बिना किताब पढ़ रहे चार लाख बच्चे

Published at :19 Jul 2017 11:22 AM (IST)
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बिना किताब पढ़ रहे चार लाख बच्चे

गोपालगंज : जिले में संचालित सरकारी स्कूलों में नामांकित करीब चार लाख बच्चे बिना किताब के ही पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षा विभाग द्वारा किताबें उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं. इससे सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं. सरकारी स्कूलों में पढ़ी जानेवाली किताबें खुले बाजार में नहीं मिलती हैं. […]

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गोपालगंज : जिले में संचालित सरकारी स्कूलों में नामांकित करीब चार लाख बच्चे बिना किताब के ही पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षा विभाग द्वारा किताबें उपलब्ध नहीं करायी गयी हैं. इससे सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं बिना किताबों के ही पढ़ाई कर रहे हैं. सरकारी स्कूलों में पढ़ी जानेवाली किताबें खुले बाजार में नहीं मिलती हैं. इससे अभिभावक चाह कर भी नहीं खरीद सकते हैं.
वहीं, स्कूलों में किताब नहीं मिलने से छात्रों के साथ-साथ अभिभावक भी परेशान हैं. यहां बता दें कि जिले में कुल 1802 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें करीब पांच लाख बच्चे नामांकित हैं. महज 20 प्रतिशत बच्चों को ही पूर्ववर्ती छात्रों से ली गयी पुरानी किताबें दी गयी हैं. वहीं करीब 80 प्रतिशत बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं.
शिक्षा विभाग द्वारा जिले को किताबें उपलब्ध नहीं करायी जा रहीं हैं. सर्व शिक्षा अभियान की जिला इकाई ने अप्रैल, 2017 में सत्र शुरू होने के पहले ही विभाग को पत्र लिख कर पांच लाख बच्चों के लिए किताबें उपलब्ध होने की मांग की थी, लेकिन करीब पांच माह बीत जाने के बाद भी विभाग किताबें नहीं भेज रहा है. इधर, सर्व शिक्षा अभियान ने रिमांइडर भेज कर किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है.
वार्षिक मूल्यांकन के समय ली गयीं थी किताबें : कक्षा एक से लेकर आठ तक की परीक्षा के वार्षिक मूल्यांकन के समय ही सर्व शिक्षा अभियान द्वारा बच्चों से किताबें ले ली गयीं थीं. जिले में 18 से लेकर 25 मार्च तक वार्षिक मूल्यांकन किया गया था. इसके बाद करीब एक लाख बच्चों के बीच पूर्ववर्ती छात्रों से ली गयी पुरानी किताबें बांट दी गयीं थीं.
विभाग नहीं भेज रहा किताबें
जिले में मिडिल स्कूल-732
जिले में प्राइमरी स्कूल- 1065
कक्षा एक से आठ में नामांकित बच्चे- पांच लाख
एक लाख बच्चों को इस सत्र में मिली हैं पुरानी किताबें
चार लाख बच्चों को इस सत्र में नहीं मिली हैं किताबे
अधिकारी का कहना है
विभाग में पत्र भेज कर पूर्व में ही पांच लाख बच्चों के लिए किताबों की डिमांड की जा चुकी है. किताब आते ही वितरण शुरू कर दिया जायेगा.
राघवेंद्र मणि त्रिपाठी, डीपीओ, सर्व शिक्षा अभियान
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