मजदूरों को नहीं मिल रहा काम, फाकाकशी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 Nov 2016 12:22 AM (IST)
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नोटबंदी के बाद निर्माण कार्य ठप होने से नहीं मिल रही मजदूरी गोपालगंज : सोमवार की सुबह नौ बजे हैं. हम जादोपुर रोड स्थित डीडीसी आवास के सामने खड़े हैं. हमारे सामने दिहाड़ी मजदूर भी काम की तलाश में खड़े हैं. नोटबंदी के बाद से यहां मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है. निर्माण कार्य […]
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नोटबंदी के बाद निर्माण कार्य ठप होने से नहीं मिल रही मजदूरी
गोपालगंज : सोमवार की सुबह नौ बजे हैं. हम जादोपुर रोड स्थित डीडीसी आवास के सामने खड़े हैं. हमारे सामने दिहाड़ी मजदूर भी काम की तलाश में खड़े हैं. नोटबंदी के बाद से यहां मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है. निर्माण कार्य से लेकर खेती-बाड़ी में उन्हें काम नहीं मिल रहा है. उनके घरों में फाकाकशी का आलम है. ऐसी स्थिति कब तक रहेगी उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है. बैंक में जमा पैसा निकाल कर काम चला रहे हैं. अब उन्हें आगे दिन के लिए चिंता सता रही है.
हर रोज सुबह आठ बजते-बजते किसी के हाथों बिकने की उम्मीद में डीडीसी आवास के सामने घंटों खड़े रह कर निराश घर लौट जाते हैं. कोई साइकिल से तो कोई भाड़े के वाहन से आकर बिना कमाये घर लौट रहे हैं. जमा पैसा किराये में भी खर्च हो रहा है. गुस्सा तो उन लोगों पर भी है जो उन्हें छोटे नोट देने की बात कह कर ले जा रहे हैं
और काम खत्म होने के बाद बड़े नोट पकड़ा कर चलता कर देते हैं. दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है. कटघरवा के रामप्रताप रोज गांव से आते हैं. दूरी करीब छह किमी है. सुबह घर से करीब छह बजे चलते हैं. इनको तीन दिनों से काम नहीं मिला है. पूछने पर नाराज हो जाते हैं. कहते हैं कि ये नौटंकी है. कमाई को कौन कहे घर तक जाने के लिए पैसे नहीं हैं.
नवादा से आनेवाले बीरबल भी उनका समर्थन करते हैं. वह बताते हैं कि हम यहां से जो लेकर जाते हैं वही हमारे परिवार की उम्मीद होती है. हर शाम उनको इसकी प्रतीक्षा होती है. फिलहाल तो काम नहीं है. अगर कहीं काम है, तो छोटे नोट नहीं हैं. बड़े नोट से कुछ होनेवाला नहीं है. अख्तर अली घर लॉक का काम कर रहे थे.
बड़े नोट बंद होने के साथ वहां भी काम बंद हो गया. उम्मीद में तीन दिनों से रोज सुबह-सुबह आकर काम की तलाश में खड़े होते हैं, पर सूरज चढ़ने के साथ ही निराश होकर लौट जाते हैं. यह सिर्फ इन्हीं की नहीं हजारों लोगों की पीड़ा है. काम खत्म होने के बाद 500 का नोट पकड़ा दिया जा रहा है, जो अब किसी काम का नहीं है.
डीडीसी आवास के पास काम के इंतजार में मजदूर.
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