बांस के लिए असम पर पर बिहार की नर्भिरता होगी खत्म

Updated at :17 Jan 2016 6:32 PM
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बांस के लिए असम पर पर बिहार की नर्भिरता होगी खत्म

बांस के लिए असम पर पर बिहार की निर्भरता होगी खत्म पूर्णिया के अररिया और कुसियार के नहर तटों पर लगाये जायेंगे असम के बांस के पौधे असम के हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन से 15 हजार बांस के टिशु कल्चर पौधे खरीदे वन विभाग ने वन विभाग के विशेषज्ञ तीन-से-चार माह तक पूर्णिया के किसानों को […]

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बांस के लिए असम पर पर बिहार की निर्भरता होगी खत्म पूर्णिया के अररिया और कुसियार के नहर तटों पर लगाये जायेंगे असम के बांस के पौधे असम के हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन से 15 हजार बांस के टिशु कल्चर पौधे खरीदे वन विभाग ने वन विभाग के विशेषज्ञ तीन-से-चार माह तक पूर्णिया के किसानों को देंगे विशेष प्रशिक्षण प्रयोग सफल रहा, तो अन्य जिलों में भी विभाग असम के बांस का पौधारोपण करायेगासंवाददाता, पटना बिहार में हर वर्ष असम के 50 से 60 हजार बांसों की खपत होती है. असम के बांसों पर सूबे कि निर्भरता खत्म करने के लिए वन-पर्यावरण विभाग ने नयी पहल की है. बिहार के पूर्णिया के अररिया और कुसियार के नहर तटों पर आसाम के बांसों के पौधे लगाये जायेंगे. प्रयोग के तौर पर वन विभाग पूर्णिया में पहले चरण में 15 हजार बांस के पौधे लगवायेगा. वन विभाग 3.82 लाख रुपये में असम के 15 हजार बांस के पौधों की खरीद करेगा. बिहार में बांस के उत्पादन में कम-से-कम दो वर्ष का वक्त लग जाता है, जबकि असम के बांस 12 से 14 माह में ही तैयार हो जाते हैं. बिहारी बांस के उत्पादन में अधिक समय लगने के कारण किसानों की इसकी खेती में रुचि लगातार घट रही है. नतीजा यह है कि सूबे में असम के बांसों की खपत में हाल के वर्षों में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. बांस के लिए असम पर बिहार की निर्भरता समाप्त करने के लिए वन विभाग ने यहीं उसकी खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है. वन- पर्यावरण विभाग ने आसाम के 15 हजार बांस के टिशु कल्चर के पौधों की खरीद की है. इसके लिए वन विभाग ने 20 रुपये प्रति पौधों की दर से टिशु कल्चर की खरीद की है. असम के बांस के पौधों की खेती के लिए पूर्णिया के किसानों को वन विभाग के विशेषज्ञ तीन-से-चार माह तक विशेष प्रशिक्षण भी देंगे और उसका रख-रखाव भी करेंगे. वन विभाग ने आसाम के हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन से 15 हजार बांस के टिशु कल्चर पौधों की खरीद की है. वन विभाग का यह प्रयोग यदि सफल रहा, तो अन्य जिलों में भी विभाग असम के बांस का पौधारोपण करायेगा.

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