फर्श पर गंदगी, बेड पर चादर नहीं, नालियां जाम

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मुंगेर: कमिश्नर साहब ! सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था दूर नहीं हो पायी. विभिन्न वार्डो में गंदगी की स्थिति व चादर विहीन मरीजों के बेड आज भी सदर अस्पताल की बदहाली बयां कर रही है. अस्पताल में यत्र-तत्र फेंके हुए मेडिकल कचरे आज भी आम जनों के लिए नासूर बने हुए हैं. यहां दवाओं की […]

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मुंगेर: कमिश्नर साहब ! सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था दूर नहीं हो पायी. विभिन्न वार्डो में गंदगी की स्थिति व चादर विहीन मरीजों के बेड आज भी सदर अस्पताल की बदहाली बयां कर रही है. अस्पताल में यत्र-तत्र फेंके हुए मेडिकल कचरे आज भी आम जनों के लिए नासूर बने हुए हैं. यहां दवाओं की कमी अब भी बनी हुई है. ज्ञात हो कि 20 मई को प्रमंडलीय आयुक्त लियान कुंगा ने सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था.

उन्होंने अस्पताल में एक भी मरीज के बेड पर चार बिछा हुआ नहीं पाया और वार्डो में फैल रहे दरुगध पर नाराजगी व्यक्त की थी. वहीं चारों ओर गंदगी को देख वे काफी नाखुश थे. उन्होंने सिविल सजर्न को फटकार लगाते हुए चार दिन में सारी व्यवस्था को ठीक करने का आदेश दिया था. प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा किये गये औचक निरीक्षण के छह दिन गुजर गये लेकिन सदर अस्पताल की व्यवस्था नहीं सुधरी.

जाम पड़े हैं नाले

अस्पताल परिसर में जितने भी नाले हैं, वे सभी महीनों से जाम पड़े हुए हैं. नाला जाम रहने के कारण कचरे के सड़न से काफी दरुगध फैल रही है. वहीं नाले में जमे हुए पानी के कारण अस्पताल परिसर में मच्छरों का प्रकोप भी फैल गया है. सूत्रों की मानें तो नाले को जाम करने में मेडिकल स्टॉफों का भी अहम योगदान है. जो मरीजों को सूई देने के बाद व स्लाईनिंग की बोतलें यत्र- तत्र फेंक देते हैं. जिनमें अधिकांश मेडिकल कचरे नाले में चले जाते हैं जो धीरे-धीरे नाले को जाम कर देता है.

नहीं होती सफाई

सामान्य तौर पर सभी चिकित्सक मरीजों को साफ-सुथरे स्थान पर रहने की सलाह देते हैं. जिससे मरीज को किसी तरह का संक्रमण न हो और तबीयत में जल्द से जल्द सुधार हो. किंतु सदर अस्पताल में तो सफाई कोई मायने ही नहीं रखता. वार्डो में पोछा लगाना तो दूर की बात ठीक से झाड़ू भी नहीं लगाया जाता. नतीजतन सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से लेकर महिला, पुरुष व प्रसव वार्ड में गंदगी अपना पांव पसारे हुए है.

बेड पर नहीं मिल रहा चादर

कहने को तो सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है. जहां दर्जनों चिकित्सक व मेडिकल स्टाफों की लाइन लगी हुई है. यहां चिकित्सकों व मेडिकल स्टाफों पर तो विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. किंतु मरीजों के बेड पर बिछाने के लिए पिछले छह माह से एक चादर तक उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. हाल यह है कि जैसे ही एक मरीज बेड छोड़ते हैं, वैसे ही उसी बेड पर दूसरे मरीज को भरती कर दिया जाता है. जिससे मरीजों में संक्रमण की संभावनाएं बढ़ जाती है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलायी गयी सतरंगी चादर योजना आज सदर अस्पताल में पूरी तरह फ्लॉप साबित हो गया है.

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