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Navratri 2022: भक्ति व साधना का अनूठा केंद्र है भष्मी देवी मंदिर, जानें नवरात्रि की क्या है विशेष मान्यता

Updated at : 26 Sep 2022 6:11 PM (IST)
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Navratri 2022: भक्ति व साधना का अनूठा केंद्र है भष्मी देवी मंदिर, जानें नवरात्रि की क्या है विशेष मान्यता

Navratri 2022: मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के पानापुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी की उपधारा के किनारे माता भष्मी देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र धूमधाम से मनेगा प्राकृतिक आवोहवा के बीच स्थित यह मंदिर भक्ति व साधना का अनूठा केंद्र स्थल बन गया है. 26 अक्तूबर को कलश स्थापन के साथ ही नवरात्र पूजन शुरू हो जायेगा

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Navratri 2022: मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के पानापुर स्थित बूढ़ी गंडक नदी की उपधारा के किनारे माता भष्मी देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र धूमधाम से मनेगा. प्राकृतिक आवोहवा के बीच स्थित यह मंदिर भक्ति व साधना का अनूठा केंद्र स्थल बन गया है. 26 अक्तूबर को कलश स्थापन के साथ ही नवरात्र पूजन शुरू हो जायेगा़ इस बार 51 मुख्य यजमान पूजा में शामिल होंगे. वहीं सैकड़ों लोग हर वर्ष मंदिर प्रांगण में दुर्गा पाठ में लीन रहते हैं. मंदिर की महत्ता के कारण बिहार के कोने-कोने से श्रद्धालु आते है़ं प्रधान पुजारी पंडित रविशंकर दुबे कहते हैं कि यहां पड़ोसी देश से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं. भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रांगण की सारी व्यवस्था प्रशासन की देखरेख में होगी. अभी सफाई के साथ ही मंदिर के रंगरोगन का कार्य चल रहा है. साथ ही प्रवेश द्वार पर तोरण द्वार के अलावा मंदिर तक पंडाल निर्माण के लिए बांस-बल्ले गाड़े जा रहे हैं.

मंदिर में होता है कन्या पूजन

भष्मी देवी धाम में प्रतिपदा तिथि से ही भक्तों का भीड़ जुटने लगती है. लेकिन पंचमी के बाद भीड़ इतनी अधिक बढ़ जाती है कि पुलिस-प्रशासन का सहयोग लेना पड़ता है. अष्टमी तिथि को महाआरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं की आरती की थाल से मंदिर परिसर जगमगा उठता है. श्रद्धालु घर के बदले मंदिर परिसर में आकर विधिवत कन्या पूजन कर कन्या भोजन कराते हैं. नवमी तिथि को हवन को लेकर विशेष आयोजन किया जाता है.

मेले में सजती है 250 दुकानें

पूजा के दौरान लगे मेले का टेंडर सरकार की तरफ से निकलती है. मेला में पूजन समाग्री से लेकर खिलौना समेत लगभग 250 की संख्या में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी रहती हैं. बिहार के विभिन्न जिलों से लगभग 100 की संख्या में फर्नीचर की दुकानें मेला परिसर में सजी रहती हैं. सभी जगहों के फर्नीचर का अनूठा संगम यहां देखने को मिलता है.

प्राचीन काल से है भष्मी देवी धाम: पुजारी

बूढ़ी गंडक की उप धारा के किनारे पांच पीपल के बीच माता भष्मी देवी का मंदिर है. प्रधान पुजारी पंडित रवि शंकर दुबे बताते हैं कि मंदिर कितनी प्राचीन है, इसका हमारे पूर्वजों को भी पता नहीं है. मंदिर के ईशान कोण में गंडक नदी की उप धारा से सटे बुढ़िया माता का मंदिर है. स्थानीय लोगों के अनुसार गंडक में बाढ़ जैसी विकराल आपदा आने के बाद भी मंदिर परिसर में बाढ़ का पानी नहीं पहुंच पाया है.

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं हो पाया भष्मी देवी धाम

भष्मी देवी धाम में पूजा-अर्चना करने श्रद्धालु बिहार से ही नहीं पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश से भी आते हैं. फिर भी मंदिर को अब तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है़ वर्षों पहले स्थानीय सांसद और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने माता का दर्शन कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रपोजल भी भेजा था. परंतु उनके मंत्री पद से हटने के बाद कार्य को ठंडा बस्ता में डाल दिया गया. बड़े-बड़े नेता व अधिकारी यहां माता का दर्शन करने आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं. लेकिन मंदिर के विकास के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है.

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