मुन्नी को है मसीहा का इंतजार

Published at :12 Mar 2016 4:58 AM (IST)
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मुन्नी को है मसीहा का इंतजार

मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल परिसर में 14 वर्ष की एक बच्ची अस्पताल परिसर में विगत कई दिनों से इधर से उधर भटक रही है. लेकिन अस्पताल प्रशासन इस ओर से बेखबर है. मूक बधिर और दिव्यांग लड़की को लोग मुन्नी कह कर पुकारने लगे हैं. कहते हैं कि कोई एक मार्च को […]

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मधेपुरा : जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल परिसर में 14 वर्ष की एक बच्ची अस्पताल परिसर में विगत कई दिनों से इधर से उधर भटक रही है. लेकिन अस्पताल प्रशासन इस ओर से बेखबर है. मूक बधिर और दिव्यांग लड़की को लोग मुन्नी कह कर पुकारने लगे हैं. कहते हैं कि कोई एक मार्च को ही इसे सदर असपताल के गेट पर छोड़ गया था. उसकी स्थिति को देख कर लोग बस उस पर तरस खा कर छोड़ देते हैं. लड़की की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने बारे में कुछ भी बताने से असमर्थ है. वहीं उसके कपड़ों की स्थिति भी काफी बदतर है.

हाल यह है कि उसका उपरी भाग नग्न होने के कारण एक व्यक्ति ने उसे चादर ओढ़ा दिया. लड़की के पैर में जख्म है जिस पर पट‍टी बांध कर अस्पताल प्रशासन ने कर्तव्य से निजात पा ली है. लोगों ने बताया कि इस लड़की को उनके परिजन ही अस्पताल में छोड़ कर चले गए है. सदर अस्पताल में ईलाज कराने आये कभी किसी मरीज व उनके परिजनो को दया आ गई तो इसे खाने को कुछ मिल जाता है. इसका नाम नहीं जानने के कारण लोग इस लड़की को मुन्नी कह कर बुलाते हैं. लेकिन मुन्नी को अस्पताल में घूरती कुछ आंखों से भी बचाना जरूरी है.

स्वास्थ्य प्रशासन भी झाड़ रहा था पल्ला . इस लड़की के बारे में शुक्रवार को अपराह्न जब सदर अस्पताल के प्रबंधक संजीव कुमार सिन्हा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सदर थाना सहित जिला प्रशासन को पत्र के माध्यम से सूचना दे दी गयी थी. लेकिन लड़की को यहां से ले जाना उनकी जवाबदेही है. ज्ञापांक 76 दिनांक 09 मार्च को सदर थानाध्यक्ष को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि इस लड़की को कोई एक मार्च को ही यहां छोड़ गया था. 02 मार्च को उन्होंने इस लड़की को अल्पावास गृह भेजा था लेकिन वहां इसे लेने से मना कर दिया गया.
पांच मार्च को लड़की के पिता भी आये थे . अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि पांच मार्च को मुन्नी के पिता अस्पताल अपनी बच्ची से मिलने आये थे. तब लोगों ने उनसे पता पूछा तो उन्होंने अपना नाम गणेशी ऋषिदेव और घर का पता साहुगढ़ के सिहपुर बताया था. वह अपनी बेटी के लिए खाना भी लाया था. कर्मियों ने बताया कि उनलोगों को लगा कि अब मुन्नी अपने पिता के साथ चली जायेगी. लेकिन रिक्शा ले कर आने की बात कह कर अस्पताल से निकला गणेशी फिर वापस नहीं लौटा.
मीडियाकर्मियों ने ध्यान कराया आकृष्ट तो हुई कार्रवाई .
शुक्रवार को मीडियाकर्मियों ने जब एसपी विकास कुमार के सामने इस मामले में स्थिति स्पष्ट की तब उनके निर्देश पर फौरन कार्रवाई की गयी. मामला संज्ञान में आने पर एसपी ने सिविल सर्जन डा गदाधर पांडेय से बात की. उन्होंने उस लड़की का इलाज करने के बाद अल्पावास गृह में शरण देने की बात कही.
इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन ने सहरसा के चाइल्ड लाइन एनजीओ को बुला कर लड़की को उनके सुपुर्द किया. मुन्नी सहरसा चली गयी. लेकिन मुन्नी वहां कितनी सुरक्षित है यह तो वक्त बतायेगा. लेकिन सवाल के घेरे में तो मुन्नी के मां बाप, अस्पताल प्रशासन, पुलिस और हमारा समाज सब हैं.
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