मकर संक्रांति में तिलकुट का है विशेष महत्व

मकर संक्रांति में तिलकुट का है विशेष महत्व विद्वानों व पुरोहितों की मानें तो 15 जनवरी को सुबह 7:46 से मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करने के पश्चात मनाया जायेगा मकर संक्रांति का त्योहार जिले में दो से तीन करोड़ का होता है तिलकुट का कारोबार सगे-संबंधियों के लिए संदेश के रूप में ले […]
मकर संक्रांति में तिलकुट का है विशेष महत्व विद्वानों व पुरोहितों की मानें तो 15 जनवरी को सुबह 7:46 से मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करने के पश्चात मनाया जायेगा मकर संक्रांति का त्योहार जिले में दो से तीन करोड़ का होता है तिलकुट का कारोबार सगे-संबंधियों के लिए संदेश के रूप में ले जाते हैं लोग फोटो : 5(तिलकुट की खरीददारी करते लोग) प्रतिनिधि, जमुईमकर संक्रांति के अवसर पर तिलकुट के इस्तेमाल का अपना एक विशेष महत्व है. इसी वजह से मकर संक्रांति को तिला संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. तिलकुट विक्रेताओं के अनुसार लोग दूसरे प्रदेश में रहने वाले सगे-संबंधियों के लिए जिले में बनने वाले अलग-अलग किस्म के तिलकुट को संदेश के रूप में ले जाते हैं. विद्वानों की मानें तो मकर संक्रांति के मौके पर तिलकुट या तिल से बनी सामग्रियों के इस्तेमाल के पीछे कई प्रकार की किवंदतियां प्रचलित हैं. लेकिन मूल रूप से वैज्ञानिक कारण यह हैं कि तिल, गुड़ व चीनी की तासीर गर्म होती है. इसलिए इसके मिश्रण से बनने वाली तिलकुट या अन्य सामग्री शरद ऋतु में स्वास्थ्य के लिए लाभदायी होती है. जानकारों की माने तो विगत 30 से 35 वर्ष पूर्व से ही लोगों द्वारा मकर संक्रांति के अवसर पर तिलकुट का इस्तेमाल किया जा रहा है. मकर संक्रांति पर तिल दान करने से होता है पापों का नाश पंडित कृष्णकांत आचार्य उर्फ शिरोमणि झा की माने तो मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान विष्णु को काला तिल का भोग लगाने या काला तिल दान करने से भगवान विष्णु-लक्ष्मी व हमारे पितर प्रसन्न होते हैं तथा सारी व्याधि भी दूर होती है व सभी पापों से मुक्ति मिलती है. भगवान विष्णु के पसीने से ही तिल की उत्पत्ति हुई थी. तिलकुट एक, वेराइटी अनेक मकर संक्रांति को लेकर पूरा बाजार से तिलकुट से पट चुका है. बाजार में बनी स्थायी व अस्थायी दुकानों में प्लेन गुड़, प्लेन चीनी, गजक, केशर पापड़ी, खोवा पापड़ी, मेवा पराठा, अखरोट पिस्त, काजू खास्ता समेत कई वेराइटी के तिलकुट 160 रुपये से लेकर 650 रुपये प्रति किग्रा तक की कीमत में बिक्री के लिए उपलब्ध है. खोवा तिलकुट की मांग तिलकुट कारोबारियों की मानें तो लगभग डेढ़ माह पूर्व से ही हमलोग स्थानीय व बाहरी कारीगरों की मदद से तिलकुट बनाने के काम में लग जाते हैं. पूर्व में जहां लोग प्लेन गुड़ व प्लेन चीनी वाला तिलकुट खरीदते थे. वहीं अब खोवा वाले तिलकुट की मांग बढ़ गयी है. महंगाई ने घटायी बिक्री मकर संक्रांति के अवसर पर तिलकुट बेचनेवाले सुनील कुमार, शंकर गुप्ता, राम कुमार, विनोद गुप्ता, संजय कुमार आदि ने बताया कि हमलोग पिछले पांच-छह वर्ष से इस कारोबार से जुड़े हुए हैं. बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर जिले में दो से तीन करोड़ का कारोबार होता है. महंगाई की वजह से बिक्री पर 25 से 30 प्रतिशत तक असर पड़ा है.
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