शहर में आपके लाड़ले की जान खतरे में तो नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Feb 2017 4:49 AM (IST)
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चिंतित रहते हैं अभिभावक, स्कूल जाते वक्त सुरक्षित कैसे रहेंगे बच्चे गोपालगंज : आयुष अपहरणकांड के बाद छात्रा शांभवी के अपहरण ने बच्चों की सुरक्षा-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं. घर से स्कूल जाते और लौटते वक्त उनकी सुरक्षा नहीं है. बच्चों की जान की फिक्र स्कूल संचालक को भी नहीं है. ‘प्रभात […]
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चिंतित रहते हैं अभिभावक, स्कूल जाते वक्त सुरक्षित कैसे रहेंगे बच्चे
गोपालगंज : आयुष अपहरणकांड के बाद छात्रा शांभवी के अपहरण ने बच्चों की सुरक्षा-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं. घर से स्कूल जाते और लौटते वक्त उनकी सुरक्षा नहीं है. बच्चों की जान की फिक्र स्कूल संचालक को भी नहीं है. ‘प्रभात खबर’ की टीम ने बुधवार को शहर के ऐसे दस स्कूलों के वाहनों की पड़ताल की, जिसमें स्कूल बस से जानेवाले छात्र असुरक्षित मिले. खटारा वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजा जा रहा था. वाहन में सुरक्षा की दृष्टि से चालक के अलावा दूसरा कोई नहीं था. शहर के थाना चौक
पर सुबह-सुबह डीएवी स्कूल के 20-25 छात्र वाहन के इंतजार में खड़े थे. बच्चों के अभिभावक वहां नहीं थे. स्कूल वाहन 8.10 बजे पहुंचा. वाहन पर चालक के अलावा दूसरा कोई नहीं था. बच्चों को खुद से वाहन पर चढ़ना व उतरना पड़ा. डाकघर चौराहे के पास इंटरनेशनल स्कूल की खटारा खुली जीप पहुंची, जिसमें करीब 10 बच्चों को बैठाया गया था. इस तरह अन्य स्कूल के वाहनों में भी बच्चे असुरक्षित दिखे.
घर तक नहीं पहुंचाते हैं
क्या कहते हैं स्कूल यूनियन व अभिभावक
बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को भी सजग होने की जरूरत है. सुरक्षा में स्कूल संचालक के द्वारा इस आदेश की अनदेखी की जाती है, उन पर प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.
अनिल श्रीवास्तव, प्राइवेट स्कूल यूनियन के सचिव
ड्राइवर व स्कूल प्रशासन को सोचना चाहिए कि कहीं लापरवाही हुई, तो इसका हस्र कितना भयानक होगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. स्कूल को इस दिशा में सोचना चाहिए.
सोनू कुमार
स्कूल के लिए बच्चों की पढ़ाई जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही सुरक्षा भी होनी चाहिए. स्कूल वाहन चालकों की निगरानी होनी चाहिए कि वो बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रख रहे हैं या नहीं.
विपिन बिहारी दूबे
पहले हुई इस तरह वारदात से शासन-प्रशासन व स्कूल सबक नहीं लेते. स्कूल वाहन के ड्राइवर अपनी नौकरी बचाने के लिए बच्चों की नहीं सोचते, लेकिन इस दिशा में जिम्मेवारों को सोचना चाहिए.
परमा ऐलानी
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