पुलिस जवानों व लोगों के बीच आक्रोश
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मछली मारने को ले हुआ विवाद या कुछ और है कारण, दोनों ओर से दिये गये बयानों में काफी अंतर विवाद को शांत करने में दिनभर जुटे रहे अधिकारी मधुबनी : मछली मारने को लेकर पुलिस लाइन के जवानों व आम लोगों के बीच हुए विवाद ने दिनभर वरीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भाग […]
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मछली मारने को ले हुआ विवाद या कुछ और है कारण, दोनों ओर से दिये गये बयानों में काफी अंतर
विवाद को शांत करने में दिनभर जुटे रहे अधिकारी
मधुबनी : मछली मारने को लेकर पुलिस लाइन के जवानों व आम लोगों के बीच हुए विवाद ने दिनभर वरीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को भाग दौड़ कराती रही. अधिकारी जहां एक ओर आम लोगों के गुस्सा को किसी भी तरह शांत करने में जुटे थे. वहीं, विवाद को लेकर आक्रोशित पुलिस जवानों पर भी संयम का मरहम लगा रही थी.
इसी को लेकर एस पी अख्तर हुसैन, डीएसपी इंद्र प्रकाश, सदर एसडीओ शाहिद परवेज पुलिस केंद्र स्थित अस्पताल पहुंच कर सबसे पहले घायल पुलिस कर्मियों से मिले. उन्होंनें सबों से मुलाकात की और घटना को लेकर विस्तृत जानकारी ली. इस दौरान जवानों ने एसपी को बताया कि कुछ स्थानीय लोग जानबूझ कर लाइन के जवानों को परेशान करते हैं. ये लोग पुलिस लाइन में घुस कर कभी बल्ब खोल लेता है.
तो कभी नल खोल लेते हैं. इससे काफी परेशानी होती है और मना करने पर गाली गलौज करते हैं. शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ. मना किया गया तो मुहल्ले के लोग हुजूम बना कर आये और पथराव करने लगे. इसके बाद पुलिस कर्मियों ने इन लोगों को बलपूर्वक खदेड़ा. वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि आये दिन पुलिस लाइन के जवान स्थानीय लोगों व बच्चों के साथ र्दुव्यवहार करते हैं. जब इस पर एतराज जताया जाता है तो लोगों के साथ मारपीट की जाती है. वहीं सदर एसडीओ शाहिद परवेज लक्ष्मी सागर मोहल्ला पहुंचे. वहां स्थानीय लोगों को समझा बुझा कर शांत कराया.
इस दौरान उन्हें लोगों के आक्रोश का सामना भी करना पड़ा. लोगों का कहना था कि पुलिस आये दिन स्थानीय लोगों को बेवजह परेशान करती हैं. उन्होंने ग्रामीणों को उचित न्याय दिलाये जाने का आश्वासन देकर शांत कराया. इस दौरान एसपी सहित सभी पदाधिकारी करीब एक घंटे तक मौके पर रहे. हर अधिकारी लोगों को शांत करने में जुटे थे. मोहल्ले की महिलाएं व लोग काफी आक्रोशित थे. वहीं, पुलिस केंद्र में पुलिस जवानों के बीच भी उक्त मुहल्ले के लोगों के व्यवहार पर गुस्सा था.
सतर्क दिखी पुलिस व प्रशासन
यकीनन यह हादसा पुलिस की सीधे पब्लिक से थी. लाजमी है कि पुलिस व प्रशासन दोनों ही के कान खड़े थे और आंखें चौकस थी. दरअसल पुलिस-पब्लिक के बीच भिड़ंत का ही परिणाम 12 अक्तूबर 2012 को भीषण रूप में देखने को मिली थी. यही कारण था कि पुलिस व प्रशासन की हर गतिविधि यहां पर पब्लिक को शांत करने में लगी थी.
इसी को लेकर जब घायल स्थानीय लोगों को सदर अस्पताल इलाज के लिये लाया गया तो कुछ देर के बाद पूरा अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गयी थी. स्वयं सदर एसडीओ शाहिद परवेज, डीएसपी इंद्र प्रकाश पूरे दलबल के साथ अस्पताल में घंटों तक जमे रहे. यहीं से मोबाइल के जरिये पुलिस लाइन की स्थिति पर भी अपनी चौकसी जारी रखी.
दरअसल, पुलिस लाइन के पास देर तक आक्रोशित लोग सड़क पर जमे थे. ऐसे में प्रशासन किसी भी प्रकार के अनहोनी को मूर्त रूप नहीं लेने देना चाहती थी. दीगर यह है कि दिन भर पुलिस और प्रशासन घायल पुलिस कर्मियों व स्थानीय लोगों को समझाने में जुटी थी. क्योंकि दोनों ही ओर आक्रोश की आग सुलग रही थी.
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