रंजीत की डायरी पर लिखी अपहरण की स्क्रिप्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Nov 2016 2:32 AM (IST)
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मामला दिल्ली के मार्बल व्यवसायी बंधु सुरेश व कपिल के अपहरण का लखीसराय : बिहार में बैठ कर यूपी, दिल्ली व मुंबई के बिल्डरों व व्यवसायियों का अपहरण यूं ही नहीं किया गया था, बल्कि गहरी साजिश रची गयी थी. अपहरण के इस फिल्मी कहानी के दो पात्र हैं. एक रंजीत कुमार तो दूसरा रंजीत […]
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मामला दिल्ली के मार्बल व्यवसायी बंधु सुरेश व कपिल के अपहरण का
लखीसराय : बिहार में बैठ कर यूपी, दिल्ली व मुंबई के बिल्डरों व व्यवसायियों का अपहरण यूं ही नहीं किया गया था, बल्कि गहरी साजिश रची गयी थी. अपहरण के इस फिल्मी कहानी के दो पात्र हैं. एक रंजीत कुमार तो दूसरा रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन. रंजीत कुमार सूत्रधार था व रंजीत मंडल पूरे खेल का मास्टरमाइंड.
दरअसल, रंजीत मंडल से संपर्क में आने से पहले रंजीत कुमार दिल्ली, यूपी व मुंबई में व्यवसायियों की कंपनी में काम कर चुका था. काम के दौरान उसने एक डायरी बनायी थी, इसमें कई बिल्डरों व व्यवसायियों के नंबर थे. रंजीत ने कंपनी का काम तो छोड़ दिया लेकिन अपनी डायरी साथ ले आया था. इसके बाद वह लखीसराय जिले के जंगल, पहाड़ी वाले दुर्गम इलाके में सक्रिय अपराधी गैंग के संपर्क में आ गया. यहां पर उसकी मुलाकात 90 के दशक में चरम पर रहे अपहरण उद्योग के सरगनाओं के गुर्गे रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन से हुई.
सरगनाओं के सक्रिय राजनीति में आने के बाद उनका प्रभाव अपराध जगत में कम हो गया व उसकी जगह रंजीत मंडल ने ले ली. उसने कुछ नक्सली संगठन के लोगों से संबंध बनाया व अब कजरा के पहाड़ी व जंगली इलाकों में अपनी धमक कायम कर ली व अपना गैंग बनाकर खुद उसे लीड करने लगा. इधर दिल्ली से काम छोड़ कर आये रंजीत कुमार से रंजीत मंडल की अच्छी दोस्ती हो गयी.
रंजीत कुमार की डायरी हाथ लगने के बाद रची साजिश
दोनों के साथ आने के बाद एक दिन रंजीत मंडल को रंजीत कुमार की डायरी हाथ लगी, उसमें कुछ मोबाइल नंबर थे. रंजीत मंडल ने रंजीत कुमार से बातचीत में पता चला कि यह मोबाइल नंबर बिल्डर व व्यवसायियों के हैं, तो उसने उन्हें अगवा करने की साजिश रची. इसी नंबर के आधार पर रंजीत मंडल मार्बल व्यवसायी बंधुओं के संपर्क में आया.
रंजीत कुमार ने लाइनर का किरदार निभाया व दिल्ली जाकर सुरेश व कपिल को विश्वास में लिया. इधर रंजीत मंडल फोन पर बात करता व उसने व्यवसायियों को टेंडर दिलाने का झांसा दिया व दोनों भाई को जाल में फंसा लिये. इससे पहले यूपी के नारायण यादव का जो अपहरण हुआ था, रंजीत कुमार की डायरी से मिले नंबर के आधार पर ही संपर्क किया था.
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