लक्षण मिलने पर तुरंत कराएं इलाज सभी पशु अस्पतालों में करायी गयी दवा उपलब्ध
Updated at : 27 May 2016 5:16 AM (IST)
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बिहारशरीफ : आमतौर पर पशुओं में होने वाली आषाढ़ी बीमारियों से बचाव व रोकथाम के लिए जिले के सभी पशु चिकित्सकों को जिला पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है. पशुपालकों से कहा गया है कि पशुओं में अगर आषाढ़ी बीमारियों के लक्षण प्रतीत होने के बाद तुरंत इलाज करायें. लक्षण पाये जाने पर […]
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बिहारशरीफ : आमतौर पर पशुओं में होने वाली आषाढ़ी बीमारियों से बचाव व रोकथाम के लिए जिले के सभी पशु चिकित्सकों को जिला पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है. पशुपालकों से कहा गया है कि पशुओं में अगर आषाढ़ी बीमारियों के लक्षण प्रतीत होने के बाद तुरंत इलाज करायें. लक्षण पाये जाने पर हरगिज पशुपालक लापरवाही नहीं बरतें. ताकि दूसरे पशु बीमारी से संक्रमित नहीं हो पाये. आषाढ़ी बीमारियों से निपटने की मुकम्मल व्यवस्था जिला पशुपालन विभाग ने कर रखी है.
बरसात में होती है गलाघोंटू व लंगड़ी बीमारियां
बरसात के दिनों में आमतौर पर पशुओं में संक्रमित गलाघोंटू व लंगड़ी की बीमारियां होती हैं. इन बीमारियों से पशुओं को सुरक्षित करना पशुपालकों को बहुत ही जरूरी है. बरसात के दिनों में पशुपालकों को पशुओं को उक्त बीमारियों से बचाव के लिए बराबर सजग रहना होगा. अगर पशुपालक जरा सी लापरवाही बरती तो समस्या विकराल हो सकती है.
पशुपालन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अगर एक पशु उक्त बीमारियों की चपेट में आ जाती है तो गोशाले में रहने वाले दूसरे पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखना चाहिए. ताकि स्वस्थ पशु इससे संक्रमित नहीं हो सके.
गलाघोंटू बीमारी में गले में सूजन होता
बरसात के दिनों में पशुओं में होने वाली बीमारियों में गलाघोंटू रोग में पशुओं के गले में सूजन हो जाता है. लिहाजा पशुओं को खाने-पीने में परेशानी होती है. इसी तरह लंगड़ी बीमारी में पशुओं के पैर में सूजन तथा मसल में भी सूजन हो जाते हैं. अगर कोई पशु में उक्त बीमारियों के लक्षण पशुपालक पायें तो तुरंत निकट के पशु अस्पतालों में बीमार पशुओं को इलाज के लिए ले जाएं. पशु चिकित्सकों के सलाह के मुताबिक बीमार पशुओं को दवा खिलायें. बरसात के दिनों में पशुपालक अपनी गोशाले को पूरी तरह से साफ रखें. पशुओं को स्वच्छ पानी पिलायें. पौष्टिक आहार दें. ताकि पशु पूरी तरह से स्वस्थ रह सके.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिले के सभी पशु अस्पतालों में पशुओं के इलाज के लिए पर्याप्त रूप से जीवनरक्षक दवाइयां उपलब्ध करा दी गयी हैं. पशुओं में आषाढ़ी बीमारियों के लक्षण दिखने पर पशुपालक तुरंत बीमार पशुओं को अस्पताल में ले जाकर इलाज करायें. इसमें हरगिज लापरवाही नहीं बरतें.
डाॅ कामदेव प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारी,नालंदा
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