मंदिर के घंटे के बीच गूंजता है दो एक्कम दो, दो दूनी चार...
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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दोनों युवकों के प्रयास की समाज में हो रही है प्रशंसा जमुई : शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त कुव्यवस्था को देख दो युवाओं पर इतना असर हुआ कि उन्होंने इसे खत्म कर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से कुछ करने की की ठानी. जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत नवडीहा व जमुई के ये […]
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दोनों युवकों के प्रयास की समाज में हो रही है प्रशंसा
जमुई : शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त कुव्यवस्था को देख दो युवाओं पर इतना असर हुआ कि उन्होंने इसे खत्म कर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से कुछ करने की की ठानी. जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत नवडीहा व जमुई के ये युवक इन दिनों सिंगारपुर महादलित बस्ती के निर्धन बच्चों के भविष्य संवारने में जुटे हैं. सिंगारपुर गांव स्थित झिकुटिया महादेव मंदिर के सामने सामुदायिक भवन मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह स्कूल का नजारा देखा जा सकता है. जहां एक तरफ जिले में डेढ़ हजार से भी ज्यादा विद्यालयों के बच्चों की शिक्षा के लिए प्रयासरत होने के बावजूद कई बच्चे मूलभूत शिक्षा से वंचित रह जाते हैं,
ऐसे में इन दोनों युवकों के इस प्रयास की समाज में भूरी भूरी प्रशंसा हो रही है. जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत नवडीहा गांव के रहने वाले अमित कुमार सिंह उर्फ कल्लू तथा जमुई निवासी विवेक कुमार सिन्हा मूल रूप से छात्र हैं तथा आर्थिक रूप से इतने समृद्ध भी नहीं है. इसके अलावा दोनों ही ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा करते हैं. ऐसे में निर्धन बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का इनका प्रयास पूरे समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है.
पढ़ाई के साथ-साथ कराया जाता है कराटे व योग का अभ्यास
बच्चों को शिक्षा दे रहे दोनों युवकों ने बताया कि तीन हफ्ते पहले जब उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था तब उन्होंने महादलित बस्ती के पांच बच्चों के साथ इसकी शुरुआत की थी. परंतु आज इनके पास प्रतिदिन छह से 14 वर्ष तक के लगभग 85 बच्चे पढ़ने आते हैं. ये सभी बच्चे निर्धन व श्रमिक परिवार से हैं. उनका कहना है कि इसे वे आदर्श व समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका मानकर सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि सिंगारपुर गांव स्थित महादलित बस्ती में एक नवीन प्राथमिक विद्यालय हुआ करता था, जिसे बाद में विभाग के द्वारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिंगारपुर से टैग कर दिया गया. जिस कारण यह बच्चे विद्यालय जाने में असमर्थ हो गये तथा शिक्षा से वंचित रहने लगे. इसके अलावा कुछ बच्चे जो विद्यालय जा भी रहे हैं परंतु वह आर्थिक रूप से इतने समृद्ध नहीं है की ट्यूशन ले सके. ऐसे में उन बच्चों के लिए हमने मुफ्त शिक्षा देने की सोची और आज इस काम में लगे हुए हैं. बताते चलें कि सामुदायिक भवन में चलने वाले इस क्लास में प्रति सप्ताह बच्चों को कराटे व योग की भी शिक्षा दी जाती है. विवेक व अमित ने बताया कि इसके पीछे का उद्देश्य उन्हें शैक्षणिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूती प्रदान करना है. इसके लिए हम अपने दोस्तों की मदद लेते हैं तथा उन्हें योग और कराटे की शिक्षा दी जाती है. उधर शिक्षा पा रहे कई बच्चों ने कहा कि उन्हें इस तरह शिक्षकों द्वारा पढ़ाना अच्छा लग रहा है. जो चीजें वह स्कूल में पूरे 1 महीने में नहीं समझ पाते थे वह अब मात्र दो दिन में समझ जा रहे हैं. ऐसे में उन्हें पढ़ा कर काफी खुशी महसूस हो रही है.
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