पानी की लड़ाई में जीत गये किसान

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खुशखबरी. हाइकोर्ट ने दिया जैतपुरा पंप कैनाल के निर्माण का आदेश नुआंव : हाइकोर्ट ने पिछले दिनों प्रखंड क्षेत्र के लगभग 15 हजार एकड़ खेत की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करानेवाले जैतपुरा पंप कैनाल के स्थायी निर्माण का मौखिक आदेश दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि कैनाल से किसानों को सिंचाई के लिए पानी […]

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खुशखबरी. हाइकोर्ट ने दिया जैतपुरा पंप कैनाल के निर्माण का आदेश

नुआंव : हाइकोर्ट ने पिछले दिनों प्रखंड क्षेत्र के लगभग 15 हजार एकड़ खेत की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करानेवाले जैतपुरा पंप कैनाल के स्थायी निर्माण का मौखिक आदेश दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि कैनाल से किसानों को सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था की जाय. कोर्ट के इस फैसले से किसानों में खुशी की लहर है. 16 जनवरी को कार्यकारी न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व मुख्य न्यायाधीश दिनेश कुमार सिंह ने सरकार को आदेश दिया था कि उक्त कैनाल का स्थायी रूप से निर्माण कराया जाय, ताकि किसानों के खेतों को पानी मिल सके.
वर्ष 2014 से ही किसान लड़ रहे थे कानूनी लड़ाई : वर्ष 2008 से वर्ष 2014 के बीच किसानों ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर क्षेत्र के सभी वरीय नेतागण व प्रशासनिक पदाधिकारियों से कैनाल से पानी दिलवाने की गुहार लगायी थी, पर आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ न मिला. आखिरकार क्षेत्र के किसानों ने तय किया कि पानी की लड़ाई में अब वे लोग हाइकोर्ट की शरण में जायेंगे. 14 नवंबर 2014 को गांव के किसान पंकज राय ने किसानों के हक के लिए हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी.
चंदा जुटा कर दिया अदालती खर्च : वर्षों से पानी के आभाव में सूखे खेत व भूखे पेट की आग ने किसानों को संगठित किया व इस लड़ाई को लड़ने में होनेवाला खर्च किसानों ने अपने ऊपर लिया. कानूनी लड़ाई में आनेवाले खर्च के लिए किसानों ने चंदा इकट्ठा किया. सभी किसानों ने सहमति से चंदा दिया. इस तरह कानूनी लड़ाई को जिंदा रखा गया व अंतत: जीत हासिल कर ली.
पिछले साल डीएम ने खेतों को दिलवाया था पानी: वर्षों से बंद पड़े कैनाल को चालू करवाने को लेकर चार आइएएस अफसर, कई विधायक व सांसद कैनाल का चक्कर लगा चुके थे, पर करोड़ों की लागत
से बने तीन पंप को चालू कराने में सफल नहीं हो पाये. ऐसे में इस चुनौती को स्वीकार करते हुए डीएम राजेश्वर प्रसाद सिंह ने किसानों से वादा किया कि कैनाल से हर हाल में उन्हें पानी दिलाया जायेगा. लगभग एक महीने के भीतर युद्धस्तर पर कैनाल का काम करा कर पांच पंप की मदद से सितंबर में खेतों में पानी दिलवाया गया.
वर्ष 2014 में क्षेत्र के किसानों ने पानी के लिए लगायी थी अदालत में गुहार
क्या कहते हैं किसान
अगर किसानों के हित की अनदेखी हुई, तो अन्य मुद्दों पर सामाजिक व कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.सुरेश पासवान
किसानों के हित के लिए किसान समिति का शीघ्र गठन करेंगे.
चुन्नू राय
सामाजिक मामलों मेें राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं.
चंद्र प्रकाश चौबे
क्या कहते हैं याचिकाकर्ता
यह जीत क्षेत्रीय किसानों को समर्पित है. किसान अपने हक की लड़ाई लड़ने में सक्षम हैं. किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं. जरूरत पड़ी, तो अपने हक के लिए हम सुप्रीम कोर्ट तक जायेंगे.
पंकज राय, याचिकाकर्ता
सरकार ने शपथ पक्ष में जो कहा था
सरकार द्वारा इस मामले में समय-समय पर कोर्ट में शपथ पत्र दिये गये थे. 25 जनवरी 2016 में दिये गये जवाबी शपथपत्र में राज्य सरकार ने कहा था कि वर्ष 2010 में कर्मनाशा नदी पर 851.40 लाख रुपये खर्च कर एक डीप बोरवेल योजना बनायी गयी थी, लेकिन इसमें काफी वक्त लग गया. यह देखते हुए एक करोड़ 85 लाख रुपये की एक अन्य अस्थायी योजना लायी गयी. चूंकि इस योजना में बिजली की अधिक जरूरत थी, इसलिए यह योजना भी कारगर नहीं हो सकी. इसके बाद राज्य सरकार ने 12 जनवरी 2017 को एक और शपथ पत्र दिया था. इसमें कहा गया कि बिजली कंपनी द्वारा 315 केवीएच बिजली के लिए दो ट्रांसर्फामर लगाये गये व सिंचाई विभाग द्वारा नहर की मरम्मत भी करायी गयी. बिजली आपूर्ति कंपनी ने खरीफ सत्र में अगस्त 2016 के पहले हफ्ते से अक्टूबर 2016 के पहले हफ्ते तक बिजली मुहैया करायी व इससे किसानों को कुछ लाभ मिला.
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