एक मिनट में होती है मरीज की जांच
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :09 Feb 2017 5:50 AM
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सदर अस्पताल. हर दिन औसतन आते हैं 800 मरीज मधुबनी : सदर अस्पताल का ओपीडी. दिन के करीब बारह बज रहे थे. हम जब ओपीडी में पहुंचे तो उस समय भी काउंटर पर पुर्जा कटाने के लिए करीब दो सौ लोग जमा थे. हर वार्ड में मरीजों के आने जाने का सिलसिला जारी था. एक […]
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सदर अस्पताल. हर दिन औसतन आते हैं 800 मरीज
मधुबनी : सदर अस्पताल का ओपीडी. दिन के करीब बारह बज रहे थे. हम जब ओपीडी में पहुंचे तो उस समय भी काउंटर पर पुर्जा कटाने के लिए करीब दो सौ लोग जमा थे. हर वार्ड में मरीजों के आने जाने का सिलसिला जारी था. एक मरीज जाता और महज एक से डेढ़ मिनट में निकल जाता. उसके हाथ में पुर्जा जरूर होता. इसी में से किसी किसी के हाथ में एक्स -रे की रिपोर्ट तो किसी के हाथ में अन्य जांच रिपोर्ट. मरीजों की भीड़ अधिक होने के कारण शोर गुल भी अधिक थी. हमने एक मरीज से पूछा कि क्या बीमारी थी तो कहा कि दम फूल रहा है. डॉक्टर साहब ने कहा कि बोलते रहो क्या क्या होता है,
इसी दौरान आला लगाया और पुर्जा लिख कर दे दिया है. यह किसी एक मरीज की कहानी नहीं थी. प्राय: हर मरीज इसी प्रकार जाते और पल भर में ही बाहर निकल जाते. दरअसल जिस प्रकार से ओपीडी में मरीज आते हैं और चिकित्सकों का टोटा बना है उससे एक मरीज के इलाज में मात्र एक से डेढ़ मिनट का ही समय डॉक्टर दे पाते हैं.
एक मिनट का समय देते हैं डॉक्टर
जिले के हर क्षेत्र से हर दिन औसतन करीब आठ सौ मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने आते हैं. पर इन मरीजों को इलाज के नाम पर महज पूर्जी ही मिल पाती है. ओपीडी की समय और मरीजों की संख्या पर गौर करें तो एक मरीज के बीमारी को सुनने, विभिन्न प्रकार के चेकअप करने और फिर पुर्जा लिखने में संबंधित डॉक्टरों द्वारा महज एक से डेढ़ मिनट का समय ही दिया जाता है. इसमें भी जब कभी मरीजों की संख्या बढ़ गयी या कोई वार्ड बंद रहा तो निर्धारित समय और कम हो जाता है.
आठ ओपीडी कार्यरत . सदर अस्पताल में विभिन्न रोगों से संबंधित आठ ओपीडी कार्यरत है. जिसमें मेडिसीन, आर्थो, गायनिक, दंत, शिशु चर्म रोग, यक्ष्मा व इएनटी ओपीडी शामिल है. इसमे से सदर अस्पताल के मेडिसीन ओपीडी में प्रतिदिन 180 से 200 मरीज चिकित्सक द्वारा देखा जाता है. इसके अलावा इएनसी में 80-85, आर्थों में 100-125, गायनों में 125-150, दंत में 30-45, चर्म में 50-70, शिशु में 85 से 115 व यक्ष्मा 20- 25 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में उपचार कराने आते है.
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