मानकों पर नहीं रहता ध्यान

Updated:
विज्ञापन

लापरवाही . हादसों के बाद भी सबक नहीं ले रहा परिवहन विभाग बस स्टैंड से खुलने वाले वाहनों का है बुरा हाल इमरजेंसी द्वार,अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और ओवर लोडिंग पर नहीं है ध्यान जहानाबाद : हादसों के बाद भी सचेत होने का नाम नहीं ले रहा परिवहन विभाग. बीते दिनों नालंदा के हरनौत […]

विज्ञापन
लापरवाही . हादसों के बाद भी सबक नहीं ले रहा परिवहन विभाग
बस स्टैंड से खुलने वाले वाहनों का है बुरा हाल
इमरजेंसी द्वार,अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और ओवर लोडिंग पर नहीं है ध्यान
जहानाबाद : हादसों के बाद भी सचेत होने का नाम नहीं ले रहा परिवहन विभाग. बीते दिनों नालंदा के हरनौत में हुई दिल दहलाने वाली घटना ने मानवीय मूल्यों का मूल्यांकन करने के लिए हमें झकझोर कर रख दिया है. यदि सब कुछ ठीक होता तो शायद हादसा होता ही नही.बसों पर आये दिन भेड़-बकरियों की तरह यात्रियों को लाद कर गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है, जो सिस्टम के खिलाफ है. खैर ! यहां सिस्टम की बात करना ही बेमानी होगी.
हादसों के बाद भी परिवहन विभाग चुप्पी साधे बैठा है .अगर थोड़ा भी वक्त कर्तव्य के खातिर मिलता तो सड़कों पर निकल कर चल रही बसों के मानकों की जांच जरूर करते मिल जाते .यहां तो जब हाकिम को ढूंढ़ने दफ्तर पहुंचे तो साहब छुट्टी पर हैं… कुछ ऐसा ही जवाब कई दिनों से जहानाबाद की जनता को परिवहन विभाग में मिल रहा है. महीनों तक बगैर डीटीओ के चल रहे इस दफ्तर में चंद दिनों पहले ही साहब की पोस्टिंग हुई है.
पदभार संभालते ही साहब को छुट्टी आन पड़ी है.अब बचे-खुचे अधिकारी अपने ऊपर वर्क लोड का हवाला देते हुए कुछ भी कहने से कतराते दिखे. फिलहाल हम बात कर रहे हैं जहानाबाद बस स्टैंड की, जहां से लंबी दूरी के लिए भी कई गाड़ियां खुलती है.लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ बसों में एसी और टेलीविजन की सुविधा ग्राहकों को लुभाने के लिए भले ही मिल जाये, लेकिन शायद ही कोई गाड़ी ऐसी होगी, जिसमें इमरजेंसी द्वार, अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बाॅक्स तक मौजूद होंगे.वहीं लोकल बसों का तो बुरा हाल है.
इसका जिक्र करते हुए रोंगटे तक खड़े हो जाते हैं .कड़ी धूप के बावजूद बस की छतों पर यात्रियों की रेलम-पेल है.वहीं अंदर दो सीट पर तीन यात्री एवं खड़े पैसेंजरो की भी खैर नही .भाड़ा के नाम पर एक रुपया कम नहीं, लेकिन सुविधाओं का अभाव ,शायद मानकों की यही अनदेखी बस मालिकों की कमाई का पैमाना हो. लोकल रूटों पर चलने वाली बसों में मानकों की बात तो पूछना भी सही नहीं होगा? क्योंकि यात्री से लेकर ड्राइवर तक को भी इसकी परवाह नहीं .इन बसों में कुछ भी लादने की इजाजत है.आग से लेकर केराेसिन तक सब कुछ बेरोक -टोक लादने की छूट है. इसकी मनाही की जवाबदेही कोई लेने को तैयार भी नहीं .कुछ बस चालकों ने बताया कि प्रशासन की पहल के बाद ही मानकों का ख्याल रख पाना संभव हो सकेगा.
क्या कहते हैं अधिकारी
वरीय अधिकारी से मंतव्य के बाद इस दिशा में पहल करने का प्रयास परिवहन विभाग करेगा .ताकि लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को कष्ट न हो .बस मालिक मानकों का उल्लंघन न करें, इसके लिए अभियान चलाया जायेगा.
अर्चना कुमारी,एमवीआइ, जहानाबाद
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन