गांवों को बचाना मुश्किल

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बाढ़ का खतरा : गंडक का कटाव फिर हुआ बेकाबू , हंगामा गोपालगंज : गंडक नदी का कटाव दिनों दिन बेकाबू होते जा रहा है. गांव को बचा पाना अब मुश्किल होते जा रहा है. जगीरी टोला खाप मकशुदपुर तथा कटघरवा गांवों का बचना मुश्किल है. नदी की उग्र धारा के आगे बाढ़ नियंत्रण विभाग […]

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बाढ़ का खतरा : गंडक का कटाव फिर हुआ बेकाबू , हंगामा
गोपालगंज : गंडक नदी का कटाव दिनों दिन बेकाबू होते जा रहा है. गांव को बचा पाना अब मुश्किल होते जा रहा है. जगीरी टोला खाप मकशुदपुर तथा कटघरवा गांवों का बचना मुश्किल है. नदी की उग्र धारा के आगे बाढ़ नियंत्रण विभाग खुद को लाचार पा रहा है.
अब तक कराये गये बचाव कार्य नदी में समा चुका है. खाप मकशुदपुर में स्कूल और गांव को बचाने के लिए पिछले चार दिनों से काम कराया जा रहा था. ग्रामीणों के दबाव को देख विभाग ने एंटी रोजन का काम कराया था, जो विफल हो गया.
गुरुवार को ग्रामीणों ने फिर बोल्डर से बचाव कार्य कराने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया, जिससे बाढ़ नियंत्रण विभाग की मुश्किल बढ़ गयी है. दूसरी मुश्किल यह है कि नदी ने मकशुदपुर गांव के आगे टापू जैसी स्थिति खड़ी कर दी है. अब जानकार बताते हैं कि इन गांवों के अस्तित्व को बचा पाना मुश्किल है.
वहीं, नेपाल ने वाल्मिकीनगर बराज से गुरुवार की शाम 6 बजे 1.24 लाख क्यूसेक जल डिस्चार्ज किया है. कार्यपालक अभियंता शरद कुमार ने बताया कि तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है. गांवों में हो रहे कटाव से अफरा-तफरी की स्थिति है. वहीं, दूसरी तरफ गांव के लोग भी स्पष्ट हो चुके हैं कि अब गांव बचने नहीं जा रहा है. अलगे दो-तीन दिनों के भीतर कटाव इसी तरह जारी रहा, तो तीनों गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा.
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