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तीन बजे भोर तक ताकते रहे पंखा

तीन बजे भोर तक ताकते रहे पंखा आदत का असर- आदतन शराबियों की उड़ गयी है रातों की नींददारू की खोज में भटक रहे इधर-उधरमनमाना कीमत देने पर भी नहीं मिल रही शराबजहानाबाद. मुझे नींद न आये, चैन न आये, कोई दारू ढूंढ़ के लाये… क्या से क्या हो गया, ऐसा सोचा भी न था. […]

तीन बजे भोर तक ताकते रहे पंखा आदत का असर- आदतन शराबियों की उड़ गयी है रातों की नींददारू की खोज में भटक रहे इधर-उधरमनमाना कीमत देने पर भी नहीं मिल रही शराबजहानाबाद. मुझे नींद न आये, चैन न आये, कोई दारू ढूंढ़ के लाये… क्या से क्या हो गया, ऐसा सोचा भी न था. कुछ ऐसी हालत हो गयी है पूर्णत: शराबबंदी के बाद आदतन शराबियों की. उनके दिन का चैन व रातों की नींद उड़ गयी है. दारू के बिना वे अपने को असहाय महसूस कर रहे हैं. उनमें चिड़चिड़ापन की प्रवृति पनप गयी है. उनकी स्थिति ऐसी हो गयी है की वे मनमाना रुपया देने को तैयार हैं. बस, उन्हें तलाश है एक वैसे व्यक्ति की जो उनकी इच्छा पूरी कर दे. उन्हें शराब उपलब्ध करा दें. लेकिन शराब के शौकीन लोगों की यह इच्छा शायद पूरी होने वाली नहीं है. क्योंकि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं मिल रहा है जो ऊंची कीमत देने पर भी शराब उपलब्ध करा सके. पूर्णत: शराबबंदी कानून लागू होने के बाद व्यापक लोगों में उत्साह चरम पर है. लेकिन तकलीफ हो रही है वैसे युवाओं को जिन्होंने शराब के सेवन को जरूरी समझते हुए उसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था. उनकी लत आज उन्हें इतना परेशान कर रखा है कि शराब की चोरी छिपे वे खोज कर रहे हैं. अपने दोस्तों को मान-मनोवल कर रहे हैं. शहर के सब्जी हाट एरिया के निवासी और शराब सेवन करने के शौकीन एक युवक सुरेंद्र कुमार (काल्पनिक नाम) अपने साथियों के बीच अपना दुखड़ा सुना रहा था. कह रहा था कि उसे तीन बजे भोर तक नींद नहीं आयी रात भर करवटें बदलते रहे. कमरे में लगे पंखे को ताकते रहे. कभी टीवी स्टार्ट कर सिनेमा देखते तो कभी छत पर टहलने लगते. कुछ ऐसी ही स्थित अरवल मोड़ के समीप रहने वाले और बीयर पीने के शौकीन एक युवक की थी. मंगलवार को उसने पूणत: शराबबंदी की खबर सुनकर राज्य सरकार को कोसना शुरू कर दिया. इन दिनों तरह-तरह के लोग ऐसे मिल रहे हैं जो शराबबंदी पर अपना-अपना पक्ष अपने हिसाब से रख रहे हैं. कोई कह रहा है कि सरकार को अचानक ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था. अरवल मोड़ के समीप चाय की एक दुकान पर कुछ लोगों की भीड़ के बीच सरकार के निर्णय पर बहस मुबाहिसा करते देखा गया. एक युवा नेता का मानना है कि शराबबंदी से मृत्युदर में कमी आयेगी. बिहार की जनसंख्या बढ़ जायेगी. उनका तर्क था कि शराब के सेवन से अप्रिय घटनाओं में लोग असमय काल कवलित हो जाते हैं. अब ऐसा नहीं के बराबर होगा. जिससे मृत्यु दर में कमी आयेगी. शराबबंदी पर सरकार को दी बधाई.राज्य सरकार के द्वारा पूर्णत: शराबबंदी पर महागंठबंधन के नेताओं ने हर्ष व्यक्त किया है और कहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री ने यह कानून लागू कर इतिहास रचा है. इससे राज्य में विकास होगा. पूर्व मंत्री व जदयू के प्रदेश महासचिव अभिराम शर्मा ने शराबंबदी के फैसले को साहसी और ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने चार माह पूर्व विधानसभा चुनाव के वक्त जनता से जो वादा किया था उसे पूरा किया. शराबबंदी के लिए सीएम को बधाई देने वालों में इबरार अहमद. प्रवक्ता संजय कुमार सिंह के अलावा मुकेश कुमार सिंह, बैजनाथ शर्मा, अनिल केशरी, अरुण कुमार, जदयू जिलाध्यक्ष जयप्रकाश नारायण, युवा जदयू जिलाध्यक्ष दिलीप कुशवाहा, रामजी कुशवाहा, महेश ठाकुर, मुरारी यादव, और सतीश कुमार सिन्हा आदिशामिल हैं.

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