खड्डा मुसहरी में कागज पर चल रहा है विद्यालय

Updated at : 07 Nov 2017 4:12 AM (IST)
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खड्डा मुसहरी में कागज पर चल रहा है विद्यालय

मनमानी. बाबू उदासीन, शिक्षकों की चांदी हाल सरसवा पंचायत के महादलित बस्ती में स्थित प्राथमिक विद्यालय खड्डा मुसहरी का विद्यालय में नामांकित बच्चे अपने शिक्षक का नाम तक नहीं जानते, पठन-पाठन ठप घर बैठे उठ रहा शिक्षकों का वेतन, शिक्षा विभाग को जांच की नहीं मिली फुरसत चौथम : वर्षों पहले गांव की महादलित महिलाओं […]

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मनमानी. बाबू उदासीन, शिक्षकों की चांदी

हाल सरसवा पंचायत के महादलित बस्ती में स्थित प्राथमिक विद्यालय खड्डा मुसहरी का
विद्यालय में नामांकित बच्चे अपने शिक्षक का नाम तक नहीं जानते, पठन-पाठन ठप
घर बैठे उठ रहा शिक्षकों का वेतन, शिक्षा विभाग को जांच की नहीं मिली फुरसत
चौथम : वर्षों पहले गांव की महादलित महिलाओं द्वारा विद्यालय बनाने के लिए गांव में एक कट्ठा जमीन इस उम्मीद से दी गयी थी कि यहां के बच्चों की जिंदगी संवरेगी. महादलित के बच्चे भी पढ़ लिख कर लायक बन सकेंगे. वहीं शिक्षा विभाग के बाबुओं की उदासीनता व शिक्षकों की मनमानी के कारण सब चौपट हो रहा है. शिक्षा विभाग गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की कितनी भी दुहाई दे रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. प्रखंड के दियारा क्षेत्र अंतर्गत सरसवा पंचायत का प्राथमिक विद्यालय खड्डा मुसहरी कागज पर ही चल रहा है. घर बैठे वेतन भी उठ रहे हैं और सरकारी योजनाओं का वितरण भी कागज पर ही कर दिया जाता है.
महादलित बस्ती है इसलिए ज्यादा विरोध नहीं होता. बस इसी बात का फायदा यहां पदस्थापित शिक्षक उठा रहे हैं. नियमित जांच नहीं होने से सुधार नहीं हो रहा है. धरातल पर न तो विद्यालय है न ही शिक्षक. विभाग के खाते -बही में भवन है. विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थापित हैं. ग्रामीणों ने बताया कि हरिता गांव के संतोष कुमार प्रधानाध्यापक हैं. अन्य सहायक शिक्षक का नाम न तो ग्रामीणों को पता है न ही टोला के बच्चों को. ऐसे में विद्यालय संचालन के बारे में आप अंदाजा लगा सकते हैं.
विद्यालय का हाल जानने पहुंचे प्रभात खबर प्रतिनिधि को ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में शिक्षक कभी कभी आते हैं. महादलित टोला खड्डा मुसहरी के ग्रामीण मंखन सादा, सीधो सादा, प्रेम सादा, छठु सादा ने बताया कि यहां के बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे हैं. वर्षों से जमीन तत्कालीन मुखिया विजय यादव द्वारा भवन निर्माण का काम शुरू किया गया था, लेकिन निर्माण वर्षा से अधूरा है. गांव के बच्चे विद्यालय एवं शिक्षक का नाम तक नहीं जानते. संडे-मंडे सहित दूसरी बेसिक बातें भी बच्चों को नहीं पता. सरकारी सुविधा की जांच हो तो कई खुलासे हो सकते हैं. यहां फुरसत किसको हैं. लिहाजा, बच्चों की शिक्षा चौपट होने के साथ साथ सरकार के सपने भी चकनाचूर हो रहे हैं. इधर, पूछने पर बीइओ ने विद्यालय की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.
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