जिंदगी बचाने के नाम पर हो रहा मौत का कारोबार

Published at :25 Oct 2016 1:11 AM (IST)
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जिंदगी बचाने के नाम पर हो रहा मौत का कारोबार

दुखद. नर्सिंग होम लोगों की जिंदगी से कर रहा खिलवाड़ न डिग्री का पता और न ही सरकारी नियम कायदे की फिक्र… बस बड़े-बड़े बोर्ड पर नामी-गिरामी डॉक्टर का नाम लिख दिया और जिंदगी बचाने के नाम पर मौत का कारोबार शुरू हो गया. खगड़िया के गली-मोहल्ले में कुकुरमुत्ते की तरह संचालित निजी नर्सिंग होम […]

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दुखद. नर्सिंग होम लोगों की जिंदगी से कर रहा खिलवाड़

न डिग्री का पता और न ही सरकारी नियम कायदे की फिक्र… बस बड़े-बड़े बोर्ड पर नामी-गिरामी डॉक्टर का नाम लिख दिया और जिंदगी बचाने के नाम पर मौत का कारोबार शुरू हो गया. खगड़िया के गली-मोहल्ले में कुकुरमुत्ते की तरह संचालित निजी नर्सिंग होम में कुछ इसी तरह जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
खगड़िया : अगर आप खगड़िया के निजी नर्सिंग होम में इलाज करवाने जा रहे हैं तो वहां पर लगे बोर्ड में अंकित डॉक्टर के बारे में पूरी तरह छानबीन कर लीजियेगा. वरना लेनी की देनी पड़ सकती है. बड़े-बड़े बोर्ड पर अंकित डॉक्टर वहां काम भी करते हैं या नहीं इसकी भी कोई गारंटी नहीं है. खुदा ना करें कि आपको ऑपरेशन करवाना पड़े तो इस बात की गहन तहकीकात कर लें कि ऑपरेशन करने वाले सही में डॉक्टर हैं भी या नहीं. जी हां खगड़िया के गली-मोहल्ले सहित दूर-दराज के इलाके में इलाज के नाम पर ठगी का काला कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा है. सरकारी नियम कायदे को ठेंगा दिखाते मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी दाल में काला की ओर इशारा कर रहे हैं.
परमानंदपुर हॉस्पिटल करुआ मोड़ में कुछ दिनों पहले महादलित युवक पंकज कुमार का डॉ अमित कुमार के द्वारा ऑपरेशन बाद स्थिति बिगड़ने पर बड़ा बवाल हुआ था. धरना-प्रदर्शन से लेकर जांच के लिये टीम बनी लेकिन मामला फाइलों में दब गया. दिव्य नर्सिंग होम में जिस डॉ अमित कुमार का नाम पुरजा में अंकित रहने की बात कही जा रही है संयोग से उन्होंने ही परमांदन अस्पताल में भरती महादलित युवक पंकज का ऑपरेशन किया था. कार्रवाई नहीं होने से फर्जी निजी नर्सिंग होम में जिंदगी की आस में पहुंचे लोग मौत के आगोश में समा रहे हैं या जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई लूटा रहे हैं.
खास बातें
निजी नर्सिंग होम में इंसानों की जिंदगी से खिलवाड़ पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी से उठ रहे सवाल
गली-मोहल्लों में सरकारी मापदंड की अनदेखी कर संचालित दर्जनों नर्सिंग होम की जांच में हो रही कोताही
गौछारी से प्रसव के लिए पहुंची पिंकी का तीन-तीन बार ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर थे भी या नहीं … संशय बरकरार
दिव्य नर्सिंग होम में बिना मेरी सहमति के ही बोर्ड व पूरजा पर मेरे नाम का गलत कर रहा है. इसके खिलाफ डीएम व सीएस को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की जायेगी. दिव्य नर्सिंग होम में प्रसव के लिए भरती पिंकी का ऑपरेशन मैंने नहीं किया है. क्लिनिक के संचालक रिंकेश कुमार के कहने पर नवजात के जन्म प्रमाण पत्र पर सिर्फ हस्ताक्षर किया है.
डॉ सचिन कुमार गौतम
क्लिनिक संचालक फरार
इधर, दिव्य नर्सिंग होम में भरती पिंकी के गलत ऑपरेशन बाद मचे बवाल के बीच गरदन फंसते देख क्लिनिक संचालक रिंकेश कुमार उर्फ पिंकेश फरार हो गये हैं. सोमवार को क्लिनिक का मुआयना में मौके पर दो मरीज भरती थे. लेकिन मौके पर ना तो कोई डॉक्टर नजर आये और ना ही क्लिनिक से जुड़े कोई कर्मचारी. बताया गया कि दो दिनों से नर्सिंग होम संचालक नहीं आ रहे हैं. इधर, पूरे मामले में डीएम जय सिंह के कड़े रुख को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस मामले को पचा पाना मुश्किल लग रहा है.
फोन नहीं उठा रहे सिविल सर्जन
बिना रजिस्ट्रेशन के ही सरकारी मापदंड को ठेंगा दिखाते हुए गोगरी के मुश्कीपुर में संचालित दिव्य नर्सिंग होम प्रकरण मीडिया में तूल पकड़ने के बाद उठने वाले सवाल का जवाब देने से सिविल सर्जन कन्नी काट रहे हैं. सोमवार को जिले के सरकारी मापदंड की अनदेखी कर संचालित दर्जनों निजी क्लिनिक में हो रहे काले कारोबार पर रोक लगाने संबंधी सवाल का जवाब जानने के लिये सिविल सर्जन के सरकारी मोबाइल नंबर पर कई बार फोन करने के बाद भी रिसीव नहीं किया गया.
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर थे भी या नहीं…
गोगरी के मुश्कीपुर कोठी में संचालित दिव्य नर्सिंग होम में तीन-तीन बार ऑपरेशन करवाने के बाद मौत के करीब पहुंची पिंकी प्रकरण में किसने ऑपरेशन किया इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है. डिलवरी के लिये किये गये सिजेरियन बाद आंत का चिपक जाने सहित इंफेक्शन जैसी घटना सामने आने के बाद ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक पर सवाल उठना लाजिमी है. इधर, क्लीनिक में काम करने वाले चिकित्सकों ने पिंकी के ऑपरेशन से इनकार करते हुए पल्ला झाड़ लिया है.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पिंकी का ऑपरेशन किसने किया. एक नहीं तीन-तीन बार पेट खोल कर ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर थे भी या नहीं . यह भी क्लिनिक संचालक बताने को तैयार नहीं है. पुरजा पर डॉ सचिन कुमार गौतम का हस्ताक्षर है, लेकिन चार चिकित्सकों में से डॉ अमित कुमार के नाम के नीचे चिह्न लगा दिया गया है…
उन्होंने भी इस ऑपरेशन से इनकार कर दिया है. वैसे भी क्लीनिक संचालिक रिंकेश उर्फ पिंकेश के द्वारा जिस डॉ सचिन कुमार गौतम द्वारा ऑपरेशन का दावा किया जा रहा है उन्होंने इससे इनकार करते हुए उल्टे बिना सहमति के ही बोर्ड पर अपने नाम के गलत इस्तेमाल का आरोप क्लिनिक संचालक पर लगा दिया है. बताया जाता है कि क्लीनिक पहुंचने पर सिजेरियन ऑपरेशन करने के एवज में पिंकी के परिजन से 20 हजार रुपये ऐंठ लिये गये. एक नहीं तीन-तीन बार ऑपरेशन बाद फिलहाल पिंकी देवी पटना के नर्सिंग होम में कराह रही है.
19 अगस्त को दिव्य नर्सिंग होम में सिजेरियन करवा कर प्रसव बाद से विभिन्न अस्पतालों में गुजर रही जिंदगी अब बोझ सी लगने लगी है. कर्ज लेकर इस आस में निजी नर्सिंग होम में इलाज करवाने पहुंची थी कि जल्दी ठीक हो जायेंगे. हमें तो यह भी पता नहीं कि दिव्य नर्सिंग होम में किस डॉक्टर ने तीन-तीन बार ऑपरेशन किया. वह डॉक्टर थे भी या नहीं?
पिंकी देवी, पीड़ित महिला
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