ड्रैनेज विभाग नहीं रहने से हजारों एकड़ जमीन बनी दलदल

Published at :05 Jan 2016 6:36 PM (IST)
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ड्रैनेज विभाग नहीं रहने से हजारों एकड़ जमीन बनी दलदल

ड्रैनेज विभाग नहीं रहने से हजारों एकड़ जमीन बनी दलदल — उदाकिशुनगंज पेज की लीड — फोटो – 06कैप्शन – भवन के लगा झाड़ी – जल जमाव व कोसी के कटाव से निजात दिलाने के लिए उदाकिशुनगंज में 1971 में हुई थी ड्रैनेज विभाग का प्रमंडलीय कार्यालय की स्थापना – 1994 में इस कार्यालय का […]

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ड्रैनेज विभाग नहीं रहने से हजारों एकड़ जमीन बनी दलदल — उदाकिशुनगंज पेज की लीड — फोटो – 06कैप्शन – भवन के लगा झाड़ी – जल जमाव व कोसी के कटाव से निजात दिलाने के लिए उदाकिशुनगंज में 1971 में हुई थी ड्रैनेज विभाग का प्रमंडलीय कार्यालय की स्थापना – 1994 में इस कार्यालय का अस्तित्व किया गया समाप्त, यहां से कोपरिया गया कार्यालय – लाखों की लागत से बना कार्यालय भवन हो गया खंडहर – इलाके में अब भी हजारों एकड़ जमीन पर जल जमाव की समस्या प्रतिनिधिउदाकिशुनगंज, मधेपुरा. उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन लगातार जलजमाव के कारण दलदली बनी हुई है. कोसी के दियरा क्षेत्र होने के कारण पानी सालों भर लगा रहता है. वर्षों पहले बनाये गये ड्रैनेज परियोजना अगर विफल न हुई होती तो अनुमंडल क्षेत्र की हजारों एकड़ जमीन पर फसल लहलहा रही होती. निचली जमीन के जल जमाव से निजात दिलाने, ऐसी जमीन को उपजाउ बनाने और क्षेत्र को कोसी के कटाव से निजात दिलाने के दृष्टिकोण से कांग्रेस शासन काल में उदाकिशुनगंज में ड्रैनेज विभाग के प्रमंडलीय कार्यालय की स्थापना की गयी थी. इस प्रमंडल में पूर्णिया राजस्व जिला भी शामिल था. किंतु लालू प्रसाद के शासन काल में उक्त कार्यालय का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया. पदाधिकारियों के चले जाने से विभागीय भवन खंडहर बन गया है. कुछ लोगों ने यहां कब्जा भी कर लिया गया है. हालांकि इसकी जानकारी प्रशासन को भी है. अब ड्रैनेज नहीं होने के कारण मधेपुरा के उदाकिशुनगंज अनुमंडल में ही पांच सौ एकड़ से अधिक जमीन पर सालो भर पानी लगा रहता है. अगर ड्रैनेज विभाग काम कर रहा होता तो ये जमीन उपजाउ होती. ड्रैनेज विभाग द्वारा बनाये गये एकाध ड्रैनेज धार और नहर अब भी इस क्षेत्र में विद्यमान हैं. — 1971 में बना था कार्यालय — वर्ष 1971 में राज्य सरकार ने ड्रेनेज विभाग का प्रमंडलीय दफ्तर अनुमंडल मुख्यालय में स्थापना की स्वीकृति दी थी. 1972 में ही कार्यालय का भवन बन कर तैयार हो गया है और इसी वर्ष कार्यालय पूर्णत: काम करना शुरू कर दिया था. इस प्रमंडलीय कार्यालय परिसर में ही पांच सवडीविजन दफ्तर की स्थापना भी की गयी. इस प्रमंडलीय कार्यालय के अधीन ही मधेपुरा के साथ – साथ राजस्व जिला सहरसा और पूर्णिया भी हुआ करता था. — स्थापनाकाल में सृजित किये गये पद– कार्यों के निष्पादन के लिए कार्यपालक अभियंता के अलावा पांच सहायक अभियंता, 16 कनीय अभियंता, 80 सहायक एवं आदेश पाल का पद सृजित करते हुए पदस्थापित किये गये थे. इस दौरान सैंकड़ों एकड़ जमीन से पानी हटा कर उपजाउ बनाया गया. जल जमाव वाले जमीन से जल निकासी के लिए ड्रेनेज की खुदाई कर कोसी नदी से जोड़ दिया गया. राज्य में लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने ज्ञापांक 3648, दिनांक 9 सितंबर 1994 को इस कार्यालय का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया. यह कार्यालय वर्ष 1985 में उदाकिशुगंज से कोपरिया चला गया. लाखों रूपये की लागत से निर्मित कार्यालय का भवन बेकार हो खंडहर बन गया. उदाकिशुनगंज अनुमंडल का अधिकांश भाग बाढ़ प्रभावित है. अगर यह दफ्तर प्रभावी होता तो आलमनगर प्रखंड के कपसिया, मुरौत, सुखाड़ घाट, छतौना बासा एवं चौसा प्रखंड के बड़ीखाला गांव के लोग कोसी कटाव से विस्थापित नहीं होते. कोसी कटाव का निरोधात्मक कार्य इस विभाग को ही करना है. लेकिन यहां कार्यालय और पदाधिकारी नहीं रहने से कोसी कटाव से लोग विस्थापित हो कर नरक नुमा जिंदगीबसर कर रहे हैं. — पांच सौ एकड़ से अधिक जमीन पर पानी– पुरैनी प्रखंड में मुसहरिया चौर में करीब 140 एकड़, उदाकिशुनगंज और पूर्णिया सीमा पर भवानीपुर बड़ी चौर करीब तीन सौ एकड़, उदाकिशुगंज के भलुवाही चौर में करीब साठ एकड़, बिहाीरगंज के गमैल में करीब 55 एकड़ और उदकिशुगनंज के ही मुरली चंदवा चौर में करीब एक सौ एकड़ जमीन में आज भी सालों भर पानी लगा रहता है. अगर विभाग होता तो इन जगहों पर किसान सोना उगा रहे होते. अगर पुन: प्रमंडलीय कार्यालय की स्थापना हो जाती है तो लोगों को काफी लाभ होगा. किसानों के अलावा मजदूर वर्ग के लोगों को भी राजगार मिलता. जल जमाव और कोसी कटाव से निजात मिलती.

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