ठेकेदार ने 12 मजदूरों को बनाया बंधक

Published at :01 Aug 2013 4:04 AM (IST)
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ठेकेदार ने 12 मजदूरों को बनाया बंधक

* मजदूरों को रोजगार दिलाने के नाम पर ले गया था आंध्रप्रदेश किशनगंज : शहर से सटे चकला पंचायत के 19 मजदूरों को रोजगार दिलाने के नाम पर परदेश ले जाने तथा उन्हें बंधक बना कर मजदूरी करवाने का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा ठेकेदार के चंगुल से किसी तरह जान बचा […]

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* मजदूरों को रोजगार दिलाने के नाम पर ले गया था आंध्रप्रदेश

किशनगंज : शहर से सटे चकला पंचायत के 19 मजदूरों को रोजगार दिलाने के नाम पर परदेश ले जाने तथा उन्हें बंधक बना कर मजदूरी करवाने का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा ठेकेदार के चंगुल से किसी तरह जान बचा कर भागे सात मजदूरों के घर वापसी के बाद हुआ.

मजदूरों द्वारा आपबीती सुनाये जाने के बाद इलाके के लोग आक्रोशित हो उठे. उन लोगों ने पंचायत के भेरियाडांगी निवासी दलाल के सहयोगी अब्दुल हक पिता स्व मुसलिम को पकड़ कर पंचायत भवन में बंधक बना लिया. घटना की जानकारी मिलने पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने ग्रामीणों के चंगुल से किसी तरह दलाल के सहयोगी को निकाला.

अब्दुल हक द्वारा आगामी 15 अगस्त तक शेष सभी मजदूरों की सकुशल वापसी के वादे के बाद स्थानीय लोगों की सहमति से उसे तत्काल छोड़ दिया गया. दलालों की गिरफ्त से छूट कर आये मजदूरों दलाल के सहयोगी से पूछताछ के उपरांत मिली जानकारी के अनुसार, गत 27 मई को अब्दुल हक का मालदा निवासी साढ़ू अरजाद अली चकला गांव पहुंच बेरोजगार युवकों को रोजगार दिलाने का बहाना बना कर अपने साथ ले गया. इस दौरान अरजाद ने सभी मजदूरों के परिवार को 1500 रुपये घर खर्च के लिए दिया था. कोलकाता में काम दिलाने के बहाने ले जाये गये इन मजदूरों को आंध्रप्रदेश ले जाकर उन्हें रुहुल नामक दलाल को सौंप टावर निर्माण कार्य में लगा दिया गया. तब से मजदूरों की कोई खबर खैरियत परिजनों को मिलने पर वे व्याकुल हो गये.

उन लोगों ने जब अब्दुल हक से इस संबंध में पूछताछ की, तो वे उनके जल्द घर वापसी का भरोसा दिलाता रहा. घर के कमाऊ सदस्य के परदेश जाकर गायब हो जाने के बाद परिजन किसी अनिष्ट की आशंका से कांप उठे थे. पुन: अब्दुल हक को पकड़ने के बाद उसने सात परिवारों को एकएक हजार रुपये दिया.

दलालों के चंगुल से भाग कर घर लौटे मजदूरों ने बताया कि उन्हें काम के दौरान दलाल द्वारा सिर्फ दो जून की रोटी मुहैया करा कर 18-20 घंटे तक हाड़तोड़ मेहनत कराया जाता था. उन्हें घर वालों से फोन कर बातचीत करने तक की इजाजत नहीं थी. इस संबंध में पूछे जाने पर टाउन थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अताबुल, जाकिर, फागू लाल शर्मा, नजीमुल हक, मुन्ना शर्मा, त्रिदेव शर्मा लोगिन शर्मा दलालों के चंगुल से भाग कर घर पहुंच चुके हैं, जबकि अनामुल, हैदर, मुजाहिद, मतलीब, अलीमुद्दीनी, मो अरशद, अख्तर जमील, उत्तम शर्मा, बजारू शर्मा, स्लीप शर्मा, शिवा शर्मा शंकर प्रमाणिक अब भी दलालों की चंगुल में फंसे हैं. श्री सिंह ने कहा कि फोन से इन मजदूरों से संपर्क किया गया है.

मजदूरों ने एडवांस में उठायी गयी रकम को 15 अगस्त तक चुकता हो जाने की बात कही है. वहीं दलालों ने भी रकम चुक जाने के बाद सभी मजदूरों के घर वापसी के संकेत दिये हैं. उन्होंने बताया कि गांव वालों के दबाव के कारण अब्दुल हक के खिलाफ फिलहाल किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी है. 15 अगस्त तक शेष मजदूरों की घर वापसी होने पर समुचित कार्रवाई की जायेगी.

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