संकट का साथी बना डेबिट कार्ड

Published at :15 Nov 2016 1:49 AM (IST)
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संकट का साथी बना डेबिट कार्ड

खगड़िया : छोटे शहरों में अब तक डेबिट कार्ड समाज के एक खास वर्ग तक सीमित था. लेकिन अब इसका चलन बढ़ गया है. सरकार द्वारा 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोट का प्रचलन बंद करने के बाद उत्पन्न हालात ने एटीएम की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है. गोगरी स्थित आवरण वस्त्रालय के […]

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खगड़िया : छोटे शहरों में अब तक डेबिट कार्ड समाज के एक खास वर्ग तक सीमित था. लेकिन अब इसका चलन बढ़ गया है. सरकार द्वारा 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोट का प्रचलन बंद करने के बाद उत्पन्न हालात ने एटीएम की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है. गोगरी स्थित आवरण वस्त्रालय के मालिक मनोरंजन कुमार झा कहते हैं

कि पहले शहर में डेबिट कार्ड से भुगतान करने वालों की संख्या न के बराबर थी. लेकिन जेब में रुपये नहीं होने से परेशान शहरवासियों ने पहली बार प्लास्टिक मनी में अपनी रुचि दिखाई. स्वाइप मशीन का सिस्टम अपनाया है. अस्थायी ही सही लेकिन लोग अब इसके लाभ को जान गए हैं.

आने वाले समय में इसका लाभ शहरवासियों को तो मिलेगा ही शॉपिंग काम्पलेक्स संचालकों की आमदनी भी बढ़ेगी. वहीं विजय वस्त्रालय के संचालक ने कहा कि अधिकांश लोगों के लिए अभी तक डेबिट कार्ड महज एटीएम कार्ड बनकर रह गया था. लेकिन जिस तरह पिछले तीन दिनों में बिग बाजार में लोगों ने खरीदारी में डेबिट कार्ड का प्रयोग किया आने वाले समय में प्लास्टिक मनी का प्रचलन बाजार को नई दिशा प्रदान करेगा.

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