हिमालय से पहुंची ठंडी हवाएं, पारा लुढ़का

Published at :18 Dec 2016 3:50 AM (IST)
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हिमालय से पहुंची ठंडी हवाएं, पारा लुढ़का

ठंड से 24 घंटे में दो लोगों की मौत गोपालगंज : पछुआ ने रफ्तार पकड़ी तो अगले एक दो दिनों में शीतलहरी का असर और गंभीर दिख सकता है. ठंड जानलेवा बनती जा रही है. पिछले 24 घंटे में दो लोगों की मौत हुई है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है. दोपहर में […]

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ठंड से 24 घंटे में दो लोगों की मौत

गोपालगंज : पछुआ ने रफ्तार पकड़ी तो अगले एक दो दिनों में शीतलहरी का असर और गंभीर दिख सकता है. ठंड जानलेवा बनती जा रही है. पिछले 24 घंटे में दो लोगों की मौत हुई है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है. दोपहर में धूप खिली, पर लोगों को गरमी का एहसास नहीं हुआ. ठंडी हवाओं के कारण तापमान में भी कमी दर्ज की गयी. शनिवार को न्यूनतम तापमान 7.9 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 21.8 दर्ज किया गया. उधर, ठंड के कारण शहर की सड़कों पर चाय बेचनेवाले अनिरुद्ध प्रसाद (55 वर्ष) की उस समय मौत हो गयी, जब वह कांपते हुए अस्पताल पहुंचा. इलाज की क्रम में उसकी मौत हो गयी, जबकि बरौली थाना क्षेत्र के प्यारेपुर गांव के महावीर सोनार की मौत की बात परिजनों ने कही है.
आज से और बढ़ सकती है ठंड : मौसम वैज्ञानिक डॉ एसएए पांडेय की मानें, तो कश्मीर से चली हवाएं यहां आ पहुंची हैं. अब इनके रफ्तार पकड़ने की देरी है. इसके बाद मौसम तेजी से बदलेगा. हवाएं तेज चलीं तो फिर शीतलहरी अपना प्रकोप दिखा सकता है. इस बार दिसंबर की शुरुआत में ही सर्दी ने रफ्तार पकड़ ली.
ठंड से बचाएं बेबसों की जान :
फुटपाथ और गांव की गलियों में एक शाल या फटे हुए कंबल में लिपटे लोगों की मदद को आगे आएं. इस बार न तो कहीं कंबल का वितरण हो रहा है और न ही अलाव की व्यवस्था. शहर से लेकर गांव तक हजारों लोग ऐसे नजर आयेंगे जो ठंड से कांप रहे होते हैं.
ते हुए अपने काम में लगे हैं. कारण है गरीबी. शीतलहर से लड़ रहे इन लोगों में बुढे जवान और बच्चे सभी हैं.
अब तक जिला में ठंढ से जंग लड़ते हुए आठ से अधिक अपनी जान गंवा बैठे हैं. ऐसे में हम सबों का रिजेक्ट कपड़ा गरीबों का न सिर्फ सहारा बन सकता है बल्कि उनकी जान भी बचा सकता है. मध्यम और उच्च वर्गीय लोगों का शायद हीं कोई परिवार है जिसके घर पुराने कपड़े बेकार न पड़े हों. आपका बेकार पड़ा हुआ यह कपड़ा कइयों की जिंदगी को ठंढ से बचा सकता है. तो आइये, अपने बेकार पड़े पुराने कपड़ों को किसी गरीब को दान कर दें. भले हीं वह दुआ न दे लेकिन उसके लिए वह कपड़ा दवा का काम करेगा. यह काम आप अपने पास पड़ोस, गांव, चौराहा कहीं भी कर सकते हैं. इंसानियत के नाते यह कदम जरूर बढायें.
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