जेल में शादी तय की, बेटे की नौकरी लगी तो शादी से इनकार

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुजफ्फरपुर: पुरानी कहावत है, जेल व अस्पताल की दोस्ती टूटते नहीं टूटती. पर, बात जब पैसों की हो, तो अच्छे-अच्छे की नियत डोल जाती है. एक ऐसा ही मामला डीएम धर्मेंद्र सिंह तक पहुंचा है. यहां दो अधेड़ कैदियों की जेल में पहली मुलाकात हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गयी. बात रिश्तेदारी तक पहुंची. दोनों ने अपने बेटे-बेटी की शादी तय कर ली. लड़की दिखायी की रस्म भी जेल गेट पर हुई. पर, मामला दहेज पर अटक गया. अब लड़की के पिता ने जेल अधीक्षक के माध्यम से डीएम को पत्र भेज कर न्याय की गुहार लगायी है.
पारू थाना क्षेत्र के जगदीशपुर निवासी जवाहर राय वर्ष 2011 में दर्ज एक मामले में बीते छह सालों से शहीद खुदीराम बोस जेल में बंद हैं. कुछ दिनों पूर्व मोतीपुर थाने में दर्ज एक मामले में मैसन्दी मठिया निवासी बउआलाल यादव को भी पकड़ कर जेल लाया गया. वहां दोनों की मुलाकात हुई. जेल में दोनों साथ-साथ रहते थे. जवाहर राय के अनुसार, जेल में ही बउआलाल यादव ने अपने पुत्र रोशन की शादी उनकी पुत्री से रूपन कुमारी से तय की. जेल गेट पर ही लड़की दिखायी की रस्म भी हुई. 3.51 लाख रुपये व फूल का बर्तन देने की बात तय हुई. जवाहर राय के पुत्र व भाई ने बउआलाल के घर जाकर तिलक की रस्म पूरी की. इस साल 30 सितंबर को शादी होनी तय हुई. शादी टूटने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. लड़की के परिजन परेशान हैं. इधर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जायेगी. अगर मामला सत्य पाया जाता है तो दोषी पर कार्रवाई होगी.
रस्म भी हो गयी थी, अब दहेज के लिए बदली नियत
जवाहर राय का दावा है कि जेल में रहते हुए उसने पारिश्रमिक के तौर पर मिले 30 हजार 500 रुपये भी अन्य कैदियों की मौजूदगी में बउआलाल को दिया. बाद में उनकी पत्नी ने जमीन बेच कर जेल गेट पर ही बउआलाल के दूसरे बेटे भविक्षण यादव के हाथ में तीन लाख आठ हजार 500 रुपये दिये. खुद बउआलाल ने भी इसे स्वीकारा. कुछ दिनों बाद बउआलाल जेल से बाहर आ गया. तब तक रोशन की नौकरी लग चुकी थी. अब उससे एक चारपहिया वाहन, एक कलर टीवी व सोने की चेन की डिमांड की जा रही है. जबकि वह इतनी रकम देने में असमर्थ हैं.
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