आस्था व अकीदत का केंद्र है खानकाह रहमानी

Updated at :27 Nov 2016 3:52 AM
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आस्था व अकीदत का केंद्र है खानकाह रहमानी

मुंगेर : बिहार सहित देश के अन्य राज्यों से पहुंचे इस्लाम धर्मावलंबी के लिए खानकाह रहमानी आस्था व अकीदत का एक बड़ा केंद्र है़ यहां आकर लोगों को जहां खुदा व उनके बंदे के साथ व्यवहार करने की शिक्षा मिलती है़ वहीं दस्तारबंदी व दुआ के पाक मौके पर शामिल होने का भी सौभाग्य मिलता […]

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मुंगेर : बिहार सहित देश के अन्य राज्यों से पहुंचे इस्लाम धर्मावलंबी के लिए खानकाह रहमानी आस्था व अकीदत का एक बड़ा केंद्र है़ यहां आकर लोगों को जहां खुदा व उनके बंदे के साथ व्यवहार करने की शिक्षा मिलती है़ वहीं दस्तारबंदी व दुआ के पाक मौके पर शामिल होने का भी सौभाग्य मिलता है़ लोगों का मानना है कि यहां आकर लोगों को जन्नत की अनुभूति मिलती है़ इस आयोजन में शामिल कुछ लोगों ने अपनी- अपनी बातें रखी़

इमारते सरिया फुलवारी सरीफ पटना के नाजिम मो. अनिसुर रहमान ने बताया कि खानकाह रहमानी आस्था व अकीदत का केंद्र है़ लोग यहां इस्लाह के लिए आते हैं. यहां पर लोगों को जीवन जीने की कला सीखने का मौका मिलता है़

दुआ के लिए आते हैं हर साल :
झारखंड राज्य से आये मो. जाफर सादिक ने कहा कि वे हर साल यहां दुआ के लिए आते हैं. यहां के दुआ में बड़ी ताकत है़ वहीं यहां के दस्तारबंदी में शामिल होना बुहत अच्छा लगता है़
बेहतर जीवन जीने का मिलता है सीख : पाकुड़ जिला से आये हाफिज तनवीरुल हक रहमानी ने बताया कि यहां जीवन जीने की बेहतर सीख मिलती है़ यहां की दुआ में शामिल होना बड़े ही सौभाग्य की बात है़ उन्होंने यहीं पर तामिल भी हासिल की है़
जन्नत की मिलती है अनुभूति :
सुपौल जिला से आये मो. मोइनुद्दीन रहमानी ने कहा कि खानकाह रहमानी आने के बाद उन्हें जन्नत की अनुभूति मिलती है़ वे एक भी साल सालाना इजलास व फाजिया में आने से नहीं चूकते हैं.
यहां आने से मिट जाता है सारा संसय : पश्चिम बंगाल से आये डॉ मो. कबीरुद्दीन ने बताया कि यहां आने से मन में उपजे हर प्रकार के संसय मिट जाते हैं. खुदा व उनके बंदों के साथ व्यवहार करने की सीख मिलती है़ इस सीख से जीवन सुखमय हो जाता है़
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