शहर में लोगों को नहीं उलब्ध है शुद्ध पानी

Published at :19 Dec 2015 6:52 PM (IST)
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शहर में लोगों को नहीं उलब्ध है शुद्ध पानी

शहर में लोगों को नहीं उलब्ध है शुद्ध पानी — इस खबर को पेज तीन की लीड बनायें — — प्रभात खास —फोटो – मधेपुरा 30कैप्शन – सफेद हाथी बन कर खड़ा है जिला मुख्यालय में यह जल मीनार – जिला मुख्यालय में शुद्ध पेय जल की जलापूर्ति पर सालों से लगा है ग्रहण- लौहयुक्त […]

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शहर में लोगों को नहीं उलब्ध है शुद्ध पानी — इस खबर को पेज तीन की लीड बनायें — — प्रभात खास —फोटो – मधेपुरा 30कैप्शन – सफेद हाथी बन कर खड़ा है जिला मुख्यालय में यह जल मीनार – जिला मुख्यालय में शुद्ध पेय जल की जलापूर्ति पर सालों से लगा है ग्रहण- लौहयुक्त जल वाले इस कोसी क्षेत्र के गांवों में लोग पानी के कारण होते हैं बीमार प्रतिनिधिमधेपुरा़ जिला मुख्यालय में सरकार लोगों को शुद्ध पेय मुहैया कराने की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल साबित रही है. न तो लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और न ही नगर परिषद इस दिशा में अब तक कोई कदम उठा पाया है. मधेपुरा में आम लोग पेय जल के लिए चापाकल पर ही निर्भर हैं. सार्वजनिक तौर पर एक भी आयरनमुक्त पानी की व्यवस्था नहीं की गयी है. अगर कहीं गाहे बगाहे संयंत्र लगाये भी गये तो वे लगने के कुछ समय बाद ही खराब हो गये. — 70 के दशक में बिछी थी पाइप– ऐसा नहीं है कि मधेपुरा शहर में शुद्ध पेय जला आपूर्ति की कोई योजना नहीं बनायी गयी. जानकार बताते हैं कि सन 1970 के दशक में मधेपुरा में पेय जल आपूर्ति योजना लागू की गयी. मधेपुरा तब लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का मुख्यालय पूर्णिया ही था. सदर अस्पताल के निकट जल मीनार बनाया गया. पाइप भी बिछाया गया. लेकिन इन पाइपों में पानी प्रवाहित नहीं हो पाया. इस दौरान पीएचइडी की ओर से जल मीनार संचालन के लिए कर्मचारी की नियुक्ति भी की गयी. वे लोग जल मीनार प्रक्षेत्र में ही रह भी रहे थे. जलापूर्ति की बाट जोहते जोहते शहर वासी इसकी बात भूल गये. कुछ कर्मचारी सेवा निवृत्ति के बाद अब भी इसी परिसर में कच्चा घर बना कर रहते हैं. ——-इनसेट ———–लैंड मार्क के लिए रह गया है पानी टंकी का उपयोगफोटो – मधेपुरा 22 – शहनवाज शमीमफोटो – मधेपुरा 23- अमरेश कुमारफोटो – मधेपुरा 24 – रोशन राजफोटो – मधेपुरा 25 – मो मसकुलफोटो – मधेपुरा 26 – मो सरफराजफोटो – मधेपुरा 27 – ज्योतिष कुमार फोटो – मधेपुरा 28 – मो सद्दाम फोटो – मधेपुरा 29 – गजेंद्र राम प्रतिनिधिमधेपुरा मधेपुरा में पानी टंकी चौक तो सब जानते हैं लेकिन इस टंकी से पानी निकलता शायद ही किसी ने देखा हो. इसके बारे में शहर के रहमान गंज निवासी शहनवाज शमीम कहते हैं कि पानी टंकी बचपन से ही देख रहे हैं. परंतु इससे कभी पानी निकला. हमेशा यह लैंड मार्क के तौर पर उपयोग किया जाता है. शहर के आनंद विहार मोहल्ले के निवासी अमरेश कुमार ने बताया कि पब्लिक को शुद्ध पानी पिलाना सरकार का दायित्व है. लोग लौह युक्त पानी पीते हैं. इसके कारण तरह-तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है. नप क्षेत्र के वार्ड संख्या 25 निवासी रोशन राज ने बताया कि सप्लाई का पानी पीना मधेपुरा वासियों के लिए सपने से कम नहीं. प्रशासन को इस ओर अविलंब ध्यान देना चाहिए. वहीं रहमानगंज के ही मो मसकुल ने बताया कि शुद्ध पानी तो सबके लिए जरूरी है लेकिन प्रशासन एवं सरकार को इसकी तनिक भी सुध नहीं है. मसजिद चौक निवासी मो सरफराज ने कहा कि सरकार ने आम लोगों को शुद्ध पेय जल मुहैया कराने के लिए जलापूर्ति योजना शुरू की थी. लेकिन दुख की बात है कि लोग दूषित जल पी रहे हैं. आदर्शनगर में रहने वाले ज्योतिष कुमार ने बताया कि सप्लाई पानी से ही क्या हो जायेगा. अन्य जगहों पर जहां पानी टंकी से जल की आपूर्ति की जा रही वहां पानी दूषित ही है. गोसाय टोला निवासी सद्दाम ने बताया कि मधेपुरा शहर में वह 26 साल के हो गये लेकिन पानी टंक से अब तक पानी की सप्लाई होती नहीं देखी. चापाकल का पानी ही सब पीते हैं. बड़े लोग तो अपने घरों में मशीन लगवा लेते हैं. लेकिन गरीब तो चापाकल पर ही निर्भर हैं. वार्ड नंबर दो के निवासी गजेंद्र राम ने बताया कि जब वह किशोरावस्था में थे तो कुछ दिनों के लिए जलापूर्ति हुई थी. लेकिन क्यों बंद हुआ और क्यों नहीं दुबारा शुरू हुआ, इसकी जानकारी नहीं. —- वर्जन —‘ मधेपुरा नगर परिषद क्षेत्र में जलापूर्ति योजना की जिम्मेदारी नगर एवं आवास विभाग की है. विभाग की ओर से नगर परिषद क्षेत्र में जलापूर्ति योजना के तहत शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराने के लिए करीब 16 करोड़ की राशि आवंटित की गयी है. बिहार राज्य जल परिषद के द्धारा योजना क्रियान्वयन करना है.’ – संजय कुमार, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, मधेपुरा — ‘ करीब छह माह पहले ही नगर विकास विभाग की ओर से आवंटित राशि को बिहार राज्य जल परिषद को उपलब्ध करा दी गयी है. लेकिन अब तक इस दिशा में क्या प्रगति हुई है इसकी जानकारी नहीं है.’ – डा विशाल कुमार बबलू, अध्यक्ष, नगर परिषद—- मैंने हाल ही में प्रभार लिया है. फिलवक्त मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है. – विनय कुमार सिंह, प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद ——-इनसेट ———-अगर मिले शुद्ध जल तो बदलेगी जिंदगी – कोसी क्षेत्र के पानी में लौह की मात्रा सामान्य स्तर से काफी अधिक होने के कारण फैलती है कई बीमारी प्रतिनिधिमधेपुरा विगत चार महीने के भीतर जिले के मुरलीगंज के जीतापुर, सिंहेश्वर के इटहरी गहुंमनी आदि इलाके में डायरिया का प्रकोप फैला तो कई लोगों की जान पर बन आयी. ये दृश्य जिले के विभिन्न इलाकों में आम हैं. इन बीमारियों का सीधा कारण दूषित पेय जल से जुड़ा है. कोसी क्षेत्र के जल में लौह सहित अन्य दूषित अवयव होने के कारण लोगों के शुद्ध पेय जल की काफी जरूरत है. इसके कारण लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है. इस क्षेत्र के लोगों में पाचन संबंधित बीमार सहित पेट की अन्य बीमारियां पायी जाती है. लोगों की आय का खासा हिस्सा उनकी बीमारी पर खर्च होता है और उनकी जिंदगी भी प्रभावित हो जाती है. चिकित्सकों की मानें तो कोसी क्षेत्र के पेय जल में मौजूद दूषित अवयवों के कारण लीवर, लीवर इंफेक्शन, डायरिया, कोलेरा, जौंडिस, अतिसार, बुखार, हेपेटाइटिस ए आदि बीमारी आम है. सदर अस्पताल में पदस्थापित डा संतोष कुमार, डा सजल कुमार, डा पी भास्कर, डा विपिन गुप्ता, डा डीपी गुप्ता आदि चिकित्सकों के साथ प्रभात खबर की बातचीत में यह साफ तौर पर सामने आया कि अगर लोगों को शुद्ध पेय जल मुहैया तो वे कई बीमारियों से बच सकते हैं. यहां के लोगों का अधिकतर समय और पैसा बीमारी के इलाज में व्यय होता है. अगर ये समय और पैसे बचें तो यह क्षेत्र समृद्ध हो जायेगा.

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