पास के ही राम स्वरूप यादव की पुत्री की […]

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10 वर्षीय अंशु कुमारी की हालत नाजुक

पकरीबरावां : शुक्रवार को थाना क्षेत्र के मेघीपुर गांव के निकट सड़क दुर्घटना में छह वर्षीय करीना कुमारी की मौत हो गयी जबकि 10 वर्षीय अंशु कुमारी बुरी तरह से जख्मी हो गयी. जानकारी के मुताबिक करीना और अंशु पास के ही राम स्वरूप यादव की पुत्री की शादी समापन के बाद गांव के पास के मंदिर में दूल्हा-दुल्हन के साथ पूजा का रस्म अदा करने गयी थीं.
इस बीच नवादा की ओर से तेज गति से आ रही एक कार की चपेट में आ गयी. इससे दोनों बच्चियां घायल हो गयीं. घायलों को ग्रामीण नवादा ले गये. नवादा में करीना को चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया जबकि अंशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे पटना रेफर कर दिया गया. बाद में घटना से आक्रोशित लोगों ने नवादा जमुई पथ को अवरुद्ध कर विरोध जताया. घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष संजय कुमार घटनास्थल पर पहुंच कर जाम लगाने से मना किया व हर संभव परिवार को मदद दिये जाने की अपील की. इसके बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी रवि जी के निर्देश पर थानाध्यक्ष संजय कुमार द्वारा मृतका की मां को पारिवारिक लाभ के तहत 20 हजार का चेक व पंचायत के मुखिया द्वारा कबीर अंत्येष्टि के तहत 15 सौ रुपये नकद प्रदान किये गये.
गर्मी ने कुएं की दिलायी याद दफन हो रहे पनघट के गीत
वारिसलीगंज. गर्मी का एहसास होने के साथ ही लोगों को कुएं की याद ताजी होने लगी है जो कल तक राहगीरों को व आमलोगों का प्यास बुझाता था, आज वह खुद प्यासा मर रहा है. संभव है कि आनेवाले पीढ़ी को शायद कुएं देखने को भी नहीं मिले. कुआं के बारे में अगर जानकारी हो भी तो किताब के माध्यम से. आजकल लोग कुआं को कुड़ेदान बना डाला है जो कुआं हमारी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति को द्योतक था. कुआं से पेयजल के साथ ही सिंचाई का कार्य भी होता था. रेहर की संगीत सी ध्वनि हो या पनीहारिनों की पानी भरते के गीत,औरतों की भीड़ चुहलबाजी सब कुछ कुएं के साथ दफन होते जा रहे हैं.
जानकारों के अनुसार कुओं को संरक्षित कर भू-गर्भीय जलस्तर को गिरने से बचाया जा सकता है. चिकित्सकों की मानें तो कुआं का पानी सेवन करने वाले लोगों को पेट संबंधित बिमारियां कम होती है. क्योंकि इसमें आर्सेनिक व अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा कम होती है. सिंधु घाटी के सभ्यता में भी कुओं का अवशेष प्राप्त हुआ है. मौर्य काल में भी इस तरह के कुओं का प्रचलन था. गांवों में कुआं को इंद्रासन भी माना जाता था.
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