तीसरे मरीज को किया जाता है रेफर

Updated at :26 Apr 2017 3:56 AM
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तीसरे मरीज को किया जाता है रेफर

समस्या. सदर अस्पताल में मात्र दो मरीज को ऑक्सीजन लगाने का है इंतजाम मधुबनी : सदर अस्पताल की व्यवस्था चरमरायी हुई है. कभी दवा की किल्लत तो कभी एंबुलेंस या डॉक्टर की कमी. पेयजल, शौचालय साफ सफाई की समस्या तो सालों से रही है जो सुधरने का नाम नहीं ले रहा. पर इन दिनों कई […]

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समस्या. सदर अस्पताल में मात्र दो मरीज को ऑक्सीजन लगाने का है इंतजाम

मधुबनी : सदर अस्पताल की व्यवस्था चरमरायी हुई है. कभी दवा की किल्लत तो कभी एंबुलेंस या डॉक्टर की कमी. पेयजल, शौचालय साफ सफाई की समस्या तो सालों से रही है जो सुधरने का नाम नहीं ले रहा. पर इन दिनों कई ऐसी कमी अस्पताल में सामने आ रही है जो मरीजों व उनके अभिभावकों को बेचैन कर देता है. हमने बीते दो रात सदर अस्पताल का जायजा लिया. जहां पर कई मामले सामने आये. इसमें रविवार की रात करीब 10 बजे एवं सोमवार की रात करीब 12 बजे में अस्पताल की पड़ताल की. जो इस प्रकार है.
दो मरीज से अधिक के लिए नहीं है इंतजाम . रविवार की रात करीब 10 बज रहे थे. हम सदर अस्पताल पहुंचे. इमरजेंसी में डा. एसएन झा थे. महिला वार्ड में एक मरीज भौआरा गोवा पोखर मुहल्ला की बदरू निशा. दिल की मरीज. इनको ऑक्सीजन लगा हुआ था. परिजन भी पास ही थे. इसी वार्ड में एक और मरीज थी गुलेखा खातून. ये भी दिल की ही मरीज थी. इन्हें भी ऑक्सीजन लगा था.
इसी दौरान महादेव मंदिर पोखरा मुहल्ला की एक महिला मरीज आयी. तेज सांसें चल रही थी. सही से सांस भी नहीं ले पा रही थी. पहले दिल्ली से दिखा चुकी है. कभी कभी इस प्रकार का दौरा आ जाता है. शांति देवी नामक यह मरीज बेचैन थी. इन्हें ऑक्सीजन लगाना जरूरी था.समस्या यहीं से शुरू हुई. जब परिजन ने कहा कि ऑक्सीजन लगा दिया जाय तो अस्पताल कर्मी ने हाथ खड़ा कर दिया. कहा दो मरीज से अधिक को ऑक्सीजन लगाने का इंतजाम नहीं है. चिकित्सक ने तत्काल ही उन्हें रेफर कर दिया. पर रात का समय होने के कारण मरीज को अन्य जगह ले जाने में परिजनाें ने परेशानी जतायी. पहले से एक मरीज को लगाये गये ऑक्सीजन पाइप को हटा दिया गया और शांति देवी को वह पाइप लगाया गया.
खुद पकड़ते हैं ऑक्सीजन पाइप . शांति देवी को ऑक्सीजन का पाइप लगा दिया गया और उसे खुद शांति देवी को ही पकड़ा दिया गया. यह हाल हर मरीज के साथ होता है. दरअसल अस्पताल में ऑक्सीजन का सिलिंडर तो है पर मास्क नहीं है. पाइप भी महज दो ही है. जिसे एक साथ मात्र दो मरीज को ही लगाया जा सकता है. तीसरे मरीज के आने पर उन्हें तत्काल कहीं रेफर कर दिया जाता है
या फिर पहले के किसी मरीज का पाइप निकाल कर लगा दिया जाता है.
इमरजेंसी गेट के सामने आवारा पशुओं का जमावड़ा
सोमवार की रात करीब 12 बज रहे थे. हम एक बार फिर इमरजेंसी वार्ड पहुंचे. पर जैसे ही अस्पताल परिसर पहुंचे, हमें यह धोखा हो गया कि रात के समय कहीं हम मवेशी के अस्पताल तो नहीं पहुंच गये. रात में करीब दो दर्जन से अधिक आवारा पशु इमरजेंसी वार्ड के सामने, बरामदे पर और पूरे परिसर में बैठे, खड़े और घूम रहे थे.
हम यहां से डॉक्टर कक्ष की ओर बढे. डाक्टर अपनी कुर्सी से नदारद, तीन कर्मी मौजूद थे. इसमें एक कर्मी एक कुर्सी पर बैठा और दूसरे कुर्सी पर पांव फैलाये आराम कर रहा था. इसी दौरान एक बूढी महिला को लिये सतलखा निवासी रवींद्र झा आये. उनकी मां को खड़ा होने मे परेशानी हो रही थी . पूर्व में ही पांव व कमर की हड्डी टूटी हुइ है. कुर्सी मांगते रहे पर कर्मी ने ना तो पांव हटाया और ना ही कुर्सी दी.
ऑक्सीजन पाईप की कमी है. जल्द ही इसे दूर किया जायेगा. वहीं रात को आवारा पशुओं के जमा होने की जानकारी मिली है. इसके निदान की भी पहल की जायेगी. वहीं लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जायेगा.
डाॅ अमरनाथ झा, सीएस
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