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वर्ष 2003 के मतदाता सूची में है नाम, तो पुनरीक्षण के दौरान नहीं लगेगा साक्ष्य, वोटरलिस्ट को ऑनलाइन अपलोड करने की तैयारी में जुटा निर्वाचन विभाग

Updated at : 02 Jul 2025 5:27 PM (IST)
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वर्ष 2003 के  मतदाता सूची में है नाम, तो पुनरीक्षण के दौरान नहीं लगेगा साक्ष्य, वोटरलिस्ट को ऑनलाइन अपलोड करने की तैयारी में जुटा निर्वाचन विभाग

गोपालगंज. जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम, 2025 प्रारंभ हो चुका है. इस प्रक्रिया के तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म वितरित कर रहे हैं.

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गोपालगंज. जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम, 2025 प्रारंभ हो चुका है. इस प्रक्रिया के तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर एन्युमरेशन फॉर्म वितरित कर रहे हैं. आप मतदाता हैं तो परेशान मत हों. वर्ष 2003 की मतदाता सूची में आपका नाम दर्ज है, तो आपको कोई दस्तावेज देने के बदले उस मतदाता सूची की कॉपी को फॉर्म के साथ लगा देना है. अगर मतदाता सूची में नाम नहीं है, तो दस्तावेज देना अनिवार्य होगा. जिला उप निर्वाचित पदाधिकारी डॉ शशि प्रकाश राय ने मतदाताओं से अपील की है कि वे स्वयं या बीएलओ की सहायता से 2003 की सूची में अपना नाम जांच लें. जिन मतदाताओं का नाम एक जनवरी 2003 की अहर्ता तिथि तक की मतदाता सूची में शामिल है, उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत किसी भी प्रकार का दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी, चाहे उनकी जन्मतिथि कुछ भी हो.

आयोग के पोर्टल पर जाकर देख सकेंगे मतदाता सूची

सभी मतदाता भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर जाकर यह जांच कर सकते हैं कि उनका नाम एक जनवरी 2003 की मतदाता सूची में शामिल है या नहीं. आयोग द्वारा वर्ष 2003 की मतदाता सूची इस पोर्टल पर अपलोड कर दी गयी है. मतदाता लिंक पर जाकर राज्य बिहार, जिला, विधानसभा क्षेत्र और भाग संख्या डालकर संबंधित पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं. यह सूची सभी बीएलओ को हार्ड कॉपी में भी उपलब्ध करायी जा रही है ताकि स्थानीय स्तर पर भी जांच सुविधा उपलब्ध हो.माता-पिता का नाम दर्ज होने पर भी होगा आसान

डॉ राय ने बताया कि 2003 की मतदाता सूची के आधार पर अपने विवरण का सत्यापन कर गणना पत्र भरकर जमा करना होगा. यह प्रक्रिया मतदाता एवं बीएलओ दोनों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध है. यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2003 की सूची में नहीं है लेकिन उनके माता या पिता का नाम उस सूची में दर्ज है, तो ऐसे मामलों में माता-पिता के नाम का प्रासंगिक अंश ही प्रमाण स्वरूप मान्य होगा. ऐसी स्थिति में संबंधित मतदाता को केवल अपना गणना पत्र व अन्य सामान्य दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा. सभी बीएलओ को निर्देश दिया है कि तिथि आधारित इस सूची को हर स्तर पर सुलभ बनाएं ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो और विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 2025 सफलतापूर्वक संचालित किया जा सके.

आयोग ने 11 दस्तावेजों को किया मान्य

-भारत सरकार, राज्य सरकार एवं पब्लिक सेक्टर उपक्रमों में कार्यरत कर्मियों का आइ कार्ड, पेंशन पेमेंट ऑर्डर,

-पूर्व सरकारी, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, पोस्ट ऑफिस एवं एलआईसी एवं पब्लिक सेक्टर उपक्रमों द्वारा निर्गत आइ-कार्ड/प्रमाण पत्र,

-सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत जन्म प्रमाण पत्र,

-पासपोर्ट, मैट्रिक शैक्षणिक प्रमाण पत्र (मान्य बोर्ड/विश्वविद्यालय से निर्गत),

-स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र,

-वन अधिकार प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत ओबीसी, एससी, एसटी जाति प्रमाण पत्र,

-नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस, राज्य स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार फैमिली रजिस्टर,

– सरकार द्वारा निर्गत भूमि/गृह आवंटन प्रमाण पत्र.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Sanjay Kumar Abhay

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By Sanjay Kumar Abhay

Sanjay Kumar Abhay is a contributor at Prabhat Khabar.

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