मच्छरों को मारने के लिए छह नवंबर तक चलेगा अभियान

Updated at : 27 Sep 2019 1:21 AM (IST)
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मच्छरों को मारने के लिए छह नवंबर तक चलेगा अभियान

गोपालगंज : जानलेवा बीमारी कालाजार की रोकथाम के लिए एसपी नामक दवा का स्प्रे शुरू कर दिया गया है. जिले में 13 लाख 69 हजार 523 की आबादी को कालाजार के लिए संवेदनशील माना गया है. वहीं, मलेरिया विभाग ने छह नवंबर तक दो लाख 45 हजार 631 घरों में एसपी स्प्रे छिड़काव का लक्ष्य […]

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गोपालगंज : जानलेवा बीमारी कालाजार की रोकथाम के लिए एसपी नामक दवा का स्प्रे शुरू कर दिया गया है. जिले में 13 लाख 69 हजार 523 की आबादी को कालाजार के लिए संवेदनशील माना गया है. वहीं, मलेरिया विभाग ने छह नवंबर तक दो लाख 45 हजार 631 घरों में एसपी स्प्रे छिड़काव का लक्ष्य निर्धारित किया है.

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि दवा का छिड़काव जरूर कराएं. दवा से दीवारों पर किसी तरह का दाग व धब्बा नहीं होगा. सिविल सर्जन डॉ नंदकिशोर सिंह और स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अरविंद कुमार गुप्ता ने दवा छिड़काव कार्यक्रम की समीक्षा की. मलेरिया विभाग के मुताबिक विजयीपुर कालाजार मुक्त प्रखंड घोषित हो चुका है.
अन्य प्रखंडों के प्रभावित गांव में तेजी से दवा का छिड़काव किया जा रहा है. तीन साल पहले जिस क्षेत्रों में मरीज मिले थे, उसे मानक आधार बनाकर गांवों की सूची बनायी गयी है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ चंद्रिका साह ने कहा कि गोशालों में भी इसका छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है. कालाजार बीमारी अमूमन बालूमक्खी के काटने से ही होती है.
यह मक्खी नमी वाली जगहों पर ज्यादा निवास करती हैं. साथ ही अंधेरे स्थानों व दीवारों के छिद्र में भी रहती है. कालाजार हल्के बुखार, कमजोरी और भूख की कमी से शुरू होता है तथा कई सप्ताह में तेज बुखार, एनिमिया, लिवर का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, त्वचा का काला पड़ना, पेट फूलना, निर्बलता जैसे लक्षणों में बदल जाता है. समुचित उपचार नहीं होने पर रोगी की मृत्यु हो सकती है.
अधिकतर रोगी आम तौर पर एंटीबायोटिक लेने या मलेरिया के इलाज के फेर में बहुत खर्च कर देते हैं. कालाजार के कारण हो रहे बुखार में ये उपचार कारगर नहीं होते.
तीन माह तक नहीं करें घरों की पुताई
कालाजार की रोकथाम के लिए दवा का स्प्रे किया जा रहा है. दवा स्प्रे करने के बाद गृहस्वामी अपने घरों व दीवारों की रंगाई-पुताई करीब तीन माह तक नहीं करें. पुताई करने के बाद दवा का असर खत्म हो जायेगा.
डॉ चंद्रिका साह, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, गोपालगंज
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