प्रथम श्रेणी पशु चिकत्सिा केंद्र की स्थिति दयनीय

Published at :19 Oct 2015 10:24 PM (IST)
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प्रथम श्रेणी पशु चिकत्सिा केंद्र की स्थिति दयनीय

गोगरी : अनुमंडल क्षेत्र पशुपालन व कृषि प्रधान क्षेत्र माना जाता है. तथा यहां 70 फिसदी लोगों के जीविका का मुख्य साधन कृषि व पशुपालन हीं है. और हजारों की सख्यां में यहां पशुओं का पालन होता है. इसके बावजूद गोगरी में पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आती है. सरकारी स्तर पर खोले […]

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गोगरी : अनुमंडल क्षेत्र पशुपालन व कृषि प्रधान क्षेत्र माना जाता है. तथा यहां 70 फिसदी लोगों के जीविका का मुख्य साधन कृषि व पशुपालन हीं है. और हजारों की सख्यां में यहां पशुओं का पालन होता है. इसके बावजूद गोगरी में पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आती है.

सरकारी स्तर पर खोले गये पशु चिकित्सा केंद्र विभागीय उदासीनता व अधिकारीयों के लापरवाही के कारण मृतप्राय सा हो गया है. केंद्रों की स्थिति दयनीय बनी है. जहां पशु चिकित्सा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है. ग्रामीण इलाकों की बात छोर अगर अनुमंडल मुख्यालय स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सा केंद्र की करें तो यहां भी केंद्र भगवान भरोसे हीं चल रहा है. जहां पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था की दयनीय स्थिति बनी है.

क्या है केंद्र का हालकहने को तो यह केंद्र अनुमंडल मुख्यालय का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सा केंद्र है. लेकिन यहां पशु चिकित्सा हेतु न तो समुचित संसाधन है और न ही चिकित्सक व कर्मी हीं है. पशु चिकित्सा केंद्र मात्र एक भ्रमणशील पशु चिकित्सक के सहारे चल रहा है. जो पशु चिकित्सा के नाम पर किसानों को सिर्फ सलाह या दवा लिख कर हीं दे पाते है. और पशुपालकों को दवा बाजार से खरीदना पड़ता है. यहां दवा आदि सुविधा का आभाव है.

सरकारी स्तर पर जो भी दवा उक्त केंद्र को मुहैया कराया जा रहा है वह नकाफी साबित हो रही है. आलम यह है कि यहां पशुओं के गभार्धान हेतु सीमेन तक की व्यवस्था नहीं रहती है. ऐसे में पशुपालक जहां तहां व झोला छाप पशु चिकित्सक के शरण में जाने को मजबूर है.केंद्र में कर्मी व चिकित्सक का है घोर कमीवैसे तो हर केंद्र पर पशु चिकित्सक व कर्मी का आभाव है. गोगरी के कुल पांच पशु चिकित्सा केंद्रों में कहीं भी चिकित्सक नहीं है.

गोगरी के प्रख्ंाड पशुपालन अधिकारी हीं सभी केंद्र एक साथ देख रहे हैं. वहीं गोगरी प्रथम श्रेणी केंद्र में मात्र एक भ्रमणशील पशु चिकित्सक पद स्थापित है. यहां न तो और कोई चिकित्सक हैं और न हीं सहायक चिकित्सक हीं है. कर्मी के नाम पर यहां एक प्रखंड कार्यालय के हीं कर्मी कार्यरत है.

जबकि यहां कम से कम दो चिकित्सक व दो सहायक के साथ कम से कम तीन अन्य कर्मी की आवश्यकता है. ऐसे में पशु चिकित्सा व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. क्या कहते है केंद्र के चिकित्सककेंद्र के भ्रमणशील पशु चिकित्सक डॉ साकेत कुमार के अनुसार सरकारी स्तर पर पशु के लिए जो प्रदत्त सुविधा केंद्र पर है वो किसानों को मुहैया करयी जा रही है. उनके अनुसार चिकित्सक व कर्मी का आभाव में परेशानी होती है. किसानों को दवा जो उपलब्ध है दी जाती है.

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