अब एक ही परिवार में दो आय प्रमाणपत्र नहीं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गोपालगंज : आय प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा खत्म करने के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है. किसान, मजदूर से लेकर डॉक्टर सहित अन्य वर्गो की आय के मानक को निर्धारित कर दिया गया है. डॉक्टर, वकील और व्यापारियों की आय आयकर या व्यापार कर रिटर्न के अनुसार मानी जायेगी. नये नियम से एक ही परिवार […]
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गोपालगंज : आय प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा खत्म करने के लिए सरकार ने नया कदम उठाया है. किसान, मजदूर से लेकर डॉक्टर सहित अन्य वर्गो की आय के मानक को निर्धारित कर दिया गया है.
डॉक्टर, वकील और व्यापारियों की आय आयकर या व्यापार कर रिटर्न के अनुसार मानी जायेगी. नये नियम से एक ही परिवार में दो आय प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सकेंगे और न ही जांच रिपोर्ट में राजस्व कर्मचारी की मरजी चलेगी. अंचल कार्यालयों से हर दिन करीब 100 से 150 आय प्रमाणपत्र जारी होते हैं.
अभी तक गरीबों के लिए 19 हजार और अन्य के लिए 36 हजार रु पये वार्षिक आय मानक थी. हर वर्ग के लिए अलग से कोई भी मानक निर्धारित नहीं था. इसका फायदा राजस्व कर्मचारी उठाते थे और सुविधा शुल्क मिलने पर आय को कम करके दिखा देते थे. विगत सालों में एक ही परिवार में दो आय प्रमाणपत्र अलग-अलग जारी हो जाते थे.
इसे देखते हुए सरकार ने आय प्रमाणपत्र के मानकों में बदलाव किया है. कई नये मानक लागू किये गये हैं. डीएम कृष्ण मोहन का कहना है कि अब आय प्रमाणपत्र के साथ शपथपत्र नहीं लिया जायेगा. नये मानकों के अनुसार ही आय की गणना की जायेगी. इसके बाद ही प्रमाणपत्र जारी होगा.
आय प्रमाणपत्र के लिए क्या है नया मानक
– परिवार में पति-पत्नी, अविवाहित वयस्क संतान और अवयस्क के अलावा आश्रित माता-पिता शामिल होंगे.
– इन सभी की आय को जोड़ा जायेग. भले ही कोई मजदूर हो.
– अकुशल, भूमिहीन, मजदूर की वार्षिक आय 18 हजार रु पये वार्षिक होगी. इसे मनरेगा की मजदूरी से जोड़ा गया है.
– कुशल मजदूर (शिल्पकार, फेरीवाले, खोमचे वाले, पान की गुमटी वाले व अन्य छोटे व्यवसायी) 27 हजार रु पये. शहरी क्षेत्र के इसी श्रेणी के कुशल मजदूर की आय ग्रामीण क्षेत्र के इसी श्रेणी के व्यवसायियों से डेढ़ गुना यानी न्यूनतम 40 हजार रु पये होगी.
– कृषि से मिलनेवाली आय का आकलन कुल भूमि, प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन और औसत लागत से किया जायेगा. वहीं, यदि व्यक्ति सरकारी, अर्ध सरकारी या प्राइवेट नौकरी में है, तो उसकी आय को भी जोड़ा जायेगा.
– पेंशन से होनेवाली आय का आकलन किया जायेगा.
– डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट, एकाउंटेंट और बड़े व मध्यम व्यापारी होने पर उनके भवन या फिर दुकान के वार्षिक किराये की गणना. व्यापार कर विभाग में दाखिल विवरणी और इनकम टैक्स रिटर्न.
– अगर डॉक्टर या वकील इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं, तो इनकी कुल आय 60 हजार रु पये वार्षिक मानी जायेगी.
दो साल में बदलेगी कृषि भूमि से आय
नये आदेश के तहत दो साल के भीतर कृषि भूमि की आय बदल जायेगी. डीएम द्वारा हर दो साल के भीतर सिंचित, असिंचित, एक फसली, दो फसली या फिर तीन फसली आय को तय करेंगे.
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