भाजपा के अंतरकलह ने डूबो दी राजग की लुटिया!

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भाजपा के अंतरकलह ने डूबो दी राजग की लुटिया! भाजपा के दिग्गज नेताओं के बूथ पर भी हार गयी पार्टीभाजपा ने गंवा दी बरौली, भोरे, कुचायकोट व हथुआ की सीटेंभाजपा से बागी राजेश सिंह ने निर्दलीय लड़ा चुनाव, हार गयी पार्टीकुचायकोट सीट को हराने के लिए भी की गयी थी जबरदस्त सेटिंगसंवाददाता, गोपालगंजभाजपा में अंतरकलह […]

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भाजपा के अंतरकलह ने डूबो दी राजग की लुटिया! भाजपा के दिग्गज नेताओं के बूथ पर भी हार गयी पार्टीभाजपा ने गंवा दी बरौली, भोरे, कुचायकोट व हथुआ की सीटेंभाजपा से बागी राजेश सिंह ने निर्दलीय लड़ा चुनाव, हार गयी पार्टीकुचायकोट सीट को हराने के लिए भी की गयी थी जबरदस्त सेटिंगसंवाददाता, गोपालगंजभाजपा में अंतरकलह की खाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी बैठक कर नहीं पाट सके. पीएम की सभा भी भाजपा के लिए संजीवनी नहीं बन पायी. अंतरकलह और प्रत्याशियों तथा पार्टी के दिग्गजों के अति विश्वास ने गोपालगंज में राजग की लुटिया डूबों कर रख दी. यहां तक की पिछली बार बरौली, कुचायकोट तथा भोरे विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा था. इनमें से बरौली और भोरे को अपनी सीट गंवा देना पड़ा. यहां सीट गंवाने के पीछे पार्टी के स्थानीय स्तर पर दिग्गज कार्यकर्ताओं के आपसी खींचतान के कारण प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा. हथुआ विधानसभा क्षेत्र पर नजर डालें, तो यहां राजद को छोड़ कर भाजपा में राजेश सिंह चुनाव लड़ने के लिए ही शामिल हुए थे. लेकिन, एनडीए के समझौते में यह सीट हम के खाते में चली गयी. हम के प्रत्याशी डॉ महाचंद्र प्रसाद सिंह बनाये गये. भाजपा से बगावत कर राजेश सिंह कुशवाहा के चुनाव लड़ने के कारण महाचंद्र सिंह को 34933 वोट मिले, जबकि राजेश कुमार सिंह को 32959 वोट मिले. रामसेवक सिंह को कुल 57917 वोट प्राप्त हुए. ठीक इसी तरह कुचायकोट की सीट पर नजर डाली जाये, तो यहां भाजपा के खुद के दिग्गज कहने वालों के बूथ पर लोजपा के प्रत्याशी काली प्रसाद पांडेय को वोट कम मिला. उनके बूथ पर भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. भाजपा के खाते से सीट निकलने के बाद 7512 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग भी अंतरकलह का दूसरा रूप था. बैकुंठपुर की सीट हराने के लिए भी भाजपा के शीर्ष स्तर पर गेम किया गया था. यहां तक कि स्टार प्रचारकों में मलाह जाति के वोटरों का इंतजार मुकेश सहनी का था, लेकिन उन्हें गोपालगंज में सभा तक करने से रोक दिया गया. भाजपा के अंतरकलह ने कुचायकोट, भोरे, हथुआ तथा बरौली सीट को गंवा दिया. वहीं, जिलाध्यक्ष ब्रम्हानंद राय का कहना है कि टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव लड़ने तक जिला कमेटी की बात नहीं सुनी गयी, जो भी निर्णय हुआ ऊपर का हुआ. अब समय आ गया है कि भाजपा पूरे बिहार की स्थिति की समीक्षा करे.

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