बरियाकोल सुरंग में विद्युतीकरण कार्य की गहनता से की गयी जांच

Updated at : 15 Mar 2019 3:45 AM (IST)
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बरियाकोल सुरंग में विद्युतीकरण कार्य की गहनता से की गयी जांच

जमालपुर : पूर्व रेलवे के साहिबगंज लूप लाइन के भागलपुर-जमालपुर-किऊल रेलखंड पर संपन्न रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य का जायजा लेने गुरुवार को रेलवे के मुख्य संरक्षा आयुक्त मो. लतीफ खान जमालपुर पहुंचे. पहले चरण में भागलपुर से जमालपुर और बाद के चरण में जमालपुर से अभयपुर रेलवे स्टेशन का उन्होंने विंडो निरीक्षण के माध्यम से इस […]

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जमालपुर : पूर्व रेलवे के साहिबगंज लूप लाइन के भागलपुर-जमालपुर-किऊल रेलखंड पर संपन्न रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य का जायजा लेने गुरुवार को रेलवे के मुख्य संरक्षा आयुक्त मो. लतीफ खान जमालपुर पहुंचे.

पहले चरण में भागलपुर से जमालपुर और बाद के चरण में जमालपुर से अभयपुर रेलवे स्टेशन का उन्होंने विंडो निरीक्षण के माध्यम से इस रेलखंड में इलेक्ट्रिफिकेशन के तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की.
भागलपुर से इंस्पेक्शन स्पेशल ट्रेन से विभिन्न स्टेशनों एवं एलसी गेट का निरीक्षण करते हुए वे काफी देर तक बरियाकोल सुरंग अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य का जायजा लिया. हालांकि आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई.
परंतु निरीक्षण के क्रम में उन्होंने सुरंग के भीतर ओवरहेड वायर की ऊंचाई और रेल पटरी से इलेक्ट्रिक पोल की दूरी तथा पटरी से ओवरहेड वायर की ऊंचाई को लेकर सवाल उठाए. अलग-अलग पॉइंट पर पटरी से सुरंग के चट्टान की ऊंचाई 7.37 मीटर से 7.45 मीटर मापी गई. वहीं पटरी से ओवरहेड वायर की ऊंचाई 663 से 68 मीटर तक की थी.
जिसकी माफी के लिए लंबे ऑपरेटिंग रोड एवं मीटर टेप का इस्तेमाल किया गया था. सीआरएस को यह कहते सुना गया कि सुरंग के भीतर चट्टानों और ओवरहेड वायर के बीच की ऊंचाई में कम अंतर रहने की वजह से बरसात के दिनों में चट्टानों में होने वाली नवी एवं आद्रता इलेक्ट्रिक शार्ट का कारण बन सकता है.
विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से ली जानकारी
रेलवे संरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण के क्रम में विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की. इस क्रम में उन्होंने एक पोल से दूसरी पोल की दूरी और रेल पटरी से तार की ऊंचाई की गंभीरता से जांच की.
इलेक्ट्रिक ट्रेन परिचालन के दौरान पेंडेंट की हाइट के बीच संपर्क का मूल्यांकन किया. साथ ही रनिंग ट्रेन से रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन पोल की दूरी का भी मूल्यांकन किया. एक जगह उन्होंने रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन के अधिकारी को कहा कि यह कार्य 5 या 10 साल के लिए नहीं किया जा रहा है.
वैसे विशेषज्ञों की माने तो सीआरएस के निरीक्षण में यात्री ट्रेन परिचालन आरंभ होने के पहले इलेक्ट्रिक इंजन बदली करने के रिवरसर की सुविधा, इलेक्ट्रिक सप्लाई कांस्टेंट रहने की स्थिति, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन मार्ग पर सप्लाई प्वाइंट और कनेक्शन पॉइंट की स्थिति, फुट ओवर ब्रिज से रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन वायर की दूरी के साथ ही ओवरहेड मेंटेनेंस टीम की स्थिति तथा वहां उपलब्ध सामग्रियों की भी जांच इस इंस्पेक्शन के दायरे में आता है.
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