हरूहर में मिले शिकारमाही का अधिकार

Published at :14 Oct 2016 12:50 AM (IST)
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हरूहर में मिले शिकारमाही का अधिकार

लखीसराय : बड़हिया प्रखंड के मत्स्य जीवी सहयोग समिति लिमिटेड पाली के दर्जनों मछुआरों ने गुरुवार को जिला परिषद अध्यक्ष रामशंकर शर्मा उर्फ नुनू बाबू को अपनी फरियाद सुनायी. जिप अध्यक्ष के सरकारी आवास पर इस दौरान जदयू जिलाध्यक्ष रामानंद मंडल, मत्स्यजीवी के विजय साहनी एवं पाली पंचायत के पूर्व मुखिया सत्यनारायण महतो भी मौजूद […]

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लखीसराय : बड़हिया प्रखंड के मत्स्य जीवी सहयोग समिति लिमिटेड पाली के दर्जनों मछुआरों ने गुरुवार को जिला परिषद अध्यक्ष रामशंकर शर्मा उर्फ नुनू बाबू को अपनी फरियाद सुनायी. जिप अध्यक्ष के सरकारी आवास पर इस दौरान जदयू जिलाध्यक्ष रामानंद मंडल, मत्स्यजीवी के विजय साहनी एवं पाली पंचायत के पूर्व मुखिया सत्यनारायण महतो भी मौजूद थे.

मत्स्य जीवी सहयोग समिति के सचिव हीरा सहनी ने जिप अध्यक्ष को पत्र देकर कहा कि 22 अप्रैल 1991 को बिहार सरकार की घोषणा के मुताबिक नि:शुल्क शिकारमाही का अधिकार परंपरागत मछुआरे का रहेगा. मछुआरा को इसके अलावा जीविकोपार्जन का अन्य साधन नहीं है. महतो समुदाय के लोग मछली का शिकार करने पर जान से मारने की धमकी देते हैं. मत्स्य जीवी पाली के लोगों ने मछली मारने की व्यवस्था करने की गुहार जिप अध्यक्ष से लगायी. जिप अध्यक्ष ने जिला मत्स्य पदाधिकारी से अपने आवास पर विचार विमर्श करने के बाद अन्य अधिकारी व दूसरे अन्य लोग से बातचीत कर शुक्रवार को इस संबंध में उचित फैसला लेने की बात कही.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न हुए तनाव को समाप्त किया जायेगा और मछुआरों को सुविधा प्रदान की जायेगी. वहीं मछुआरा समुदाय के रामावतार साहनी, सातो साहनी आदि ने बताया कि इस समस्या से निदान को लेकर पूर्व में भी डीएफओ से गुहार लगाते हुए नियम पूर्वक मछली मारने की बात कही गयी थी. बावजूद इसके दूसरे पक्ष के लोग मछली मारने से मना कर रहे हैं.

पाली में मछली मारने को लेकर तनाव : लखीसराय. जिले के बड़हिया के टाल दियारा स्थित पाली पंचायत के पाली गांव में दो गुटों में तनाव है. हरूहर में मछली मारने को लेकर पाली में एक महीने से मछुआरा समुदाय एवं महतो समुदाय के बीच कई बार मारपीट एवं गोलीबारी होने से बचा है. मंगलवार को भी मछली मारने को लेकर इस गांव के दो पक्षों ने लाठी ,डंडा एवं आग्नेयास्त्र का प्रदर्शन किया, लेकिन वीरूपुर थानाध्यक्ष संजीव कुमार के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हुई.

थानाध्यक्ष ने बताया कि शुरुआत में महतो समुदाय के लोगों द्वारा मछली मारने की नीयत से जाल लगाया गया, लेकिन मछुआरा समुदाय के लोगों के शिकायत पर जाल हटवा दिया गया. जिला मत्स्य पदाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि नदी में मछली मारना नि:शुल्क है. इससे राजस्व की कोई प्राप्ति नहीं होती है. नदी में मत्स्य नियमावली को पूरा करने के बाद ही मछली मारने की इजाजत दी जा सकती है. इधर थानाध्यक्ष ने लखीसराय डीएफओ को तनाव को लेकर यहां दंडाधिकारी के रूप में एक मत्स्य पदाधिकारी को तैनात करने को लिखा है.

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