चारों ओर थी मौत और हम भाग रहे थे
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मधुबनी/लौकहा : लौकहा निवासी जगदीश पासवान व राम अवतार पासवान काठमांडू में मौत को मात देकर जिंदा बचने में कामयाब रहे. यों कहिये मौत के मुंह से निकल कर किसी तरह अपने घर पहुंचे. इन दोनों को भरोसा ही नहीं हो रहा है कि ये दोनों जिंदा हैं. भूकंप के बाद मौत का वह खौफनाक […]
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मधुबनी/लौकहा : लौकहा निवासी जगदीश पासवान व राम अवतार पासवान काठमांडू में मौत को मात देकर जिंदा बचने में कामयाब रहे. यों कहिये मौत के मुंह से निकल कर किसी तरह अपने घर पहुंचे.
इन दोनों को भरोसा ही नहीं हो रहा है कि ये दोनों जिंदा हैं. भूकंप के बाद मौत का वह खौफनाक मंजर इनके दिलो दिमाग से नहीं निकल रहा है. सैकड़ों मौते चंद सेकेंड में इनके सामने गुजरी है. ये लोग तबाही के वक्त काठमांडू में एक फैक्टरी सीता पाइल, रामकोट में मजदूर का काम कर रहे थे. इनके सामने कई मकान धराशायी हो गये. इनके घर पहुंचने पर परिवार वालों ने राहत की सांस ली.
बिस्कुट-पानी से बचायी जिंदगी : राम अवतार पासवान रामकोट के सीता पाइल फैक्टरी में ही तबाही के वक्त काम कर रहा था. उसने बताया कि क्षण में सब कुछ डोलने लगा. मकानें धराशायी होने लगी. ध्वस्त मकानों के तले कई लोगों को दबते देखा. कुछ सूझ नहीं रहा था.
बस दिमाग में एक ही ख्याल आ रहा था कि मौत सामने है, बचना मुश्किल है. मौत से लड़ते हुए किसी तरह सुरक्षित स्थान पहुंचे. सारा दिन पानी व भोजन के बगैर मारे फिर रहे थे. कुछ समझ नहीं आ रहा था. डूबते नाव पर सवारी की तरह हालत थी. खौफनाक मंजर के साये में दोबारा तबाही की आशंका से दिल बेचैन हो रहा था. बिस्कुट खा और पानी पीकर जिंदगी बचायी. घर आकर खुद को जिंदा समझ रहा हूं, लेकिन खौफ के पीछा नहीं छोड़ा है.
बाबा रामदेव के शिविर में बजी जान : जगदीश पासवान ने बताया कि हमलोग फैक्टरी में काम कर रहे थे. अचानक तेज आवाज आयी. धुआं के साथ धरती कांपने लगी. अपने सामने मकानों को स्प्रिंग की तरह डोलते देखा.
देखते-देखते मकाने धराशायी होने लगे. इस खौफनाक मंजर को देख हम लोग किसी तरह भाग कर खाली जगह पहुंचे और अपनी जान बचायी. खाने पीने के लिए कुछ नहीं था. किसी तरह बाबा रामदेव के शिविर में पहुंचे. दो दिन तक बिस्कुट व पानी पीकर किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे. अब भी कलेजा डोल रहा है. बस पकड़ कर किसी तरह वहां से मंगलवार को लौकहा तक पहुंचे. भगवान का लाख लाख शुक्र है कि उसने मौत के मुंह से निकाल लिया.
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