आठ सौ मरीज बिना इलाज लौटे

Published at :01 May 2016 9:02 AM (IST)
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आठ सौ मरीज बिना इलाज लौटे

नर्सिंग होम निबंधन एक्ट तथा गर्भाशय कांड में प्राथमिकी दर्ज होने के खिलाफ आइएमए के आह्वान पर शनिवार को जिले भर के डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया, जिससे हजारों की संख्या में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सदर अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक ताले लटके रहे. गोपालगंज : […]

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नर्सिंग होम निबंधन एक्ट तथा गर्भाशय कांड में प्राथमिकी दर्ज होने के खिलाफ आइएमए के आह्वान पर शनिवार को जिले भर के डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया, जिससे हजारों की संख्या में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सदर अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक ताले लटके रहे.
गोपालगंज : डॉक्टरों की एक दिनी हड़ताल मरीजों की जान पर भारी पड़ी. डॉक्टर गर्भाशय कांड में प्राथमिकी दर्ज होने तथा नर्सिंग होम निबंधन एक्ट के खिलाफ सांकेतिक रूप से हड़ताल पर रहे. इसके कारण सदर अस्पताल से लेकर जिले के सभी अनुमंडलीय रेफरल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ताले लटके रहे. शहर से लेकर गांव तक के नर्सिंग होम और निजी क्लिनिक भी बंद रहे. लगभग 3000 से अधिक मरीजों को अस्पताल से मायूस होकर घर लौट जाना पड़ा, जबकि 56 मरीजों को रेफर किया गया. डॉक्टर अपनी मांग को लेकर हड़ताल पर रहे. सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्रों तक की ओपीडी नहीं खुला. हड़ताल के कारण बदन झुलसनेवाली धूप में मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
इमरजेंसी में थी वैकल्पिक व्यवस्था : हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इमरजेंसी सेवा को बहाल रखा गया था. चार डॉक्टरों को इमरजेंसी के मरीजों को देखने के लिए तैनात किया गया था. इमरजेंसी में 510 मरीजों का इलाज शाम तक किया गया था, जबकि मरीजों का आना अभी जारी था. इनमें 56 मरीजों को गोरखपुर के लिए रेफर किया गया.
मरीजों की पीड़ा उनकी जुबानी : कुचायकोट के बेलवा की रहनेवाली नीरू देवी के हाथ में तेज दर्द था. वह इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल पहुंची थी. अस्पताल में हड़ताल के कारण इलाज नहीं हुआ, तो निजी क्लिनिक जाना पड़ा. सब जगह ताला बंद होने से अंतत: गोरखपुर जाना पड़ा.
नीरू देवी
विंदवलिया की रहनेवाली माधूरी देवी अपने मासूम पोते का इलाज कराने पहुंची थी. क्लिनिक बंद होने से सदर अस्पताल में पहुंची. उन्हें भी बिना इलाज कराये घर लौटना पड़ा. मायूस होकर कड़ी धूप में गोरखपुर रवाना हो गयी.
माधुरी देवी
इलाज कराने पहुंची नगमा खातून को नहीं पता था कि शनिवार को हड़ताल है. पंचायत चुनाव के बीच वाहनों की कमी से जूझती हुई वह सदर अस्पताल पहुंची थी, जहां उन्हें मायूसी हाथ लगी और घर लौटना पड़ा.
कुचायकोट के रामपुर माधो से गर्भवती सइदा खातून चेकअप कराने के लिए डॉ मिथिलेश शर्मा के नर्सिंग होम पर पहुंची थी. नर्सिंग होम बंद रहने के कारण सदर अस्पताल पहुंची. यहां भी ताला लगा हुआ था. अंतत: लौटना पड़ा.
क्या है गर्भाशय कांड : राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए चयनित 2012-13 में नर्सिंग होमों के डॉक्टरों पर आरोप है कि बीमा की राशि हड़पने की नीयत से बेवजह महिलाओं का ऑपरेशन कर गर्भाशय निकाल दिया गया. जांच टीम की रिपोर्ट के बाद इस मामले में सिविल सर्जन के बयान पर नगर थाने में कांड संख्या- 178/16 दर्ज कराते हुए उपकार सेवा सदन, सृष्टि सौम्या अस्पताल, आलम हॉस्पिटल मीरगंज, जगदंबा नर्सिंग होम, सर्जी ब्यूरो सेंटर, विप्रसी हाॅस्पिटल, डॉ सुबास चंद्र गुप्ता हाॅस्पिटल, सौरभ हाॅस्पिटल को नामजद अभियुक्त बनाया गया है.
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