दारोगा जी नहीं पकड़ सके कंप्यूटर का माउस
Updated at : 06 Dec 2016 6:38 AM (IST)
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सरकार की योजना पर लगा ग्रहण गोगरी : बदलते परिवेश में आधुनिकता सिर चढ़ कर बोल रहा है. लेकिन तमाम प्रयास व कवायद के बाद भी कई दारोगा जी अब तक कंप्यूटर का माउस नहीं पकड़ सके हैं. मतलब जाहिर है कि आधुनिकीकरण के नाम पर आज तक जिले के थाने को विधिवत कंप्यूटरीकृत नहीं […]
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सरकार की योजना पर लगा ग्रहण
गोगरी : बदलते परिवेश में आधुनिकता सिर चढ़ कर बोल रहा है. लेकिन तमाम प्रयास व कवायद के बाद भी कई दारोगा जी अब तक कंप्यूटर का माउस नहीं पकड़ सके हैं. मतलब जाहिर है कि आधुनिकीकरण के नाम पर आज तक जिले के थाने को विधिवत कंप्यूटरीकृत नहीं किया गया. एक दो थाने में कंप्यूटर चल रहा है,
लेकिन वह निजी स्तर पर. ऐसे में जिले में कंप्यूटर से कार्य की बात बेमानी है. जब कंप्यूटर ही नहीं तो इंटरनेट की बात ही क्या करना. पूर्व में उठी आधुनिकीकरण की दिशा में पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सदर डीएसपी कार्यालय, गोगरी डीएसपी और सर्किल इंस्पेक्टर को कंप्यूटरीकृत किया गया. लेकिन वह प्रक्रिया एसपी और डीएसपी कार्यालय तक ही जाकर सिमट गयी. ले-देकर एक मात्र कंप्यूटर गोगरी थाने में सर्किल इंस्पेक्टर को आवंटित किया गया. यहां दर्ज मामले का सुपरविजन निकाला जाता है लेकिन प्राथमिकी को अपलोड नहीं किया जाता है.
ऑनलाइन अपलोडिंग हो तो कैसे : सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की बात यहां बेमानी है. जिसमें कहा गया है कि प्राथमिकी के चौबीस घंटे के अंदर एफआइआर की कॉपी पुलिस वेबसाइट पर अपलोड हो. यहां तो वादी-प्रतिवादी दोनों को एफआइआर प्राप्त करने में कई दिन लग जाते हैं. सच तो यह है कि इक्के-दुक्के थाने में ही कंप्यूटर व इंटरनेट की सुविधा है.
ऑपरेटरों के पद स्वीकृत, बहाली एक भी नहीं : बताया जाता है कि पुलिस महकमे में भी कंप्यूटर ऑपरेटर के पद स्वीकृत हैं. लेकिन दुर्भाग्य यह कि आज तक इन सृजित पदों पर एक भी बहाली नहीं हुई है. अलबत्ता कई जगहों पर वैसे सिपाही से काम लिया जाता है जो कंप्यूटर में ट्रेंड हैं.
पिछले वर्ष कई कर्मियों को मिला था प्रशिक्षण
राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर वर्ष 2015 में पुलिस महकमे को कंप्यूटरीकृत करने की योजना बनी थी. कई कंप्यूटरों की खरीदारी भी हुई थी. कई शिफ्टों में पुलिसकर्मियों को खगड़िया में कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिलवाया गया. प्रशिक्षण मिल गया लेकिन कंप्यूटर के अभाव में कर्मियों द्वारा सीखी गयी बात भी भुला दी गयी. थाना में सर्किल को कंप्यूटर तो मिल गया लेकिन बांकी थाने को कुछ भी नहीं मिला.
कहते हैं डीएसपी
डीएसपी राजन कुमार सिन्हा ने बताया कि ऑनलाइन एफआइआर के लिए फॉर्मेट उपलब्ध नहीं है. जिसके कारण यह सुविधा नहीं मिल पा रही है. तकनीकी कारणों से थाने को कंप्यूटरीकृत नहीं किया जा रहा है. इसमें अभी वक्त लगेगा.
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