समस्या . मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म सहित परिसर में पसरी गंदगी

Published at :04 Mar 2016 6:11 AM (IST)
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समस्या . मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म सहित परिसर में पसरी गंदगी

स्टेशन की सुविधाएं भी बढ़ाएं जनाब मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में मधेपुरा रेलवे स्टेशन व स्टेशन पर खराब पड़ा चापाकल. पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एके मित्तल ने मधेपुरा से पूर्णिया रेलखंड पर रेल परिचालन 31 मार्च से पहले शुरू होने की बात कही है. इसके बाद मधेपुरा के लोगों को काफी राहत मिल सकती […]

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स्टेशन की सुविधाएं भी बढ़ाएं जनाब

मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में मधेपुरा रेलवे स्टेशन व स्टेशन पर खराब पड़ा चापाकल.
पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एके मित्तल ने मधेपुरा से पूर्णिया रेलखंड पर रेल परिचालन 31 मार्च से पहले शुरू होने की बात कही है. इसके बाद मधेपुरा के लोगों को काफी राहत मिल सकती है. परिचालन शुरू होने के साथ ही रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही में कई गुणा की बढोतरी हो जायेगी. इसके साथ ही स्टेशन पर मौजूद सुविधाओं पर भी काफी दवाब बढ़ जायेगा. आवागमन शुरू कराने की तैयारी में लगे रेलवे विभाग को स्टेशन की सुविधाओं में भी वृद्धि करने की तैयारी करनी चाहिए. लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं दिखायी दे रहा है.
मधेपुरा : शहर के मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा का घोर अभाव है. संपूर्ण परिसर सहित प्लेट फॉर्म और रेल पटरियों पर कूड़ा कचरा का अंबार लगा हुआ है. इस स्टेशन पर यात्रियों को शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं हो रहा है. प्लेटफॉर्म पर घूमते आवारा पशु और कुत्तों के कारण ट्रेन का इंतजार करते यात्री भयभीत रहते हैं. वहीं ट्रेन की संख्या कम रहने और समय के अव्यवहारिक निर्धारण के कारण रेल की यात्रा मधेपुरा वासियों के लिए सिरदर्द बन जाती है.
अधिकारी आते हैं तो सफाई
मधेपुरा रेलवे स्टेशन परिसर में साफ – सफाई का घोर अभाव है. स्थानीय दुकानदार बताते है कि वरीय अधिकारी के आगमन पर ही स्टेशन की साफ सफाई की जाती है. रेल पटरी और प्लेटफॉर्म पर फैले मलमूत्र के कारण बदबू से यात्री परेशान रहते हैं.
प्रतीक्षालय के दीवारों पर पान – गुटका की पीक से रंगी है. प्लेट फॉर्म पर स्थित मूत्रालय की साफ सफाई नहीं होने के कारण प्लेटफॉर्म पर पेशाब बहता रहता है. यात्री नाक पर रूमाल रख कर ट्रेन की प्रतीक्षा करते हैं. रेलवे स्टेशन इन दिनों आवारा पशुओं का चारागाह बना हुआ है. प्लेट फॉर्म पर विचरण करते गाय, कुत्ता, बकरी और सुअर के कारण यात्री अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है.
यात्री सुविधा नदारद : रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा का घोर अभाव है. पानी और शौचालय के यात्री भटकते रहते हैं. प्लेटफॉर्म पर पेय जल की उपलब्धता के लिए दस नल लगाये है. लेकिन सारे नल खराब होकर बेकार हो जाते हैं. स्टेशन परिसर में तीन चापाकल हैं. इनमें से दो चालू हालत में हैं लेकिन एक खराब है. लेकिन इन चापाकल के पास पसरी गंदगी के कारण यात्री यहां का पानी पीना मुनासिब नहीं समझते हैं. मूत्रालय और शौचालय साफ – सफाई नहीं होने के कारण बेकार बन कर रह गया है. शौचालय की स्थिति के कारण महिला यात्रियों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है.
ट्रेन का कम परिचालन बड़ी परेशानी : मधेपुरा. रेल मंत्रालय की उदासीनता और मधेपुरा के रहनुमाओं की चुप्पी के कारण यह रेल खंड वर्ष 2008 में आये कोसी त्रासदी के बाद उपेक्षित होता चला गया. वर्तमान समय में यहां ट्रेन की काफी कमी है. हैरत अंगेज है कि सहरसा जाने के लिए सुबह 11 बजे के बाद पुन: दूसरे दिन सुबह तीन बजे ट्रेन का समय निर्धारित है.
इस दौरान यात्री सड़क मार्ग से सहरसा जाते हैं. गत दिनों इस रेल खंड पर बनमनखी तक ट्रेन परिचालन शुरू करने की घोषणा जोर शोर से की गयी थी. लेकिन बनमनखी तक जाने के लिए मात्र दो ट्रेन दी गयी है. वह भी शाम पौने सात के बाद रात के तीन बजे दी गयी है. ऐसे में मधेपुरा वासियों के लिए रेल की यात्रा दूर कोड़ी ही साबित हो रही है.
कहते हैं शहरवासी
रेलवे स्टेशन की दुर्दशा और रेल प्रशासन की उपेक्षा के बाबत शहरवासी राकेश श्रीवास्तव कहते हैं कि जब भी स्टेशन जाते है तो प्लेटफॉर्म पर व्याप्त दुर्गंध से काफी परेशानी होती है. रात के समय स्टेशन पर भय लगता है. महिलाओं के साथ ट्रेन पकड़ने के लिए जाने पर काफी परेशानी महसूस होती है. कर्पूरी चौक निवासी व्यवसायी रमण कुमार पिंटू ने कहा कि जिस तरह मधेपुरा विकसित हो रहा है. ऐसे में स्टेशन की दुर्दशा देख कर दुख होता है.
एक तरफ यहां मेडिकल कॉलेज रेल इंजन कारखाना जैसे निर्माण हो रहे है तो दूसरी तरफ स्टेशन की नियमित साफ सफाई नहीं होना शर्मनाक है. जूता दुकानदार सरफराज अहमद कहते है कि मधेपुरा स्टेशन राजनीति का शिकार हो कर रह गया है. यहां रात के समय अंधेरा पसरा रहता है. राजनेताओं को इस तरफ ध्यान देना होगा.
साइबर कैफे संचालक रंजन कुमार ने कहा कि बड़ी रेल लाइन होने के बावजूद आज तक लंबी दुरी की एक भी ट्रेन का मधेपुरा से नहीं खुलना हमारे जनप्रतिनिधियों के लिए शर्मनाक है. मधेपुरा वासी सहरसा जाकर ट्रेन में सीट के लिए माथा पच्ची करते है. राजनेताओं को ध्यान देना होगा.
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