दहेज हत्या मामले में पति को उम्र कैद

Published at :29 Aug 2017 6:43 AM (IST)
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दहेज हत्या मामले में पति को उम्र कैद

80 हजार रुपये के लिए सात अगस्त 2013 को ससुरालवालों ने इंदु देवी को जलाकर मार डाला था लखीसराय : सोमवार को व्यवहार न्यायालय के एफटीसी के न्यायाधीश विश्वनाथ प्रसाद के कोर्ट ने दहेज प्रथा के एक मामले में एक अभियुक्त को आजीवन करावास की सजा सुनायी है. दहेज हत्या के मामले में आइपीसी 304 […]

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80 हजार रुपये के लिए सात अगस्त 2013 को ससुरालवालों ने इंदु देवी को जलाकर मार डाला था

लखीसराय : सोमवार को व्यवहार न्यायालय के एफटीसी के न्यायाधीश विश्वनाथ प्रसाद के कोर्ट ने दहेज प्रथा के एक मामले में एक अभियुक्त को आजीवन करावास की सजा सुनायी है. दहेज हत्या के मामले में आइपीसी 304 बी व 498 ए में छह अभियुक्तों में एक अभियुक्त मुकेश यादव पर विचारण किया गया. जिसमें 304 बी में आजीवन कारावास एवं 498 ए में आजीवन कारावास के अलावे तीन वर्ष की सजा सुनाई. साथ ही पांच हजार का आर्थिक दंड भी लगाया गया.
लोक अभियोजक यदुनंदन प्रसाद ने बताया कि चानन प्रखंड के कांड संख्या 47 /15, सेशन केस नं 702/ 15 के सूचक जमुई जिले के ढंढ ग्राम निवासी मोहन यादव के अनुसार उनकी बेटी इंदु देवी की शादी चानन प्रखंड के गोपालपुर निचला टोला इंद्रदेव यादव के पुत्र मुकेश यादव से हिंदू रीति रिवाज के साथ संपन्न हुई थी. इस दौरान इंदू ने एक बच्ची को भी जन्म दिया,
जिसका दो वर्ष में ही देहांत हो गया़ अभियुक्त व उसके परिजन सूचक की बेटी इंदु देवी को एक लाख रुपया व एक बाइक दहेज के रूप में लाने के लिये बराबर प्रताड़ित करते रहते रहते थे. किसी तरह इंदु देवी के पिता इंद्रदेव ने 20 हजार रुपया अपनी बेटी के ससुरालवालों को दिया. फिर भी वे लोग नहीं माने और 80 हजार रुपये के लिए इंदु देवी को उसके पति मुकेश यादव, देवर सतीश यादव, ससुर इंद्रदेव यादव, सास रूको देवी, दो ननद प्रियंका कुमारी बराबर प्रताड़ित करते रहते थे. दिनांक सात अगस्त 2013 को तीन बजे इंद्रदेव यादव को सूचना मिली कि उसकी बेटी इंदु देवी को जला कर मार डाला गया.
सूचना मिलने पर इंद्रदेव अपने परिवार के साथ गोपालपुर पहुंचा तो बेटी को जली अवस्था में पाया और घर छोड़ ससुरालवाले फरार हो चुके थे. इस मामले में इंदु के पति मुकेश यादव पर विचारण के बाद न्यायालय उसे भदवि की धारा 304 बी में आजीवन कारावास की सजा तथा 498 ए में तीन वर्ष की अलग सजा सुनायी और पांच हजार का आर्थिक जुर्माना भी लगाया. अभियुक्त के तरफ से वरीय अधिवक्ता वरेंद्र शर्मा जबकि लोक अभियोजक के रूप में वरीय एपीपी राम विलास शर्मा थे.
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